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फुलवारी शरीफ से किशनगंज तक भारत को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने की वही साजिश, जानिए ‘दरभंगा मॉड्यूल’ वाली जमीन पर कैसे गहरा रहा कट्टरपंथ का खतरा

बिहार में इस्लामी कट्टरपंथ की जड़ें काफी पुरानी हैं। ये इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन के संस्थापक का पनाहगार रहा है। किशनगंज में पूर्व पीएफआई अध्यक्ष महबूब आलम की गिरफ्तारी के बाद ये बात भी सामने आया है कि वह कैसे पहचान बदलकर युवाओं को संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहा था।

बिहार में भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की गहरी साजिशें रची गई है। सीमांचल से लेकर मिथिलांचल तक इसकी जद में हैं। दरभंगा मॉड्यूल, फुलवारी शरीफ मॉड्यूल से लेकर इंडियन मुजाहिदीन तक अपने स्लीपर सेल विकसित कर चुका है।

बिहार के सीमांचल के इलाके किशनगंज से प्रतिबंधित इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पीएफआई का पूर्व अध्यक्ष महबूब आलम नदवी उर्फ महबूब आलम को गिरफ्तार किया गया है। एनआईए उसे 3 साल बाद गिरफ्तार कर पाई है। उसका सपना 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने का है।

11 सितंबर को किशनगंज से गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। उसका कनेक्शन फुलवारी शरीफ 2022 आपराधिक मामले से जुड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान इनलोगों ने गड़बड़ी की साजिश रची थी। इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई था। इस आधार पर उसे पकड़ा गया है। वह इस मामले का 19वाँ आरोपित है।

कौन है महबूब आलम

पीएफआई का पूर्व अध्यक्ष महबूब आलम नदवी कटिहार जिले के हसनगंज का रहने वाला है। पीएफआई पर प्रतिबंध लगने के बाद सीमांचल क्षेत्र में पिछले कई सालों से चोरी छिपे रह रहा था। वह किशनगंज के फातिमा गर्ल्स स्कूल में पिछले 6 महीने से पढ़ा रहा था। उसकी स्कूल में नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उसके पास न तो जरूरी दस्तावेज थे और न ही उसने अपनी पहचान बताई थी। सिर्फ डेमो क्लास लेकर उसे नियुक्त कर दिया गया था।

पीएफआई को मजबूत करने और भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के लिए वह मुस्लिम बहुल इलाके में जाकर युवाओं से मदद माँग रहा था। इसके लिए वह पूर्णिया, कटिहार, अररिया जैसे सीमांचल जिलों का कई बार दौरा कर चुका है। वह मुस्लिम युवकों को गुमराह करने के लिए किताबें बाँटता था। किशनगंज में गिरफ्तारी के बाद एनआईए की टीम ने लगातार उससे 3 दिन तक पूछताछ की।

एनआईए के मुताबिक, महबूब आलम का फुलवारी शरीफ टेरर मॉड्यूल से लेकर दरभंगा मॉड्यूल तक में अहम रोल था। उसने पीएफआई से लोगों को जोड़ा था और हथियारों का प्रशिक्षण भी दे रहा था। इस्लामी कट्टरपंथी संगठन के नेटवर्क को फैलाने के लिए वह गुप्त बैठकें आयोजित करता था। संगठन के लिए फंड जुटाता था और उसे कार्यकर्ताओं तक पहुँचाता था।

ऐसा नहीं है कि आतंकवाद को बढ़ाने के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों ने हाल के दिनों में अपनी सक्रियता बिहार में बढ़ाई हो, इसकी शुरुआत तो यासीन भटकल ने इंडियन मुजाहिदीन की स्थापना कर और दरभंगा मॉड्यूल विकसित कर बहुत पहले कर चुका था।

फुलवारी शरीफ मॉड्यूल का खुलासा

पीएम मोदी के दौरे से पहले 11 जुलाई 2022 को एनआईए ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था। ये लोग पटना के फुलवारी शरीफ में दौरे से पहले आपराधिक साजिश को अंजाम देने में लगे थे। एनआईए ने 26 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। ये सभी पीएफआई के सदस्य थे। इनलोगों ने प्रधानमंत्री के बिहार के दौरे के दौरान गड़बड़ी करने की साजिश रची थी। दौरे से कुछ दिनों पहले 11 जुलाई को एनआईए को इसका पता चल गया था। पीएफआई ने 11 आतंकियों को इसके लिए फुलवारी शरीफ भेजा था।

NIA ने बिहार में पटना से लेकर मधुबनी तक छापेमारी कर दूसरे सबूत भी जुटाए। आतंकियों की मदद के लिए इस्तेमाल हो रहा डिजिटल उपकरण मिला था। इस दौरान आतंकी ठिकानों पर आपत्तिजनक किताबें, डायरी भी मिली थी। इससे खुलासा हुआ कि 2023 से इनलोगों ने अपना टारगेट तय किया था कि ये 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क मनाना चाहते हैं।

पुलिस ने पटना में छापेमारी कर पीएफआई और एसडीपीआई यानी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की आड़ में मार्शल आर्ट सिखाने के बहाने हथियार चलाने वाले ट्रेनिंग कैंप का खुलासा किया था। इसमें दूसरे राज्यों के लोगों को भी बुलाकर ट्रेनिंग दी जा रही थी। पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना पीएफआई का मकसद

फुलवारी शरीफ मामले की जाँच के दौरान एनआईए को चौकाने वाला दस्तावेज मिला। इस पर लिखा था ‘India 2047:Towards Rule of Islam in India” इसमें भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ाकर कैसे 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना है, इसकी चर्चा की गई थी। इसमें आतंकी गतिविधि को बढ़ाना, युवाओं को शामिल करना और पीएफआई के नेटवर्क को बढ़ाने का पूरा तरीका लिखा गया था।

आतंकियों का ‘गजवा ए हिंद’ का मंसूबा बिहार में 2010 में ही शुरू हो गया था, जब मिथिलांचल में आतंकी यासीन भटकल ने मुस्लिम युवाओं के दिमाग में आतंकवाद का जहर घोला। भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने, शरिया कानून लागू करने, गैर मुस्लिमों को खत्म करने और ‘जजिया कर’ लागू करने जैसे पाठ पढ़ाया। अगर कोई इस्लाम कबूल नहीं करेगा, तो उसे मार देने की ट्रेनिंग दी।

दरभंगा मॉड्यूल बनाया था इंडियन मुजाहिदीन संस्थापक ने

दरभंगा में इंडियन मुजाहिदीन का संस्थापक यासीन भटकल रहता था। उसने इंडियन मुजाहिदीन की शुरुआत भी यहीं से की थी। आतंकियों को पैदा करने वाले यासीन भटकल ने नुरुद्दीन जंगी, सनाउल्लाह को भी ट्रेनिंग दी थी, जो फुलवारी शरीफ में आतंकी घटना को अंजाम देने के मंसूबे पाले एक्टिव था। हॉमियोपेथी डॉक्टर यासीन ने बहुत होशियारी से संगठन को दरभंगा में फैलाया। अपनी मीठी दवाइयों के साथ ‘इस्लामी कट्टरपंथ का जहर’ वह लोगों को बाँट रहा था।

उसने दरभंगा, समस्तीपुर जैसे कई इलाकों में इंडियन मुजाहिदीन से युवाओं को जोड़ा। जब देश के कई हिस्सों मसलन बंगलुरु, चेन्नई, वाराणसी में विस्फोट हुए, तो उसके तार दरभंगा से जुड़े। उस वक्त दरभंगा मॉड्यूल सुर्खियों में आया। एनआईए ने यासीन भटकल को नेपाल भागते हुए बॉर्डर से गिरफ्तार किया था।

स्लीपर सेल दरभंगा मॉड्यूल का अहम हिस्सा

आतंकी यासीन भटकल ने दरभंगा और मिथिलांचल के दूसरे क्षेत्रों को आतंकियों का पनाहगार बना दिया। उसने लोगों को स्लीपर सेल के रूप में काम करने की ट्रेनिंग दी। एनआईए ने स्लीपर सेल के रूप में काम करने वाले आतंकियों को जब पकड़ा, तब इसका खुलासा हुआ। आतंकवाद को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए भटकल ने स्लीपर सेल विकसित किया था। इसमें समस्तीपुर का रहने वाला तहसीन अख्तर भी शामिल था, जिसने यासीन के बाद इंडियन मुजाहिदीन की जिम्मेदारी संभाली थी।

पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद छिप कर हो रही साजिश

2022 में पीएफआई पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक इस संगठन से जुड़े कई आतंकियों को इसके बाद गिरफ्तार किया गया। प्रतिबंध की वजह से पूर्व पीएफआई अध्यक्ष महबूब आलम पिछले 3 सालों से चोरी-छिपे संगठन को मजबूत करने में लगा हुआ था। महबूब आलम की गिरफ्तारी से पीएफआई की फंडिंग, हथियार और सदस्यों की अहम जानकारी एनआईए को लगेगी।

माना जा रहा है कि आगामी बिहार चुनाव में इस्लामी कट्टरपंथी गड़बड़ी कर सकते हैं। इसलिए तमाम एजेंसियाँ बिहार में खास तौर पर एक्टिव हैं।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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