मीडिया जिस घटना को गुजरात के एक गाँव में दलितों के बाल काटने में जाति के आधार पर भेदभाव के तौर पर प्रचारित कर रही है, असल में वह दो लोगों का आपसी विवाद है।
यह एक सामान्य लेख है जो आम तौर पर अखबारों में छपता है। लेकिन खास बात यह है कि लेख का शब्दशः चार दिन पहले हिन्दी में 'बिजनेस स्टैंडर्ड' के हिंदी संस्करण में छपी थी।