Tuesday, August 9, 2022

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द प्रिंट

दंगों में मारे गए हिन्दुओं के परिवारों की मदद करना भी पाप है क्या? कपिल मिश्रा से बौखलाया गुप्ता जी का ‘द प्रिंट’

जिनके बच्चे मरे, जिनकी बेटियों को नग्न करके दुराचार किया गया, जिनकी शादी में सिलिंडरों को उड़ाने की योजना थी, जिनके बच्चों को छः कट्टरपंथियों ने दो-दो घंटे चाकू मारे... उन्हें अब आर्थिक मदद से भी महरूम किया जाएगा? क्या मार डाले गए हिन्दुओं के परिवारों को सहायता करना पाप है? शेखर गुप्ता को दिक्कत किससे है?

तुम फेक न्यूज़ की फैक्ट्री हो, घृणा फैलाते हो: इंटरव्यू माँग रहे ‘द प्रिंट’ को कपिल मिश्रा ने लताड़ा

द प्रिंट के पत्रकार ने कपिल मिश्रा से इंटरव्यू के लिए समय देने की गुहार लगाते हुए कहा कि बीजेपी नेता को हर जगह से ख़ासा समर्थन मिल रहा है। उसने कहा कि वो 'द प्रिंट' में उन पर लेख अथवा प्रोफाइल तैयार करना चाहता है।

नागरिकता विधेयक पर ही BJP को मिली दोबारा सत्ता, बिना घोषणापत्र पढ़े ही शेखर गुप्ता फैला रहे झूठ-भ्रम

शेखर गुप्ता ने दावा किया कि नागरिकता संशोधन विधेयक वह नहीं है, जिसके लिए भाजपा को वोट दिया गया था। जबकि थोड़ा सा गूगल कर लेते तो उनके जैसे 'वरिष्ठ' पत्रकार को लोकसभा चुनाव 2019 में BJP का घोषणापत्र मिल जाता, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि...

‘पगला गए हो क्या?’ दि प्रिंट के शिवम विज ने पहले फ़र्ज़ी बयान छापा, पकड़े जाने पर की बेहूदगी

दरअसल द प्रिंट और शिवम विज का सोचना यह है कि एक दशक पुरानी बात, जब समय और परिस्थितियाँ अलग थीं, उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का हवाला देते हुए आज के समय में वो अपने प्रोपेगेंडा को फैलाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

शेखर गुप्ता के The Print का रिपोर्टिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा, लेखक ने अपने शब्दों के साथ खिलवाड़ पर लताड़ा

लेखक ने अपने भाषण में अरबी-फारसी शब्दों के इस्तेमाल से बचने और उनकी जगह हिन्दी का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। लेकिन, कृतिका शर्मा ने कई जगहों पर अपनी सहूलियत से फ़ारसी को 'उर्दू' कर दिया। नित्यानंद मिश्र का यह भी कहना है कि उन्होंने केवल "शासन/प्रभुत्व" बनाम "सरकार" शब्दों की बात की थी, लेकिन कृतिका ने रिपोर्ट को सनसनीखेज़ बनाने के लिए "मोदी" जोड़कर "मोदी सरकार" बनाम "मोदी शासन" कर दिया।

मुग़ल भारत में अंगूर लेकर आए: ‘The Print’ और ‘इतिहासकार’ सलमा युसूफ के झूठ का पर्दाफाश

अगर मुगलों की बात करें तो बाबर ने 16वीं शताब्दी में दिल्ली में राज करना शुरू किया, जबकि चीनी यात्री ने उससे लगभग 900 वर्ष पूर्व भारत में अंगूरों और अंगूर के रस का जिक्र किया है। इससे पता चलता है कि 'द प्रिंट' के लेख में किया गया दावा बिलकुल ही ग़लत है।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने ‘द प्रिंट’ के भ्रामक लेख का दिया करारा जवाब

‘द प्रिंट’ की स्थापना के बाद से शेखर गुप्ता को कई झूठ फैलाने के लिए जाना जाने लगा है। इस बार उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के बारे में फ़र्जी ख़बरें फैलाने का फ़ैसला किया है।

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