अयोध्या विवाद मामले पर आए फ़ैसले के बाद सोशल मीडिया पर यह ट्वीट फिर से वायरल हो रहा है। सुब्रमण्यम स्वामी, भाजपा के सभी नेताओं की तरह, अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनाने के मुखर प्रस्तावक रहे हैं।
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से गोगोई रामभक्तों की आँखों के तारे बन गए हैं। कोई प्रणाम करने के लिए उनका घर ढूँढ़ रहा है तो कोई उन पर ईश्वर की कृपा बने रहने की कामना कर रहा है।
जजों ने इस बात का ख्याल रखा है कि कोई भी लिबरल, अजेंडाबाज़ रवीश टाइप पत्रकार, टुटपुँजिया कॉमेडियन, पंक्चर के काम करने वाले 'हा-हा' रिएक्शन ब्रीड के लौंडे या मीम का फैक्ट चेक करने वाले गंजे आदि छूट न जाएँ क्योंकि दर्द तो बहुत हुआ होगा।
राजनीतिक और सैन्य कारणों से मराठे पवित्र स्थलों को वापिस पाने का सपना पूरा नहीं कर पाए। लेकिन भरसक प्रयासों में कोई कोताही नहीं बरती। आज यह याद करना ज़रूरी है कि हमारे पूर्वजों ने धन, प्राण, शक्ति समेत कितनी कुर्बानियाँ दी।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पाँच सदस्यीय बेंच ने लगातार चालीस दिन तक चली सुनवाई के बाद इस मामले में 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवम्बर को रिटायर होने वाले हैं। इससे पहले फैसला आने की उम्मीद है।
श्री राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद दास कहते हैं कि सुरक्षा कारणों से करीब 19 वर्ष पहले ही पारदर्शी पन्नी में इलायचीदाना, मिश्री व मूंगफली प्रसाद के रूप में ले जाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन बीते दो दिन से प्रसाद लेकर श्रद्धालु नहीं आ पा रहे हैं।
"हम संविधान और कानून की इज़्ज़त करते हैं और अदालत के फैसले की तामील करेंगे। जो शांति को भंग करने की कोशिश करेंगे, उन्हें इस्लाम के सच्चे नुमाइंदे नहीं कहा जा सकता है।"
हिंदू पक्षों ने मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन की देखरेख को शीर्ष अदालत को सुझाव दिए हैं। वहीं, मुस्लिम पक्षकारों ने यह बताया है कि यदि विवादित भूमि का मालिकाना अधिकार उन्हें नहीं मिलता है तो उस सूरत में क्या किया जा सकता है।
वे पर्दे के पीछे से साजिश रचेंगे और डराने के लिए खून भी बहाएँगे। वे चाहेंगे कि माहौल बिगड़े ताकि मंदिर निर्माण टलता रहे। वे नक्शे को फाड़ेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि जिस दिन हिंदू जगेगा उनका इतिहास हर गली-नुक्कड़ पर फाड़ा जाएगा।
सत्ता के परिवर्तन और समय के चक्र से कभी-न-कभी कॉन्ग्रेस, माकपा, हिन्दू कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले 'मुल्ला मुलायम' की सपा जैसे लोग वापिस आ ही जाएँगे। उस समय अगर राम मंदिर सरकारी नियंत्रण में रहे तो क्या होगा, ये कभी सोचा है?