कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा भी हैं जो खुद को धन्य और सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें मृत आत्माओं की शांति के लिए यह महान कार्य करने का अवसर दिया।
कोर्ट ने अब इसी मामले में ये पाया कि प्रतिवादियों को ये साबित करना था कि वादी की बड़ी बेटी अब हिंदू नहीं है, लेकिन वो लोग ऐसा नहीं कर पाए। ऐसे में बेटी को पिता की संपत्ति में अधिकारी होगी।