समस्या तब पैदा होने लगती है जब रावण को 'महान' दिखाने के चक्कर में भगवान श्रीराम के किरदार से खेल दिया जाता है और उन्हें नीचा दिखाया जाता है। प्रतीक गाँधी की 'रावण लीला' में यही किया गया है।
'डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व' सम्मेलन के आयोजकों का हिंदूफोबिया स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जबकि वे दावा करते हैं कि वे एक 'राजनीतिक विचारधारा' के खिलाफ हैं, न कि एक धर्म के।
'डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व' कार्यक्रम में ऑड्रे ट्रुश्के, नक्सल समर्थक आनंद पटवर्धन और नंदिनी सुंदर, स्व-घोषित वामपंथी पत्रकार नेहा दीक्षित समेत कई हिंदूफोबिक तत्वों की भागीदारी देखने को मिलेगी।