अभी आलू की खुदाई और भराई का समय है, कुछ दिन में सरसों और फिर गेहूँ की कटाई-मढ़ाई का समय आ जाएगा, लेकिन कोरोना के कहर के चलते ये काम कैसा और कितना हो सकेगा, कहना मुश्किल है। फसलों के नुकसान से किसान तो तबाह होगा ही, दाल-रोटी के दाम भी बढ़ जाएँगे और उससे भी सबसे ज्यादा मुश्किलें अगर किसी की बढ़ेंगी तो वह गरीब-वंचित तबका ही होगा।
किसानों ने कहा कि टिड्डियों के हमले के कारण वे पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर में खाने के लिए रोटी तक नहीं बचा है। कर्जमाफी का वादा पूरा न किए जाने से किसान पहले से ही बेहाल है। मुख्यमंत्री के सामने कई किसान अचानक से रो पड़े।
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजना से 36 लाख से अधिक महिला लाभान्वित हुईं। महिलाओं को कृषि गतिविधियों में संलग्न करने के लिए केंद्र सरकार की 84 परियोजनाओं के लिए 847 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
पंजाब-हरियाणा का पानी किसान पी जाता है। दिल्ली में प्रदूषण भी किसान ही फैलाता है। ऐसी दलीलें देकर असली समस्याएँ छिपाई जा रही हैं। अगर आप सोचते हैं कि किसान 14 लाख की मशीन ख़रीद कर कटाई करे तो आपको जमीनी समझ नहीं। सरकारें और एमएनसी के इस जाल के जंजाल को समझिए।
दिल्ली जैसे राज्यों में अंग्रेजों के दौर से ही गाय पालने पर पाबंदियाँ हैं। आस-पड़ोस के राज्यों से जब पशु घटे और खेत में पुआल जलने लगा तो धुआं दिल्ली तक भी पहुँचने लगा। अब साँस लेने में दिक्कत हो रही हो, तो परेशानी की जड़ में भी जाने की सोचिएगा कामरेड।
बीटी कपास बीज के MSP को कम करने के क़दम के तहत स्वदेशी जागरण मंच (SJM) सहित कई संगठनों ने माँग की थी कि ट्रेट शुल्क को पूरी तरह से हटा दिया जाए ताकि किसानों को उच्च क़ीमतों का 'अनावश्यक बोझ' न उठाना पड़े।
2012-13 में कृषि परिवार की औसत आय 6426 थी, जो अब बढ़कर 8058 हो गई है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार ने फरवरी 2016 में किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करनी की बात कही थी।