प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि कॉन्ग्रेस का अपने करिश्माई नेतृत्व के खत्म होने की पहचान नहीं कर पाना 2014 के लोकसभा में उसकी हार के कारणों में से एक रहा।
आपको किसी ने जबरन तो नहीं कहा कि जियो का सिम ले लो और रिलायंस फ्रेश से ही सब्ज़ियाँ खरीदना? अडानी ने तो जबरदस्ती नहीं की आपके साथ? टाटा ने यह तो नहीं कहा कि मेरी कार नहीं लोगे तो मोदी को बता देंगे?
नेहरू के खोखलापन के बारे में आरके लक्ष्मण ने 60 साल पहले बता दिया था। पर भगेरन तिवारी के बेटे और अभिराम दास न होते तो हम और आप यह जान भी नहीं पाते कि जन्मस्थान में बाल मूर्ति का होना भी नेहरू को खटकता था।
तत्कालीन पीएम नेहरू ने वायुसेना को आदेश दिया था कि फाइटर एयरक्राफ्ट्स अंतरराष्ट्रीय सीमा के 24 किलोमीटर के दायरे में न उड़ाए जाएँ। उन्होंने 'तनाव कम करने' के लिए ऐसा किया था।
"..अपनी बेटी को PM पद के लिए तैयार किया जाना था, फिर मोरारजी देसाई और जगजीवन राम – दो महत्वाकांक्षी, सक्षम और प्रभावशाली प्रतिद्वंद्वियों को हटाना, और अंत में.."
"इंदिरा गाँधी भी इन मामलों में अपने पिता जैसी थीं। जैसे ही कोई इंदिरा गाँधी से असहमत होता या उनके सामने तर्क रखने का प्रयास करता वह मेज पर रखे लिफ़ाफ़े और कागज़ उठाने लगतीं। जिससे ऐसा लगे कि उनके पास करने के लिए और भी ज़रूरी काम हैं।"
एक आत्महीन देश ही किसी ‘उन्नत’ देश को धन्यभाव से देखता और पिछलग्गू बन जाता है। नेहरू ने भारत को उसकी मूल संस्कृति से काटकर असल में ऐसा ही देश बना दिया जो अपनी हर गति, हर उन्नति के लिए परमुखापेक्षी हो गया।