हाल ही में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित काजी मासूम अख्तर ने कहा कि मुझे अपने जीवन जीने से डर है और बंगाल में मेरी कभी भी हत्या की जा सकती है। उन्होंने सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर कहा कि इससे मुस्लिमों को डरने की कोई जरूरत नहीं है।
मुर्शिदाबाद में CAA के विरोध में बुलाई गई बंद के दौरान हिंसा भड़की। टीएमसी, माकपा और कॉन्ग्रेस एक-दूसरे को इसके लिए कसूरवार ठहरा रहे हैं। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
पश्चिम बंगाल अब चौथा राज्य बन गया है, जहाँ CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास हो चुका है। इससे पहले केरल, पंजाब और राजस्थान विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्ताव पास किया जा चुका है।
"यह मामला अपहरण का नहीं बल्कि प्रेम प्रसंग का है। लड़की के दूसरे समुदाय के होने के कारण दबाव में पुलिस हमारे पूरे परिवार और रिश्तेदारों को परेशान कर रही है।" - गिरफ्तार हुए प्रेमी गौरव की माँ ज्योति देवी
....चोट लगने की वजह दो छात्रों की नाक से ख़ून निकल रहा था और उन्हें प्राथमिक इलाज दिया गया। इंग्लिश के एक अध्यापक गणेश सरदार ने आरोप लगाया कि भीड़ उन्हें ढूँढ रही थी, उन्हें टॉयलेट के अंदर छिपा दिया गया था। अगर ज़िला प्रशासन समय पर आकर कार्रवाई न करता तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
“पश्चिम बंगाल सरकार हमेशा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करती है, न कि भारतीय प्रधानमंत्री का। यह ताजा उदाहरण है। हम KMC मेयर के इस्तीफे और एक निष्पक्ष एजेंसी द्वारा जाँच की माँग करते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री को भी इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए।”
पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रत्येक थाने के आगे भारत माता की पूजा करने की भाजपा की योजना में गतिरोध उत्पन्न किया। भाजपा का कहना है कि उन्होंने तय किया था कि 26 जनवरी के दिन वो पार्टी की ओर से शहर के सभी पुलिस थानों के आगे भारत माता की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना करेंगे। इस संबंध में सभी थानों को चिट्ठी भेजकर...
निर्मला दास ने 22 साल पहले तीन बीघा ज़मीन मंदिर के लिए दान दी थी। दिवंगत विधवा ने मंदिर के साथ-साथ स्कूल और हॉस्पिटल बनाने के लिए भी ज़मीन दान की थी। कुछ दिनों पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस की स्थानीय यूनिट ने ज़मीन पर कब्ज़ा कर भवन निर्माण शुरू कर दिया।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम में 20 साल की चुमकी खातून पर गाँव वालों ने हमला कर दिया। उनके घर में आग लगा दी। वहीं राजस्थान में नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह नेशनल इकनॉमिक सेंशस 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं।
"जय हिंद एक नारा था। इसका इस्तेमाल आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज में किया गया था। यह सभी धर्मों, सभी समुदायों, सभी जाति और पंथों को एक करता है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को 'जय हिंद' का उपयोग करना चाहिए।"