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ईद पर नग्न डांस को मजबूर लड़कियाँ लेकिन तस्वीर बिहु की! INDIA TODAY की नई पत्रकारिता

ईद के जश्न में नृत्य करने को बुलाई गई लड़कियों को 500 लोगों की भीड़ ने जबरन नग्न अवस्था में नृत्य करने को मजबूर किया। इस खबर को लगभग हर मीडिया संस्थान ने कवर किया - कुछ ने सच्चाई को जैसे का तैसा रख कर रिपोर्ट किया, कुछ ने खबर को छिपाते हुए। इंडिया टुडे एक कदम आगे बढ़ गया और...

बाथरूम से जिम तक: ‘कूल पत्रकारिता’ के चक्कर में सर्कस दिखा कर नई क्रान्ति करते पत्रकार

मीडिया संस्थानों को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके नए नियम के मुताबिक़ अगर कोई पत्रकार सड़क किनारे मजदूरी कर रहे किसी मजदूर से इंटरव्यू लेने जाता है तो वह क्या करेगा और क्या नहीं - हथौड़ा उठाएगा या फावड़ा? सीमा पर गोलीबारी कवर करने जाने वाले पत्रकार भी लगे हाथ दो-चार गोलियाँ दागेंगे क्या?

दलित और गोमूत्र से घृणा करने वाला द वायर का हिन्दूफोबिक मीडिया ट्रोल इसलिए अपराधी नहीं हो सकता

...लेकिन इस बार भी यही होना है। दलितों की तुलना जानवरों से करने वाले द वायर के इस पत्रकार को जनता फिर से अपना नायक बना देगी और उसके लिए यही उपलब्धि काफी होगी। हो सकता है अगले चुनाव में प्रशांत कनोजिया भी किसी सड़क पर चंदा माँगता हुआ नजर आए।

हिन्दी भाषा का बवाल और पत्रकारिता का वह दौर जब कुछ भी छप रहा है, कोई भी लिख रहा है

तर्क हों तो आप लेख की शुरुआत विदेशी लेखक का नाम लेकर करें या फिर 'लगा दिही न चोलिया के हूक राजा जी' से, मुद्दे पर फ़र्क़ नहीं पड़ता। कुतर्क हों तो आप अपने पोजिशन का इस्तेमाल दंगे करवाने के लिए भी कर सकते हैं, कुछ लोग वही चाह रहे हैं।

वागले, फ़र्ज़ी ज्ञान और प्रपंच पर मिल रही गालियों का सम्मान कर और ट्विटर से भाग ले

‘धंधे’ में पक कर पक्के हुए निखिल वागले के द्वारा यह अनभिज्ञता नहीं, कुटिलता है, क्योंकि अगर इतने साल बाद भी वह ‘अनभिज्ञ’ हैं निर्वाचन और जनमत-संग्रह के अंतर से, तो वह इतने साल से कर क्या रहे थे?

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