भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम अन्य विकसित देशों की तुलना में कहीं बेहतर नजर आ रहे हैं। हालाँकि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ऐसा नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन वो इसे लेकर भारत सरकार का विरोध करना चाहते हैं।
उस समय दुनिया आज की तरह ग्लोबल नहीं थी। फिर भी उस वायरस को दुनिया को अपनी चपेट में लेते वक्त नहीं लगा। उस समय दुनिया का हर चौथा शख्स इससे प्रभावित था। मृतकों में से आधे से ज्यादा 20 से 30 की उम्र के थे।
इस संबंध में अंतिम फैसला शनिवार 14 मार्च को लिया जाएगा। लेकिन, माना जा रहा है कि इस बार IPL केवल प्रसारण के उद्देश्य होगा और मैच बिना दर्शकों के खाली स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।
मोहम्मद हुसैन की मौत मंगलवार को हुई थी। गुरुवार को उनके कोरोना वायरस से भी संक्रमित होने की पुष्टि हुई। उन्हें हाई ब्लडप्रेशर और अस्थमा जैसी अन्य शिकायतें भी थी। अब यह पता लगाया जा रहा है कि वे कितने लोगों के संपर्क में आए थे।
सर्वेक्षण में पाँच हजार से अधिक पाठकों ने हिस्सा लिया। 38% से ज्यादा मत पाने वाले रणजीत सिंह की सहिष्णु साम्राज्य बनाने के लिए प्रशंसा की गई। दूसरे स्थान पर अफ्रीकी स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी अमिलकार काबराल रहे।
यूके में कोरोना वायरस से बचने के लिए लोग क्रिएटिव तरीके अपनाते नजर आ रहे हैं। कोरोना से बचने के लिए अपने मुँह को ढक कर रखें, बीमार लोगों के संपर्क या फिर भीड़ के संपर्क में आने से बचे, तो इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए लोग अपने चेहरे पर प्लास्टिक का डिब्बा डालकर घूम रहे हैं।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आज अपने नागरिकों से अभिवादन के लिए भारतीय तरीका अपनाने की सलाह दी है। नेतन्याहू ने कहा है कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भारतीय तरीका यानी, नमस्ते कहना सबसे बेहतर है।
संत तिरुमानकई अलवार की 15वीं शताब्दी की यह कांस्य प्रतिमा वर्ष 1967 के साउथबेई की नीलामी में नीलाम की गई और इस तरह आखिरकार यह प्रतिमा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एश्मोलीन संग्रहालय पहुँची।
जज मिश्रा ने कहा, "राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिन चुनौतियाँ का न्यायपालिका आज सामना कर रही है, वे समान हैं, और इस लगातार बदलते विश्व में न्यायपालिका का एक अति महत्वपूर्ण रोल है।" उन्होंने नरेंद्र मोदी को एक दूरदर्शी और प्रतिभाशाली पीएम बताया।
शिव महापुराण के द्वादश्ज्योतिर्लिन्ग्स्तोत्रं में उल्लेखित बारह ज्योतिर्लिंगों में से कुछ की भौगोलिक स्थितियों के बारे में भक्तों के मत अलग-अलग हैं। कारण यह है की स्तोत्र (श्लोक) में इन ज्योतिर्लिंगों की भौगोलिक स्थिति अस्पष्ट है, जिस कारण लोग अपने अपने तरीके से व्याख्या करते हैं।