"उस रात मैं मुख्यमंत्री आवास पर ही थीं। तभी केजरीवाल के पास एक घायल मरीज के इलाज के लिए फोन आया। उन्होंने फोन पर तड़पते मरीज की मदद करने के बजाए नसीहत दे डाली कि सरकारी अस्पताल क्यों नहीं गए?
शौहर पुलिस से: बहुत समझाता हूँ कि धरने पर मत जाओ, लेकिन चली जाती है, क्या करें! तभी बीवी अंदर से भाग कर आती है और डाँटते हुए कहती है: "तुमने कहा था कि धरने में जाओ।"
"इन सबको पता था कि आगे क्या होने वाले वाला है। हमारे बराबर में एक मात्र मुस्लिम व्यक्ति का बाइक का शोरूम है। इलाके में हिंसा फैलने से पहले ही 26 फरवरी को सुबह 5 बजे ही उसने सभी बाइकों को शोरूम से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया। फिर खुद को पीड़ित दिखाने के लिए पहले तो शोरूम में तोड़फोड़ की और फिर...
"हज़ारों दंगाइयों की चपेट में आकर एक मजहबी दंगाई की भी मौत हो गई। लेकिन दंगाई उसे उठाकर अस्पताल नहीं ले गए बल्कि अपने घर ले गए। 24 घंटे तक घर में दंगाई युवक का शव रखा रहा। जैसे ही केजरीवाल सरकार ने दंगों में मारे गए लोगों को मुआवजा देने की घोषणा की, वैसे ही..."
धर्मेंद्र की माँ और छोटे भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। देखकर ऐसा लगा कि जैसे वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। धर्मेंद्र के पिता वीरसहाय हर रोज सुबह बिना कुछ खाए-पिए अपने बेटे को खोजने निकलते हैं, लेकिन देर रात हताश होकर खाली हाथ घर लौट आते हैं।
मोबाइल गुलेल, जी हाँ मोबाइल गुलेल! रिक्शे पर लोहे के एंगल को वेल्डिंग कर के बनाई गई। इसे मोबाइल गुलेल कहा जाता है। जहाँ चाहे, वहाँ ले जाओ और हिंसा को अंजाम दो। हिंदू घरों को टारगेट कर इस मोबाइल गुलेल से पेट्रोल बम की बोतलें, बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए।
अफसरा अनिका मीम सीएए के विरोध में लगातार पोस्ट कर रही थी। नोटिस में कहा गया है कि उसने वीजा शर्तों का उल्लंघन किया है। सरकार विरोधी गतिविधि में उसे संलिप्त पाया गया है।
अलीगढ़ में CAA विरोधियों ने जमकर हिंसा की थी। इस दौरान दंगाइयों ने लोगों के घर में घुसने की कोशिश की। इस घटना के बाद दहशत में बाबरी मंडी इलाके में रहने वाले कई हिंदू अपना घर बंद कर जा चुके हैं।
इस्लामी भीड़ और उनकी तैयारी को देखकर ऐसा लग रहा था कि वह पहले तो हिंदुओं की दुकानों और फिर हमारे मकानों को अपना निशाना बनाना चाहते थे। अच्छा हुआ दिल्ली पुलिस का कि उसने समय रहते हालातों को काबू में कर लिया।
जानकारी मिली कि इस्लामी भीड़ हिंदुओं के घरों को अपना निशाना बना रही है। हमने अपने-अपने चारों बच्चों को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र से निकाला और दूसरी गली में एक परिचित के घर पहुँचा दिया। हम इतने डर गए कि सोमवार को पूरे दिन और पूरी रात भूखे प्यासे बच्चों के साथ घर में कैद रहे।