PM मोदी ने लोगों से 21 दिन तक घरों में रहने की अपील बेहद सामान्य शब्दों में और विनम्रतापूर्वक की थी। फिर भी एक विशेष वर्ग, जिसने सत्ता-विरोधियों के एक ही इशारे में नागरिकता कानून को समझ लिया था और शाहीनबाग़ खड़ा कर दिया, के लिए यह अपील समझनी मुश्किल नजर आ रही है।
दिल्ली स्थित शाहीन बाग इलाके में एक फर्नीचर की दुकान में भीषण आग लगी है। आग बुझाने के लिए दमकल कर्मियों की चार गाड़ियाँ मौके पर पहुँच चुकी हैं और काम जारी है।
कथित पत्रकार आरफा खानम चाहती है कि भारत जल्द ही कोरोना से उबरे। ताकि फिर से सीएए, एनआरसी के खिलाफ देशभर में आंदोलन शुरू हो। यह तब तक जारी रहे जब तक कि सरकार इसे वापस नहीं ले लेती।
दिल्ली में अब तक 30 मामले सामने आए हैं जिनमें से 5 का संबंध इस महिला से है। महिला द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण संक्रमित हुए लोगों में महिला की दो बेटियाँ, उसका भाई, माँ और एक डॉक्टर शामिल हैं। इस डॉ की वजह से मोहल्ला क्लिनिक में आने वाले न जाने कितने मरीज भी संदेह के दायरे में......
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की बढ़ती तादाद देखकर शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों की संख्या कम। लखनऊ में भी अचानक प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया है और मुंबई में 50 दिन से चल रहा धरना प्रदर्शन समाप्त हो गया है। महिलाओं का कहना है कि वह हालात सुधरने के बाद इस प्रदर्शन को जारी करेंगी।
आयोजकों ने एक साजिश के तहत 21 मार्च की रात से ही मैसेज वायरल कर हजारों लोगों को इकट्ठा किया। इसके बाद रविवार सुबह जहाँ पूरा शहर कोरोनावायरस से लड़ने के लिए घरों में कैद था, वहीं ईदगाह मैदान में प्रदर्शनकारी धरने पर थे। इन सभी लोगों पर दूसरों की जान से खिलवाड़ करने के आरोप में FIR दर्ज किया गया है।
"महिलाएँ हर सावधानी बरत रही हैं, हर समय बुर्के में ढकी रहती हैं। नियमित रूप से हाथ धोना हमारी जीवनशैली का हिस्सा है। हम दिन में पाँच बार नमाज अदा करते हैं और हर बार हाथ धोते हैं।”