CAA समर्थन रैली पर मुस्लिमों ने हमला किया, जिसमें घायल हुए नीरज प्रजापति की रिम्स में मृत्यु हो गई। ऑपइंडिया ने उनके परिवार की मदद के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लिया, जिसके बाद लोगों ने 15 लाख रुपए का अब तक सहयोग किया है। सोरेन सरकार ने कोई मुआवजा नहीं दिया।
इसमें गौर करने वाली बात यह है कि शख्स ने अपनी आईडी से एजाज़ ख़ान और भीम आर्मी का शेर जैसे पेजों को लाईक किया हुआ है। और, ताज़ा समाचार मिलने तक वो ID डिलीट कर दी गई है, और नई सामने आ गई।
गुलशन (बदला हुआ नाम) के नाम के इस अकाउंट को इसी साल जनवरी से एक्टिव किया गया है। इससे पहले साल 2019 में एक कवर फोटो अपलोड हुई थी। और साल 2018 के कोई भी पोस्ट विजिबल नहीं हैं। जिससे इस पूरी प्रोफाइल पर संदिग्धता बनी हुई हैं।
गुलशन की गिरफ्तारी के बाद उसके फेसबुक अकाउंट के सामने आने के बाद लिबरल मीडिया और लिबरल गिरोह ने सॉइल मीडिया पर गुलशन की गिरफ्तारी को हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों से जोड़ना शुरू कर दिया था। इसके बाद गुलशन की फेसबुक ID के गायब हो जाने से यह सारा प्रकरण सन्देह में आ गया है।
नीरज प्रजापति JNU से नहीं थे, वो मूर्तियाँ बनाते थे और उसी से अपने घर का पेट पालते थे। लेकिन मृतक नीरज का परिवार आज भी आतंकवादी अफजल गुरु की यादों में खून रोने वाली मीडिया और लिबरल गिरोह की संवेदनाओं के इन्तजार में है।
अब जो लोग खुद को मोहम्मद साहब का अनुयायी कहते हैं और उनके किरदार में इतना छिछोरापन नजर आए कि देश के दो पत्रकार आपके दरवाजे पर खड़े हों और आप दरवाजा बंद कर दें। ऐसे में दरवाजा बंद करने वाले किस मुँह से खुद को मुसलमान कहलाने का दावा पेश करेंगे?
कुछ लोग युवक द्वारा लगाए गए नारों से उसकी पहचान कर रहे हैं। उसे संघी आतंकी बता रहे हैं। तो कुछ का कहना है कि ये सब पहले से सुनियोजित था क्योंकि वीडियो में वहाँ पहले से सब कैमरे उसकी तरफ हैं। जैसे मालूम हो कि ये घटना होने वाली है
शांतनु का कहना है कि यह केवल उनका और राघव का पक्ष सुनने की बात नहीं थी। बात उनके साथ हुए बर्ताव की है। जब लोग उन्हें पकड़ने की बात कर रहे थे, गुस्से से आगे बढ़ रहे थे, तब इंडिया टुडे ने भीड़ को सँभालने के लिए कुछ नहीं किया।
राजद्रोह के केस होने के बाद दो दिन से बिहार में छापेमारी करने पहुँचे पाँच सदस्यों के पुलिस दल को यह बात पता चली की शरजील अपनी प्रेमिका के संपर्क में है। जिसके बाद पुलिस ने शरजील की प्रेमिका से संपर्क किया और उसकी मदद से शरजील इमाम गिरफ्तार हो पाया।
"ये सब अल्लाह कर रहे हैं। कुदरती रूप से सारा सामान सुबह एक जगह पर रखा मिलता है और हम सिर्फ़ उसे उठाकर बाँटने का काम करते हैं। हम अल्लाह के बंदे हैं। हमें इंसान ने पैदा नहीं किया।"