जान गँवानी पड़ी, सर फूटे, नौकरी छूटी, मुसलमान बताना पड़ा: 20 घटनाएँ, जहाँ CAA समर्थन पड़ा महँगा

जहाँ एक तरफ CAA के विरोधी अभिव्यक्ति की आज़ादी का रोना रोते हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हैं, वहीं दूसरी तरफ वो ख़ुद विरोधी विचार रखने वाले लोगों के साथ मारपीट करते हैं। ये उनकी असहिष्णुता नहीं है तो क्या है?

संसद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के पास होने के साथ ही वामपंथियों, कट्टरपंथियों और उपद्रवियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश भर में हिंसा और गुंडागर्दी की गई और कुछ जगहों पर अभी भी की जा रही है। दिल्ली, यूपी, असम, बिहार से लेकर हर जगह हिंसा और आगजनी की घटना देखी गई। कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर जानलेवा हमला किया गया।

काफी दिनों तक इनके हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद जब देश की जनता बड़ी संख्या में CAA के समर्थन में सड़कों पर उतरने लगी तो ये प्रदर्शनकारी गुंडे और भी ज्यादा बिलबिला गए, क्योंकि उनके झूठ का पर्दाफाश होने लगा। CAA का समर्थन करने पर किसी को अपनी जान गँवानी पड़ी तो किसी की नौकरी चली गई। किसी को जान से मारने की धमकी मिली तो किसी के घरों को जला दिया गया, किसी के घर का पानी का सप्लाई बंद कर दिया गया। इन प्रदर्शनकारियों ने किसी का सिर फोड़ दिया तो किसी को अपनी जान बचाने के लिए खुद को मुसलमान साबित करना पड़ा, तब जाकर जान बची।

ऐसी बहुत सी घटनाएँ घटी हैं महज कुछ ही दिनों के भीतर। नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करना किसी को कितना महँगा पड़ सकता है, इसके कई सारे उदाहरण सामने आए। हम यहाँ पर आपको ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में बता रहे हैं:-

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1. इसका ताजा उदाहरण है झारखंड के लोहरदगा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में निकाले गए जुलूस पर हुई हिंसा में घायल नीरज राम प्रजापति की मौत। लोहरदगा में 23 जनवरी को CAA के समर्थन में हुई रैली में 15 से 20 हज़ार लोग शामिल थे, फिर भी मुस्लिम मोहल्ले में जुलूस के पहुँचते ही इतनी तेज़ पत्थरबाजी हुई कि लोगों में भगदड़ मच गई। CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिंदुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं तक को निशाना बनाया गया। नीरज इसी दौरान घायल हो गए थे।

2. हाल ही में केरल के ही एक डॉक्टर को सिर्फ इस वजह से नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि वह CAA के समर्थन में सरकार और कानून के साथ खड़ा था। ट्विटर पर @vedvyazz नाम से ट्विटर अकाउंट चलाने वाले एक डॉक्टर ने अपनी कहानी लिखते हुए बताया था कि किस तरह से उनकी पूरी पहचान और उनके कार्यस्थल से लेकर उसके घर तक की गोपनीय जानकारी को कुछ CAA विरोधियों द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया और आखिर में उन्हें नौकरी से निकाले जाने के बाद डर के कारण अपने ही पैतृक शहर से भागने को मजबूर कर दिया गया।

3. इससे पहले केरल के तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने दावा किया था कि नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने के कारण उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी निशाना बना रहे हैं। वे गैस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने बताया था कि CAA का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्व’ उन्हें परेशान कर रहे हैं।

4. शाहीन बाग में पिछले कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन की वजह से एक इंजीनियर को नौकरी छोड़नी पड़ी। विरोध प्रदर्शन के कारण कालिंदी कुंज-नोएडा रोड बंद है और इस वजह से सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत को ऑफिस पहुँचने में काफी परेशानी होने लगी। रोज-रोज लेट पहुँचने की वजह से उनकी हाफ डे की अटेंडेंस लग रही थी। सैलरी आधी हो गई और सफर का खर्च दोगुना। 6-7 घंटे रोड पर बीतने लगा, उसके बाद 9 घंटे की नौकरी। इतनी मेहनत के बाद भी सैलरी आधी मिल रही थी। ऐसे में जॉब कर पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था, तो उन्हें तंग आकर नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा।

5. सत्ता-विरोधी दलों ने मानो CAA-विरोधी माहौल के बहाने अपनी मानसिकता के जहर को भुनाने की कसम खा ली है। इसका ही एक ताजा उदाहरण कैब सर्विस ओला (Ola) के एक ड्राइवर के साथ देखने को मिला है, जिसे एक CAA विरोधी ने सिर्फ इस वजह से Ola से नौकरी से निकलवा दिया क्योंकि वह CAA और NRC के मुद्दे पर सरकार के समर्थन में था।

6. शाहीन बाग में चल रहे CAA-विरोधी प्रदर्शन में न्यूज़ नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ वहाँ प्रदर्शन कर रहे गुंडों ने बदसलूकी की। यही नहीं, उनके साथ हाथापाई करने के बाद उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में धक्का-मुक्की कर रही भीड़ को अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते भी सुना गया।

7. दिल्ली के शाहीन बाग में न्यूज नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया पर हमले के बाद मुंबई में भी न्यूज नेशन की टीम पर हमला किया गया। मुंबई के नागपाड़ा इलाके में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की कवरेज करने गए वीडियो जर्नलिस्ट ओमप्रकाश केवट के साथ मारपीट की गई। उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया।

8. केरल के मलप्पुरम जिले के कुट्टिपुरम में एक कॉलोनी के हिंदू निवासियों को CAA का समर्थन करने पर पीने का पानी देने से वंचित कर दिया गया और साथ ही उन्हें मुस्लिम समूहों द्वारा बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा। कॉलोनी के पास रहने वाला एक व्यक्ति हिंदू बहुल कॉलोनी के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति करता था। मगर CAA का समर्थन करने के बाद कॉलोनी के हिंदुओं को पानी की आपूर्ति नहीं की गई।

9. इसी तरह केरल में CAA का समर्थन करने पर राज्य भाजपा के सचिव एके नजीर की बेरहमी से पिटाई की गई। नजीर पर तब क्रूरतापूर्वक हमला किया गया, जब वह इडुक्की जिले के थूकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए थे। हमलावर चरमपंथी संगठन SDPI कार्यकर्ताओं ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं बख्शा जाएगा।

10. केरल में ही एक सामाजिक कार्यकर्ता को बुरी तरह से पीट दिया गया। केरल में कोल्लम ज़िले के इरुकुजुई में एक वरिष्ठ मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) को सीएए-एनआरसी अधिकारी समझकर एक मुस्लिम परिवार ने बेरहमी से पीट दिया। आशा कार्यकर्ता की पहचान महेश्वरी अम्मा के रूप में की गई, जो कि एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता भी हैं।

11. इसी तरह राजस्थान और पश्चिम बंगाल में दो महिलाओं को CAA और NRC से संबंधित आँकड़े जुटाने वाली समझकर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। राजस्थान के कोटा में, राष्ट्रीय आर्थिक जनगणना विभाग में काम करने वाली नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह बृजधाम क्षेत्र में राष्ट्रीय अर्थशास्त्र जनगणना 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं। जब उन्होंने भीड़ को यकीन दिलाया कि वह उनकी तरह मुस्लिम हैं, तब कही जाकर उन्हें छोड़ा गया।

12. पटना कॉलेज में एक छात्र को सिर्फ़ इसीलिए पीटा गया, क्योंकि उसने फेसबुक पर नागरिकता संशोधन क़ानून का समर्थन किया था। उसे इतना पीटा गया कि उसका सिर फट गया। पीड़ित छात्र ने इक़बाल हॉस्टल के छात्रों पर मारपीट का आरोप लगाया उसने बताया कि जब वो परीक्षा देकर लौट रहा था, तब उसपर हमला किया गया। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि उसने सीएए के समर्थन में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।

13. मध्य प्रदेश के शाजापुर में CAA के समर्थन में निकाली गई तिरंगा यात्रा के दौरान कुरैशी मोहल्ला के लोगों ने पथराव किया। तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि ये यात्रा जैसे ही कुरैशी मोहल्ले में पहुँची, वहाँ मौजूद लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वहाँ हिंसा भड़क गई। पत्थरबाजी होते देख कर आसपास के दूकानदार भी सहम गए और वो अपनी-अपनी दुकानें बंद कर के वहाँ से भाग खड़े हुए। रैली पर हमले होते ही वहाँ भगदड़ मच गई।

14. मध्य प्रदेश में CAA के समर्थन में निकाली गई शांतिपूर्ण रैली में रायगढ़ की डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा पहुँची और प्रदर्शनकारियों को पीटना शुरू कर दिया। प्रिया वर्मा ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटने के लिए कहा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर एक-दो थप्पड़ भी रसीद दिए।

15. AIADMK राज्यसभा सांसद ए मोहम्मद जॉन को संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने पर ऑल जमात फेडरेशन से निष्कासित कर दिया गया। फेडरेशन में मोहम्मद जॉन ‘संरक्षक’ के पद पर साल 2010 से आसिन थे। लेकिन 16 दिसंबर 2019 को उन्हें इस पद से यह कहकर हटा दिया गया कि कैब का समर्थन करके उन्होंने मुस्लिमों का अपमान किया है।

16. CAA एवं NRC के विरोध में आयोजित राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के बिहार बंद के नाम पर शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को ‘हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया।’ राज्‍य में कई जगहों भारी हिंसा हुई। सबसे बड़ी घटना पटना के फुलवारीशरीफ में हुई, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने हनुमान मंदिर में घुसकर तोड़-फोड़ की

17. CAA के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन में 19 जनवरी कुछ कश्मीरी पंडित भी पहुँचे और कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने के नारे लगाने लगे। कश्मीरी पंडितों की इस नारेबाजी से नाराज होकर CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ झड़प शुरू कर दी जो कि कुछ ही देर में हाथा-पाई में बदल गई

18. चेन्नई में एक स्टेशनरी के दुकानदार को इसलिए जान से मारने की धमकी मिली, क्योंकि वहाँ पर CAA-NRC के समर्थन का लेबल वाला पेन बिक रहा था। दुकान पर मुस्लिमों की भीड़ जुट गई और CAA के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। इसके बाद उसे कई जगहों से धमकी भरे कॉल आने लगे।

19. बंगलुरु में वरुण नाम के एक व्यक्ति को सीएए के समर्थन का खामियाजा तब भुगतना पड़ा, जब कुछ उपद्रवियों ने उन पर हमला कर दिया। 31 वर्षीय वरुण पर सीएए के विरोधियों ने धारदार हथियार से हमला किया था। बेंगलुरु साउथ के सांसद व युवा भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि वरुण जब CAA समर्थक रैली में भाग लेकर लौट रहे थे, तब उन पर चाकू और कुल्हाड़ी से हमला किया गया।

20. CAA का समर्थन करने की वजह से उबर इंडिया ने पाकिस्तानी हिंदू को मजनू का टीला शरणार्थी कैम्प तक छोड़ने से इनकार कर दिया। ड्राइवर नसीम की इस करतूत के बारे में भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा ने ट्विटर पर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि नसीम को जैसे ही पता चला कि उसे अपने कैब में एक पाकिस्तानी हिन्दू को लेकर जाना है, वह वहाँ से चला गया। पाकिस्तानी हिन्दुओं ने बताया कि उबर इंडिया के ड्राइवर नसीम ने उन्हें नीचे उतरने को कहा। जैसे ही वो नीचे उतरे, वो गाड़ी लेकर फरार हो गया।

जहाँ एक तरफ CAA के विरोधी अभिव्यक्ति की आज़ादी का रोना रोते हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हैं, वहीं दूसरी तरफ वो ख़ुद विरोधी विचार रखने वाले लोगों के साथ मारपीट करते हैं। ये उनकी असहिष्णुता नहीं है तो क्या है?

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