क्या किसी पार्टी का पूर्व अध्यक्ष और सर्वेसर्वा ऐसा कह सकता है कि उसकी पार्टी ने कुछ नहीं किया? राहुल गाँधी कह सकते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि जनता ने अब बहुत देख लिया है और पिछले 70 सालों में कुछ नहीं हुआ।
"इस साल के पुरस्कार विजेताओं का शोध वैश्विक स्तर पर ग़रीबी से लड़ने में हमारी क्षमता को बेहतर बनाता है। मात्र दो दशक में उनके नए प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण ने विकास अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है। विकास अर्थशास्त्र वर्तमान में शोध का एक प्रमुख क्षेत्र है।''
".....जरूरी पारिवारिक समारोह की वजह से मैं पूरे दिन व्यस्त था और इसकी जानकारी मैंने राहुल गाँधी को पहले ही दे दी थी। वो (राहुल गाँधी) मेरे नेता हैं और मेरे लिए हमेशा रहेंगे। लेकिन निकम्मा क्यों अनुपस्थित था?”
सांगोद से विधायक भरत सिंह ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर खनन विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 की क्षतिग्रस्त सड़क के लिए ठेकेदार काे अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही है।
खुर्शीद ने कहा, कॉन्ग्रेस बीजेपी की तरह नहीं है और न उसे कभी होना चाहिए। उन्होंने लिखा, “जब हमारे प्रवक्ता बीजेपी को काउंटर करने के हमारे दायित्वों की तरफ इशारा करते हैं तो उन्हें यह जरूर याद रखना चाहिए कि यह तभी संभव है जब हम बहुआयामी वैश्विक नजरिए और भयहीन अभिव्यक्ति पेश करेंगे।”
2013 में बिहार के बोधगया मंदिर में बम धमाके के मास्टरमाइंड आतंकवादी आतंकी संगठन के 6 साल से फरार चल रहे आतंकवादी को पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया है।
चुनाव के दौरान राहुल गॉंधी ने अडानी को एक रुपए प्रति मीटर की दर से 35 हजार एकड़ जमीन देने का आरोप मोदी पर लगाया था। अब उन्हीं अडानी को लुभाने के जतन में कॉन्ग्रेस सरकार लगी है।
कर्नाटक के पूर्व डिप्टी सीएम और कॉन्ग्रेस नेता जी परमेश्वर के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी के बाद अब तक 4.52 करोड़ रुपए की नक़दी बरामद हुई थी। कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री के क़रीब 30 ठिकानों पर आईटी विभाग ने छापे मारे।
सुमन गुर्जर अपने वार्ड में विकास कार्यों के एवज में ठेकेदार से 3 प्रतिशत कमीशन मॉंग रही थी। ठेकेदार ने पहले 50,000 रुपए दिए। रिश्वत की दूसरी किस्त लेते वक़्त एसीबी की टीम ने रंगे हाथों सुमन गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया।
ज्योतिरादित्य की गिनती भी उन नेताओं में होती है जो राहुल के करीबी रहे हैं। तो क्या अगली बारी उनकी ही है? जिस दौर में नेताओं को निष्ठा बदलने में पल भर की देरी नहीं लगती है, उस वक़्त में ज्योतिरादित्य के लिए तो यह दादी के घर वापसी जैसा ही होगा।