गोविंद डोटासरा का कहना है कि सभी गर्ल्स स्कूलों में महिला टीचर्स को प्राथमिकता दी जाएगी। पुरुष टीचर्स को आवश्यकता के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। राज्य सरकार के इस फ़ैसले को कई लोगों ने अपरिपक्व और बचकाना बताया है।
केसी वेणुगोपाल सिर्फ एक नेता नहीं हैं। वो कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस के महासचिव भी हैं। बावजूद इसके वो हिस्ट्रीशीटर यानी अपराधी इश्तियाक अहमद से मिलते हैं... कहाँ मिलते हैं? - कॉन्ग्रेस के मुख्यालय में! इश्तियाक अहमद IMA की अरबों रुपए की पोंज़ी स्कीम में भी गिरफ्तार किया गया था।
"5 साल पार्टी में उस औरत की तरह अत्याचार सहन किया, जिसका पति शराबी होता है, जो उसे पीटता है। मगर वो औरत जुल्म सहती रहती है क्योंकि उसे बच्चे पालने होते हैं। हमें भी अपने साथियों के भविष्य की खातिर वो जुल्म सहने पड़े।"
"फ़िलहाल, पार्टी में केवल सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के रूप में दो मज़बूत नेता हैं। सामूहिक अपील वाले नेता कहाँ हैं? कॉन्ग्रेस के पास नेता या पैसा नहीं है... वहीं दूसरी तरफ़, भाजपा भावनात्मक रूप से लोगों को..."
के सी राममूर्ति के बारे में बता दें कि वे कर्नाटक में और उसके आस-पास के कई शैक्षणिक संस्थानों के मालिक हैं। उन्हें साल 2016 में राज्य इकाई के विरोध के बावजूद भी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा का सदस्य बनाया था।
सड़कों के मामले में कॉन्ग्रेसी सरकारों का रिकॉर्ड संदेह ही पैदा करता है। वादे के लालू की तरह छलावा साबित होने की आशंका ज्यादा है। मध्य प्रदेश में जब दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में 10 साल कॉन्ग्रेस सत्ता में रही थी तो सड़क और गड्ढों का फर्क मिट गया था।
डीके शिव कुमार के वकील ने कोर्ट में अर्जी देकर शिकायत की थी कि उनके मुवक्किल को जेल में बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है, जिसकी वजह से वो पीठ दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं।
आज कॉन्ग्रेस 'न्याय योजना' को लेकर बनर्जी का गुणगान करते नहीं थक रही। लेकिन, इंदिरा के जमाने में 250 लड़कियों सहित क़रीब 700 छात्र गिरफ्तार किए गए थे। अभिजीत बनर्जी पर 'हत्या की कोशिश' के आरोप लगाए गए थे।
सिंधिया ने अब राज्य सरकार की ट्रांसफर और पोस्टिंग पर सवाल उठाए हैं। सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “ट्रांसफर- पोस्टिंग का क्या हाल है वो तो सब जानते ही हैं। मैं आपसे ये कहूँगा कि आप काम पर ध्यान दें।”
इस तरह की टिप्पणी कर लोगों को उकसाते वक्त सिद्धरमैया शायद यह भूल जाते हैं कि संविधान में कई बार बदलाव और संशोधन किए गए हैं। इनमें से कई सारे विवादास्पद संवैधानिक संशोधनों के लिए उनकी खुद की पार्टी जिम्मेदार है।