सोशल मीडिया पर लगातार फेक न्यूज़ चलाए जा रहे हैं कि इसमें बौद्धों का हाथ है। जबकि श्री लंका की सरकार इस मामले के पीछे नेशनल तौहीद जमात का हाथ देख रही है और खूँखार इस्लामिक आतंकी संगठन ISIS द्वारा इस हमले की ज़िम्मेदारी भी ले ली गई है।
ऐसे राजनेताओं के लिए महिलाएँ आज भी ‘माल’ हैं। ऐसी गिरी मानसिकता पर जनता ने तो अपना आक्रोश व्यक्त किया ही। अब देखना है आगे चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है। वैसे लोगों ने चुनाव आयोग से इस बात का संज्ञान लेने की अपील की है।
जब एक काले कुत्ते को सीढियाँ चढ़ते वक़्त दिख गया कॉन्ग्रेस का झंडा... और फिर उसने जो किया, वो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया... लोग इसे जम कर शेयर कर रहे हैं। आप भी मज़े लीजिए इस वीडियो का।
भाजपा ने अब तक 437 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है, जबकि कॉन्ग्रेस ने 423 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की है। उत्तर-पूर्व की सभी राज्यों से कॉन्ग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में भी भाजपा सफल हुई है।
उत्तराखंड कॉन्ग्रेस सेवादल नाम के ट्विटर यूजर ने स्मृति ईरानी के नाम से भद्दी टिप्पणी करते हुए एक झूठी खबर को पब्लिश किया। इस ट्वीट के अनुसार, भाजपा की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हारे, तो वो आत्महत्या कर लेंगी।
इस घटना को लगभग एक वर्ष होने वाला है और इस एक वर्ष के भीतर ही कॉन्ग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जनेऊ भी धारण किया, अमरनाथ यात्रा का भी फोटोशॉप किया, समय और परिस्थिति के अनुसार हिन्दू प्रतीकों के साथ खूब तस्वीरें खिंचवाते नजर आते हैं, उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के मंदिर का भ्रमण और धोती पहनना सीखने तक के उपक्रम राहुल गाँधी को करने पड़े हैं।
अतंरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पहलवान नरसिंह यादव पर आरोप है कि वह उत्तर-मुंबई से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार संजय निरुपम के लिए चुनावी प्रचार किया है।
मतदान के दिन राहुल गाँधी ने अपने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत में लाखों युवा पहली बार मतदान करने जा रहे हैं। उनके हाथों में भारत का भविष्य है। मुझे विश्वास है कि वे हर भारतीय के लिए NYAY चाहते हैं और बुद्धिमानी से मतदान करेंगे। पहली बार मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे युवाओं के साथ इस शार्ट फिल्म को शेयर करें।'
मैं आपकी राजनीतिक विवशता को देख रही हूँ। विडंबना यह कि आप वर्षों से राजनीतिक परिदृश्य में एक मुकाम पाने को कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जिसमें सफलता कमोबेश आपके लिए हाथ न आने वाला ही रहा है। ऊपर से नेहरू-गाँधी परिवार में पैदा होने के लाभ को भुनाने में भी सक्षम नहीं रहे आप। अफसोस!