कॉन्ग्रेस आईटी-सेल के सदस्य गौरव पांधी ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के कुछ हिस्सों के साथ एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो को संपादित कर लूप के ज़रिए एक 'अपमानजनक' शब्द को बार-बार सुनाया गया। इस वीडियो पर यूजर्स ने...
यह वीडियो एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ राजनीतिक प्रचार के रूप में कम और हिंदू आतंकवाद सिद्धांत को फिर से हवा देने की रूपरेखा के रूप में ज़्यादा है। कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में वापस आने के लिए अब देश ही क्या, यहाँ की संस्कृति और सहिष्णुता का भी घोर अपमान करने पर तुली हुई है। सत्ता और तुष्टिकरण के लिए अब ये कोई भी सीमा लाँघ सकते हैं।
तीसरे चरण में कॉन्ग्रेस के कुल 90 उम्मीदवारों में से 40 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की है। यह कुल उम्मीदवारों का 44% है।
अहमद पटेल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि लोकसभा के चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने गुजरात में भी अच्छे परिणाम मिलने की भी आशंका व्यक्त की है।
यह भी सच है कि कई सवाल न केवल अंदरूनी सूत्र आरवीएस मणि और पीड़िता साध्वी प्रज्ञा द्वारा उठाए गए हैं, बल्कि कई अन्य लोगों ने उनके आचरण और मिलीभगत के बारे में ‘भगवा आतंक’ का झूठ गढ़ने के लिए उठाए हैं। सच्चाई शायद बीच में कहीं है। लेकिन साध्वी प्रज्ञा की आवाज़ को चुप कराने की कोशिश करने वाले, इन तमाम मीडिया गिरोहों से कोई भी उम्मीद करना बेमानी है।
मोंसेरेट को राजनीतिक दल बदलने की आदत है। उसने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत यूनाइटेड गोअन डेमोक्रेटिक पार्टी (UGDP) के सदस्य के रूप में की, फिर 2004 में भाजपा में शामिल हुआ और 2007 में UGDP में वापस आ गया।
चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें पता है कि वह अपने विचारों के लिए जवाबदेह होंगी। जब वह कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता थीं, तब उन्होंने भाजपा के साथ-साथ शिवसेना के खिलाफ अपमानजनक बातें की थीं, लेकिन यह शिवसेना में शामिल होने से पहले बहुत पहले की बात है।
10 साल की उम्र से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली उर्मिला मातोंडकर को राजनीति में आने के बाद भी तंज कसने का मौका सिर्फ़ मोदी की बायोपिक पर ही मिला। जिस महिला को किसी व्यक्ति के जीवन संघर्षों पर बनी फिल्म कॉमेडी टाइप लगती है, तो संदेह होता है कि उन्होंने अभिनय की दुनिया में इतने वर्ष बिताने के बाद भी क्या सीखा?