राहुल गाँधी की दादी से लेकर पिताजी तक के राजनीतिक दंभ को बिहार और यूपी ने ही चकनाचूर किया है। लेकिन विदेशी पढ़ाई के कारण शायद राहुल को इन ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी नहीं होगी। सामाजिक समस्याओं का राजनीतिकरण शाह बानो की तरह कहीं कॉन्ग्रेस की कब्र न खोद दे इस बार!
चुनाव के इस मौसम में भाजपा भी बाहर से आ रहे नेताओं के स्वागत में खड़ी है। जदयू, लोजपा, शिवसेना और अकाली दल जैसे पुराने गठबंधन साथियों का साथ बनाए रख कर भाजपा और उत्साह में नज़र आ रही है।
रॉबर्ट वाड्रा की तरह राहुल गाँधी भी संजय भंडारी से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। गाँधी परिवार का क़रीबी भंडारी एक हथियार डीलर है। राफेल सौदे के दौरान दसौं द्वारा उसे फटकार लगाई जा चुकी है।
आपको यह जान कर हैरानी होगी कि लतीफ़ को रिहा करने की माँग वही आतंकी कर रहे थे, जिन्होंने 1999 में भारतीय विमान को हाईजैक किया था। इतने खूंखार आतंकी को यूं छोड़ दिया गया जैसे कि वह कोई चोरी-चकारी का मुजरिम हो।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब के अध्यक्ष सुनील जाखड़ और प्रभारी आशा कुमारी ने खुद पूर्व प्रधानमंत्री से क़रीब आधे घंटे तक मुलाकात की और आग्रह किया कि मनमोहन सिंह इस बार अमृतसर से चुनाव लड़ें।
देश के किसी भी विश्वविद्यालय में किसी भी आमूल चूल बदलाव को फासीवाद का नाम देने वाले कांग्रेस और वामदलों ने एफटीआईआई के पूर्व चेयरमैन गजेंद्र सिंह चौहान का विरोध इतने निचले स्तर पर आकर किया था कि आखिरकार उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया।