घटना के बाद जब बच्ची की माँ घर लौटी तो उसने देखा कि बच्ची घर पर नहीं है। इसके बाद उन्होंने आस-पड़ोस में पूछताछ की। पूछताछ के बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला तो उन्होंने आसपास के इलाके में ढूँढ़ना शुरू किया।
बिहार में ज़हरीली शराब से गरीब मर रहे हैं। उनमें जागरूकता का अभाव है। उनके परिवारों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों? आम जनता पर क्यों थोपा जा रहा दोष?
बिहार के पूर्वी चम्पारण में ज़हरीली शराब से हुई मौतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से इफ्तार पार्टी में व्यंजनों का आनंद लेते दिखे।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक दलित महिला की शव यात्रा के लिए गाँव के तीन बढ़ाई ने अर्थी बनाने से इनकार कर दिया। हालाँकि पुलिस ने मजहबी या जातीय भेदभाव का खंडन किया है।