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History

जब तिब्बत की संस्कृति और लोगों को तबाह कर रहा था चीन, उसके सैनिकों के लिए नेहरू ने भेजे थे चावल

आत्ममुग्ध नेहरू ने ​कई भूल किए। इनमें से एक तिब्बत भी है। विश्वनेता बनने की उनकी चाह ने चीन की सभी इच्छाएँ पूरी की थी।

ब्राह्मणों को बदनाम करने से लेकर इस्लामी आक्रांताओं के महिमामंडन तक: NCERT पुस्तकों में गड़बड़ी पर नीरज अत्री से बातचीत

ब्राह्मणों को बदनाम करने से लेकर इस्लामी आक्रांताओं के महिमांडन तक, NCERT की पुस्तकों में गड़बड़ी पर अजीत भारती की नीरज अत्री से बातचीत।

जब लोकमान्य तिलक की प्रेस को बिकने से बचाने के लिए लोगों ने जुटाए थे ₹3 लाख

अभिव्यक्ति की आजादी के लिए राष्ट्रवादी विचारधारा को वही संघर्ष आज भी देखना पड़ता है, जिससे एक समय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को गुजरना पड़ा था।

गोवा का हाथ काटरो खम्भ: मौत का वह स्तम्भ जहाँ जेवियर के अनुयायी हिन्दुओं को काट दिया करते थे

भारत के अधिकांश शहरों में “संत” ज़ेवियर के नाम पर स्कूल-कॉलेज हैं। लेकिन गोवा में एक स्तंभ ऐसा भी है जिसे उसके अनुयायियों ने हिंदुओं के रक्त से सींचा था।

जब अंग्रेज सावरकर को कोल्हू में बैल की जगह जोतते थे, जब गाँधी अफ्रीका से भारत लौटे भी नहीं थे: कहानी कालापानी की

उनसे छिलके कूटवाए जाते। कोल्हू का बैल बना कर दिन भर जोता जाता। उन्हें रस्सी बाँटने का काम दिया जाता। प्रताड़ना ऐसी कि आत्महत्या के ख्याल आते।

स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत का वह सपना जो अंग्रेजों के राज में बिपिन चन्द्र पाल ने देखा था

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी की बात की है उसे बिपिन चन्द्र पाल के दृष्टिकोण से भी देखा जा सकता है।

…जब जेल में महात्मा गाँधी का बेटा और नाथूराम गोडसे की हुई मुलाकात, और फिर लिखना पड़ा उन्हें एक पत्र

"महात्मा गाँधी के बेटे देवदास शायद इस उम्मीद में नाथूराम गोडसे से मिलने गए कि कोई डरावनी शक्ल वाला, खून का प्यासा कातिल दिखेगा, लेकिन..."

मई 19, 1961 की त्रासदी: जब 11 बंगालियों ने मातृभाषा के लिए अपनी जान गँवा दी थी

असम के सिलचर में राज्य की सरकारी भाषा के रूप में असमिया के अलावा बांग्ला को भी शामिल करने की माँग को लेकर आज ही के दिन वर्ष 1961 में आंदोलन हुआ था। सिलचर रेलवे स्टेशन पर मई 19, 1961 को आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोली चलाई थी, जिसमें 11 लोग मारे गए थे।

दर्थवामा रेन्थलेई: मिजोरम के एक अज्ञात राष्ट्र नायक, जिन्होंने नेताजी के नेतृत्व में लड़ी थी आजादी की लड़ाई

भारतीय स्वतंत्रता में अपना अद्भुत योगदान देने के लिए 15 अगस्त, 1972 को ‘ताम्रपत्र’ राष्ट्रीय पुरुस्कार से दर्थवामा को सम्मानित किया गया था।

सुखदेव थापर: जिनके भगत सिंह पर किए तंज ने क्रांतिकारियों को अमर बना दिया

सुखदेव थापर ने भगत सिंह पर एक लड़की को लेकर तंज करते हुए कहा कि कॉलेज की वो लड़की, जो तुम्हें देख कर मुस्कराया करती थी, तुम उसके इश्क में गिरफ्तार हो गए हो और......

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