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History

जब नेहरू के रुख से 5 दिन में गिरी 67 लाशें: मराठियों को अलग महाराष्ट्र नहीं देना चाहती थी कॉन्ग्रेस

महाराष्ट्र का गठन कैसे हुए और नेहरू का एक्सपेरिमेंट क्यों फेल हुआ? यशवंतराव से लेकर ठाकरे और पवार कैसे उभरे?

हिटलर ने बंकर में अपने डॉक्टर से पूछा- आत्महत्या का सबसे अच्छा तरीका क्या – जहर या बंदूक की गोली?

आत्महत्या सायनाइड या गोली से? हिटलर ने डॉक्टर से पूछा। फिर सायनाइड का असर जाँचने के लिए अपनी प्यारी पालतू बिल्ली ब्लॉन्डी को उसने...

जहाँ एक नपुंसक ने मुग़ल शहजादों को औरतों के कपड़े में नचाया: लाल किला की कहानी

लाल किले की नींव अप्रैल 29, 1638 को रखी गई। इसी किले में एक सनकी रोहिल्ला ने मुगलों को औरतों के कपड़े में नचाया।

उम्माह के पैरोकार इक़बाल ने कैसे बदल दिया था ‘सारे जहाँ से अच्छा’ तराना: कट्टरपंथी थे Pak के जनक

अगर आप इस्लामी कट्टरपंथी अल्लामा इक़बाल का 'सारे जहाँ से अच्छा' गाते हैं तो आपको 'तराना-ए-मिल्ली' के बारे में जरूर जानना चाहिए।

संविधान में राम-कृष्ण को उकेरने वाला वो नायक जिसकी धरोहर ‘सेकुलर’ जमात ने गुपचुप गायब कर दी

क्या आपने नंदलाल बोस का नाम सुना है? संविधान में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर आज क्यों नहीं दिखती?

‘गायों का चरवाहा’ बना बम क्रांति का जनक, जिसके धमाकों से हिल गए थे अंग्रेज

वे क्रांतिकारियों के बम विशेषज्ञ थे। उनके ही बनाए बम का इस्तेमाल खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने किया था मुजफ्फरपुर में मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड के काफिले पर हमले में किया था। जयंती पर बम क्रांति के जनक उल्लासकार दत्ता को नमन।

गुरु गोविन्द सिंह की वो सभा, जिसमें उन्होंने अपने ही 5 लोगों के शीश माँगे: खालसा और ‘पंज प्यारे’ का इतिहास

सारी सभा में हलचल मच गई। रौद्र रूप धरे गुरु गोविन्द सिंह की इस माँग के बाद जो लोग आए, उन्होंने न सिर्फ़ अपनी बहादुरी से देश को गौरवान्वित किया बल्कि जाति-पाती के बंधनों को तोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई। एक व्यक्ति आगे आया। गुरु गोविन्द सिंह उसे तम्बू में ले गए और खचाक...!

जब देशहित के लिए अपनी पहचान खो कर BJP का हुआ निर्माण: सावरकर से लेकर अटल-आडवाणी तक का इतिहास

जनसंघ की जड़ें RSS और अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवादी आन्दोलनों और संगठनों से जुड़ी थीं। इसीलिए, भाजपा का इतिहास समझने के लिए हमें संघ के साथ-साथ आर्य समाज और हिन्दू महासभा के इतिहास को भी देखना पड़ेगा। आज के 'घर वापसी' अभियान को ही लें तो इसकी जड़ें आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन में है।

सिसली में शवों से भरे 12 जहाजों से लेकर वुहान के कोरोना तक: हमेशा गतिशील धनाढ्य वर्ग के कारण फैले ऐसे विषाणु

पैनडेमिक के पीछे कभी भी गरीब, पिछड़े और आम जीवन व्यतीत करने वालों का हाथ नहीं रहा। इसके पीछे प्राय: धनी, सुदृढ़, प्रवासी, धनाकांक्षी, गतिशील लोग होते थे और आज भी स्थिति वही है। फिर चाहे देश में पहला कोरोना केस बना वुहान से लौटा केरल का छात्र हो या लंदन से लौटी कनिका कपूर। सब एक समृद्ध समाज का हिस्सा हैं। जिनके लिए आज यहाँ कल वहाँ एक आम बात है।

मौलवियों ने कहा- काफिरों को इस्लाम में बदलो, लेकिन उसके कारण कामयाब न हो पाया मिरखशाह

भगवान झूलेलाल ने अपने चमत्कारिक जन्म और जीवन से सिंधी हिंदुओं के जान की रक्षा की। हिन्दू धर्म को बचाए रखा। मिरखशाह जैसे ना जाने कितने इस्लामिक कट्टरपंथी आए और धर्मांतरण का खूनी खेल खेला। लेकिन भगवान झूलेलाल की वजह से सिंध में एक दौर में ऐसा नहीं हो पाया था।

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