जब इलाके में कश्मीरियत का बोलबाला हुआ तबसे ये एक्ट अलगाववादी, आतंकी, दहशतगर्द जेहादी, कश्मीरियत दिखाने वाले सभी पर लगने लगा। हिजबुल मुजाहिद्दीन के बुरहान वानी के मारे जाने के बाद इसी कानून से पाँच सौ से ज्यादा अलगाववादी कैद किए गए थे।
जो लोग ह्यूस्टन में मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, वे कश्मीर अलगाववादी हैं। वे खुलेआम भारत से कश्मीर की आज़ादी की गुहार लगा रहे हैं। और इस बार इनका साथ दे रहे हैं खालिस्तानी आंदोलन से जुड़े हुए सिख भी!
मायावती को यह बात हज़म नहीं हो पा रही है कि राजस्थान में उनके सभी छ: विधायकों ने फिर से कॉन्ग्रेस का हाथ थाम लिया। उन्होंने 2009 में अशोक गहलोत की सरकार के दौरान भी ऐसा ही किया था। कल भी मायावती ने एक रैली में कॉन्ग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह के अनुसार नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के कई प्रयास हुए। इनमें से अधिकतर विफल कर दिए गए हैं। कुछ के घुसपैठ में सफल होने की आशंका जताते हुए कहा था कि उन्हें दबोचने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर पर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा अनुच्छेद 370 के निरस्त हो जाने के बाद से एक गोली भी नहीं चलाई गई। केंद्र ने बताया कि प्रदेश के 88 प्रतिशत से अधिक थाना क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। फिलहाल, कुछ स्थानीय प्रतिबंध लगे हैं।
इंग्लैंड में इंडो-यूरोपियन कश्मीर फोरम और हिंदू काउंसिल यूके ने बर्मिंघम के विक्टोरिया स्क्वायर में अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त किए जाने का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भी प्रदर्शन किया गया।
भारतीय राजनयिक हर्षवर्धन श्रृंगला ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह एक अराजकतावादी प्रावधान था, जिससे अर्थव्यवस्था का दम घुट रहा था और पाकिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा मिल रहा था।
फारूक खान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एक महीने से अधिक समय बीत गया, लेकिन सुरक्षा बलों तथा पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए एक भी गोली नहीं चलाई गई।