बिहार सरकार ने ने इसे 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' करार दिया और एनकाउंटर को फेक बताया। मंत्री ने ने पुलिस को ही क्रूर बता दिया और दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने अपने वरिष्ठों के आदेश की अवहेलना की।
आज हम चंदा बाबू की बात करने जा रहे हैं, जिनके दो बेटों को तेज़ाब से नहला कर मार डाला गया। तीसरा गवाह था, लेकिन उसकी भी हत्या हो गई। बुजुर्ग दम्पति आज भी शहाबुद्दीन के खौफ के बीच जीते हैं।
पार्टी बदली, इलाका बदला, जेल भी गया लेकिन फिर भी इस बाहुबली का दबदबा कायम रहा। 1987 से सालों तक मोस्ट वांटेड रहे मनोरंजन सिंह को लोग उनके इलाके में ‘धूमल सिंह’ के नाम से बुलाते हैं।
बिहार में लालू-राबड़ी युग के जंगलराज की एक से बढ़ कर एक कहानियाँ हैं। इनमें से एक है छपरा जेल काण्ड। जी हाँ, जेल में रहने वाले कैदियों ने ही जेल पर कब्जा कर लिया था।