धर्मेंद्र की माँ और छोटे भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। देखकर ऐसा लगा कि जैसे वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। धर्मेंद्र के पिता वीरसहाय हर रोज सुबह बिना कुछ खाए-पिए अपने बेटे को खोजने निकलते हैं, लेकिन देर रात हताश होकर खाली हाथ घर लौट आते हैं।
जब दुकान मालिक अनिल पाल पुलिस के साथ अपनी दुकान का हाल जानने वहाँ पहुँचे तो उन्हें मृतक नेगी का शरीर दूसरी मंजिल पर सीढ़ी के पास मिला, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो दंगाइयों को देखकर बिल्डिंग से कूदने की कोशिश कर रहे थे।
“मेरी बेटी गार्गी कॉलेज में पढ़ती है। वह 5 दिन से घर लौटकर नहीं आई है। अपनी दोस्त के साथ पीजी में रूकी हुई है। अगर यही माहौल रहा तो हम यहाँ नहीं रहेंगे, गाँव से जमीन बेचकर यहाँ आए थे, अब यहाँ से बेचकर कहीं और चले जाएँगे।”
मोबाइल गुलेल, जी हाँ मोबाइल गुलेल! रिक्शे पर लोहे के एंगल को वेल्डिंग कर के बनाई गई। इसे मोबाइल गुलेल कहा जाता है। जहाँ चाहे, वहाँ ले जाओ और हिंसा को अंजाम दो। हिंदू घरों को टारगेट कर इस मोबाइल गुलेल से पेट्रोल बम की बोतलें, बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए।
"उनके नंबर से मेरे पास फोन आया। उधर से कोई और बोला और पूछा कि यह किसका नंबर है? मैंने कहा मेरे पति का... मैं कुछ लोगों को लेकर घटनास्थल की ओर दौड़ी तो देखा कि एक दुकान के सामने वह घायल पड़े हुए हैं मैं देखते ही बेहोश हो गई।"
"हम 20,000 हिन्दू इसी नाले के पास आकर रोज पानी भर रहे हैं। मुस्लिमों के लिए टंकी लगवाई गई है, हिन्दुओं को छोड़ दिया गया है।" AAP विधायक हाजी यूनुस के इलाके की जमीनी हकीकत, जिस पर दंगा में शामिल होने के भी स्थानीय लोग लगा रहे आरोप।
"कमरे के अंदर आओ तो मेरे बेटे राहुल को लेकर ही आना, नहीं तो वापस चले जाना।" एक मॉं के इस सवाल का जवाब मेरे पास नहीं था। आपके पास भी नहीं होगा। इसलिए इस दंगाई भीड़ की पहचान जरूरी है ताकि कल कोई राहुल फिर बेमौत मारा न जाए।
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में कैसे और कब क्या हुआ, ये सब हम आपके समक्ष लाए हैं। इस दंगों के मुख्य किरदार कौन हैं और मीडिया ने कैसे पक्षपाती रवैया अपना कर पीड़ित हिन्दुओं के साथ अन्याय किया, ये सब यहाँ आपको हम बताएँगे। पूरे प्रकरण की क्रोनोलॉजी समझिए, टाइमलाइन जानिए।
कॉन्ग्रेस जैसे राजनैतिक दल पहले समुदाय विशेष को भड़काते हैं, फिर तुष्टिकरण को सत्ता का जरिया बनाते हैं। इसके बाद मुस्लिम नेता ऐसे मौके का नाजायज ‘फायदा’ उठाने के लिए पहले अलग संविधान, फिर अलग देश की माँग करने लगते हैं।
ऑपइंडिया की टीम ने कई विडियो और फोटो जुटाए हैं, जो इस रिपोर्ट में संलग्न हैं। तबाही के इस मंजर में हिन्दुओं का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। इससे उबरने में उन्हें काफ़ी समय लग जाएगा। लोग अभी भी घरों में दुबके हुए हैं।