CAA विरोध के नाम पर 15 दिसंबर को हिंसा और आगजनी हुई थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने इसके लिए भीड़ को उकसाया था। क्राइम ब्रांच ने आशु खान और आइसा नेता चंदन कुमार को भी हाजिर होने को कहा है।
दीपिका को चुप कराने के लिए जब इस्लामिक नारे लगाए गए, तब वह अपनी सीनियर रहीं आकृति रैना का पत्र पढ़ रही थीं। हिंदू कॉलेज में राजनीति विज्ञान की छात्रा रहीं आकृति ने पत्र में अपने ही परिवार के विस्थापन की कहानी लिखी थी।
मटिया महल में हो रही रैली में अमित शाह ने कहा- "केजरीवाल जी ने यमुना स्वच्छ करने की बात कही, परन्तु आपने तो हमारे घरों में आने वाला पानी भी खराब कर दिया। दिल्ली की जनता आज पूरे भारत में जो खराब से खराब पानी पीने का काम कर रही है, योगी और मोदी जी ने गंगा साफ करने का काम किया, यमुना भी हम ही साफ करेंगे।"
"तुम जो ये कर रहे हो, तुमने ये फैसला कर लिया है कि सिर्फ मुसलमानों को बदनाम करने के लिए तुम डिबेट करोगे और सरकार की जूतियाँ सीधी करोगे। मैं दीपक चौरसिया तुझे चैलेंज करता हूँ.... भ*वे पत्रकार!"
‘गंगो जमन के खिलाफ आरएसएस और भाजपा के लोग’ और ‘हम कॉन्ग्रेस के लोग: दुष्प्रचार और सच' नामक दो किताबें कॉन्ग्रेस नेताओं को दी गई है। पहली किताब में बताया गया है कि तिरंगे का विरोध करने वाला RSS हिन्दू-मुस्लिम एकता के ख़िलाफ़ काम कर रहा है।
स्वराज कौशल ने लताड़ लगाते हुए कहा कि जब नसीरुद्दीन प्रलाप करते हैं तो ये उनका विवेकपूर्ण विचार बन जाता है जबकि अनुपम खेर अपने ही देश में शरणार्थी बनाए जाने के बावजूद जब कश्मीरी पंडितों की बात करते हैं तो उन्हें मानसिक रूप से विक्षिप्त कहा जाता है!
पश्चिम बंगाल के बीरभूम में 20 साल की चुमकी खातून पर गाँव वालों ने हमला कर दिया। उनके घर में आग लगा दी। वहीं राजस्थान में नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह नेशनल इकनॉमिक सेंशस 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं।
उस सरकार को कई देशों की मान्यता प्राप्त थी। बैंक था, सेना थी। महिलाओं की भागीदारी थी। अफ़सोस कि भारत की उस सरकार को भुला दिया गया, जिसकी देश ने 2018 में 75वीं वर्षगाँठ मनाई। नेताजी ने देश-विदेश में घूम कर भारतीय समुदाय के भीतर आज़ादी का मन्त्र फूँका।
घटना के तुरंत बाद एसीपी और डीसीपी ने घटनास्थल का दौरा किया। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने क्षेत्र का जायजा लिया, जिसके बाद पुलिस ने पूरे क्षेत्र में तलाशी ली। वहीं विधायक के बेटे मोहम्मद नलपड ने आरोप लगाया कि उनके पिता की कुर्सी के नीचे कोई संदिग्ध वस्तु रख दी गई थी।
"सहारनपुर जिले में महिलाओं का हलाला करवाने के लिए मदरसों में लड़कों को रखा जाता है। यही नहीं, उम्र और सुन्दरता के अनुसार वो महिलाओं के हलाला का पैसा लेते हैं।" अब सोचिए, इनकी स्थिति कितनी बदतर है। लेकिन फिर भी आवाज़ उस पर उठानी है, जिस पर इनका समुदाय इजाजत दे।