एक बलिदानी पुलिसकर्मी के परिवार को दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर करने वाली दिल्ली सरकार क्या कोरोना काल में भी मजहब देख कर मदद करती है? अगर मुआवजा देना ही नहीं था तो झूठा वादा कर के परिवार को उम्मीद ही क्यों दी गई?
ऋचा भी ज्योतिका की तरह उच्च-शिक्षित थी। दोनों प्रयागराज की हैं और दिल्ली में उनका धर्म-परिवर्तन हुआ, ऐसे में पता लगाया जा रहा है कि दोनों के बीच कॉमन लिंक क्या है।
ऐसे में भारत विरोधी लेखिका द्वारा लिखी गई किताब का सरकार द्वारा समर्थन करना सोशल मीडिया यूजर्स को रास नहीं आया। उन्होंने इसको लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की और अपना आक्रोश व्यक्त किया।
केंद्रीय कानून और न्याय एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद के एकाउंट को ब्लॉक करने के लिए माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर एक बार फिर से जाँच के दायरे में आ गया।
पटना हाईकोर्ट ने मृतक अनुराग पोद्दार के परिजनों को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने के लिए राज्य सरकार से कहा था। बिहार सरकार ने SC में इस आदेश को चुनौती दी थी।