भले ही दक्षिणपंथी ट्रम्प के समर्थकों ने अमेरिकी संसद पर हमला कर दिया, पर आज मैं आह्लादित हूँ कि उनमें से एक के हाथों में तिरंगा भी था। अब मैं आराम से उस तिरंगाधारी को RSS का ब्राह्मणवादी, पितृसत्तात्मक, भगवा आतंकी बोल कर, अपने लिब्रांडू समाज के व्हाट्सएप्प ग्रुपों में छा जाऊँगा।
मैं वो फेसबुकिया चिरकुट हूँ जिसे यह नहीं पता कि दूध जानवर से मिलता है न कि मदर डेयरी से, पर मैं वैश्विक मुद्दों पर सबसे पहले प्रोफाइल पिक्चर बदल कर काला कर लेता हूँ।
वामपंथन अरुंधति रॉय की पुस्तक को तमिलनाडु के विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम से हटाने का फैसला किया है। इसमें लेखिका ने माओवादियों का महिमामंडन किया था।
'विकल्प' नाम के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ने उन्हें 'धोखेबाज' और 'पुलिस के मुखबिर' घोषित करते हुए कहा कि मारे गए लोगों में 12 गोपनीय सैनिक, 5 भीतरघाति और 8 मुखबिर शामिल थे।
इस कलाकार के इरादे इस दिशा में तब और मजबूत हुए, जब 19 जनवरी को उन्होंने कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार पर 30 साल बीत जाने पर भी लोगों को चुप देखा।
हलाल पर लेख के कारण 'स्टॉप फंडिंग हेट' नामक ट्विटर हैंडल ने हमारे खिलाफ़ दुष्प्रचार का ठेका ले लिया है। ऑपइंडिया के आर्थिक बहिष्कार करने का अभियान चला रखा है, लेकिन हम अपने लेख पर शत-प्रतिशत कायम हैं।