जैसे ही जडेजा ने यह वीडियो शेयर किया, लिबरल्स और इस्लामिस्ट्स ने न केवल उसकी तलवारबाजी स्किल का मजाक बनाना शुरू कर दिया बल्कि राजपूत समुदाय को गाली देना भी शुरू कर दिया।
“मंजू देवी ने अपने 5 बच्चों को भूखमरी के कारण गंगा नदी में नहीं डुबाया है।" इससे पहले भदोही पुलिस ने मंजू के घर में बने खाने का फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था कि मंजू के घर में खाना बना है। फोटो से स्पष्ट है कि भूखमरी के कारण बच्चों को नदी में नहीं डुबाया गया है।
बुक माय शो ने एक दिन पहले हुसैन हैदरी जैसे कट्टर इस्लामिस्ट को अपना मंच दिया था, उसे प्रमोट किया था। आज PM मोदी के लिए मौत माँगने वाली वामपंथी ट्रोल हरनिध कौर को अपना मंच दिया, उसे प्रमोट किया।
नंदिता दास का यह बयान अपने आप में गलत नहीं है, क्योंकि सच में भारत में एक महान विभाजन मौजूद है। लेकिन यह स्टेटमेंट किसकी तरफ से आया है जब आप यह सोचते हैं तो मुँह दबा कर हँसते हुए यह सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि आखिर कोई खुलेआम इतना दोमुँहा बर्ताव कैसे कर लेता है।
आप बताइए कि पेशाब बोतल में रखने पर रोक है! अरे! आज क्या मजहबी इन्सान इतना पराया हो गया कि अपना ही पेशाब बोतल में नहीं रख सकता? मतलब थूकने पर मनाही है, शौच करने पर मनाही है, तब हमने बोतलों में पेशाब रख लिया, तो भी दिक्कत!
राजदीप सरदेसाई इसे 'ब्लडी दिवाली' कहते हैं। अरशद वारसी को देश की जनता 'स्टुपिड' नज़र आती है। सोनम कपूर का कुत्ता डर जाता है। शशि थरूर का पॉवर ग्रिड फेल हो जाता है। आख़िर जमातियों का मजहब न देखने की सलाह देने वालों ने '9 बजे 9 मिनट्स' में धर्म कैसे ढूँढ लिया?
कुछ लोगों का मानना है कि सरकार ने इस फैसले से कोरोना के कारण छवि को होने वाले नुकसान की भरपाई का जरिया बनाते हुए यह भी साबित करने का प्रयास किया है कि रामानंद सागर द्वारा निर्मित इस धारावाहिक के पीछे आरएसएस के हिंदुत्ववादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार था।
वो तो भला हो कि अधिकतर नागरिक ऐसे फर्जी यूट्यूबर्स की बातों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन कुछ कम बुद्धि वाले राठी-समर्थक उसकी बातों को फूल और बाकी बातों की बबूल ही समझते हैं। राठी ने तब आरोप लगाया था कि 'डर का माहौल' ऐसे बनाया जा रहा है, जैसे कोई 'जॉम्बी अपॉकलिप्स' (चलती-फिरती लाशों वाली तबाही) आ गया हो।