कल उन्हें 'तानाशाह' पसंद था, अब विकेन्द्रीकरण का बहाना मारते हैं। कल एक आँख के बदले दो आँख की बात करते थे, अब सेना के शौर्य को 'फ़र्ज़ीकल' स्ट्राइक बताते हैं
“ये महागठबंधन एक अनोखा बंधन है। ये बंधन नामदारों का बंधन है। ये बंधन भाई-भतीजावाद का बंधन है। ये बंधन भ्रष्टाचार और घोटालों का बंधन है। ये बंधन नकारत्मकता का बंधन है।"
कोलकाता की 'ममता'मयी महफ़िल। बड़े-बड़े धुरंधर। जमावड़ा था एक गिरोह का, 'चौकीदार' को हटाना ही जिनका परम लक्ष्य। केजरीजी को आया जोश और महफ़िल को लूटने की जल्दी में...
"जिस तरह से अच्छी फसल के लिए अच्छे बीज और बारिश की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही राजनीतिक ज़मीन को भी तैयार करना पड़ता है। ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत हो, यही जीतने का मंत्र है"