दोनों प्रतिबंधित चैनलों पर आरोप है कि दिल्ली दंगों के दौरान रिपोर्टिंग में किसी विशेष समुदाय के पूजा स्थल पर हमले की खबर दिखाई गई है और उस पर एक समुदाय का पक्ष लिया गया। केंद्र सरकार ने अपने आदेश में कहा कि चैनलों ने दिल्ली हिंसा में पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की थी।
एक चैनल की टीम आज प्रदर्शन को कवर करने पहुॅंची। वहॉं करीब 19 औरतें ही थीं। कमजोर होते प्रदर्शन की सच्चाई छिपाने के लिए औरतों ने हूटर बजाया तो कुछ मर्द वहॉं पहुॅंचे। उन्होंने डराने के लिए महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी भी की।
पाकिस्तान, ईराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना लगभग 5 लाख निर्दोष मुस्लिम नागरिकों की हत्या कर चुकी है। लेकिन वहाँ की मीडिया को अत्याचारी दिखते हैं हिन्दू राष्ट्रवादी!
जानकारी न हो तो ठगने में आसानी रहती है। ये गणित तीन पार्टी वाले चुनाव तक चलता है, मगर कई पार्टियों के बीच होने वाले चुनावों में नहीं, ऐसा बताए बिना अगर विश्लेषण सुनाए जाएँ तभी तो लोग देखेंगे-सुनेंगे! अगर पता हो कि इसके नाकाम होने की ही संभावना ज्यादा है तो भला न्यूज़ बेचने वाले पर भरोसा कौन करेगा?
खबर है कि प्रदर्शनकारियों का एक गुट सड़क का एक हिस्सा खोले जाने के पक्ष में है। दूसरा इसका विरोध कर रहा। मतभेद उभरने के बाद एक-दूसरे पर स्टेज से चप्पलें फेंकी जाने की भी सूचना है।
इसमें गौर करने वाली बात यह है कि शख्स ने अपनी आईडी से एजाज़ ख़ान और भीम आर्मी का शेर जैसे पेजों को लाईक किया हुआ है। और, ताज़ा समाचार मिलने तक वो ID डिलीट कर दी गई है, और नई सामने आ गई।
"तवायफ के बच्चे की हिम्मत कैसे हुई औरतों और बच्चों के बारे में बोलने की।" - जब शोएब जमई ने यह कहा तो वीडियो में देखा जा सकता है कि इन शब्दों को सुनने के बाद अर्नब गोस्वामी काफी नाराज हो गए। उन्होंने तुरंत जमई को डिबेट से हटाने की माँग की और...
प्रदीप भंडारी रिपब्लिक टीवी के शो ‘ललकार’ को होस्ट कर रहे थे। इस दौरान जैसे ही उन्होंने इमाम को देशद्रोही और देश के लिए खतरा बताया, एक पैनलिस्ट पहले तो जोर-जोर से चिल्लाने लगा और फिर उनके साथ बदसलूकी भी की।
जो गोरखनाथ मंदिर को लेकर झूठ फैलाती है। जो आज़म ख़ान के महिलाविरोधी बयान का बचाव करती है। जो 'जय श्री राम' से नफरत करती है और 'ला इलाहा' का महिमामंडन करती है। जो हलाला का विरोध करने वालों से लड़ाई करती है। वो 'द वायर' की आरफा खानम शेरवानी है।