सोनिया गाँधी ने कहा कि मैं दुखी हूँ लेकिन वो मेरे सहयोगी हैं। जो हुआ सो हुआ, हमें साथ में काम करना चाहिए। पत्र लिखने वालों के खिलाफ मेरे मन में कोई दुर्भावना नहीं है।
सोनिया गॉंधी ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। राहुल फिर से जिम्मेदारी सॅंभालने को तैयार नहीं हैं। पर कॉन्ग्रेसियों को अध्यक्ष गॉंधी ही चाहिए। सुबह से चल रहा है ड्रामा।
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से जब भी पर्दा उठेगा तो गाँधी ही निकलेंगे। या तो कुर्सी पर बैठा गाँधी या फिर पर्दे के पीछे से कुर्सी को नचाता गाँधी। 'गैर गॉंधी अध्यक्ष' महज जुमला है।
कॉन्ग्रेस ने हाल ही में फेसबुक और भाजपा के बीच सॉंठगॉंठ के आरोप लगाए थे। पर मनीष तिवारी के एक पत्र से पता चलता है कि अमेरिका में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बकायदा लॉबी बना रखी है।
गुप्त सूत्रों से यह खबर भी आ रही है कि पिरंका जी अब अपनी बात से मुकर रही हैं क्योंकि रात में उन्हें माताजी का एक वीडियो कॉल आया और उन्होंने कहा, “अे कीया कार डीया बेटी! असा नेही केना ठा।”