कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी को 'ग़लत डेटा' उपलब्ध कराने के लिए प्रवीण चक्रवर्ती को दोषी ठहराया था। पार्टी का मानना है कि ग़लत डेटा की वजह से ही उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 में हार का सामना करना पड़ा। कॉन्ग्रेस ने संदेह जताया कि प्रवीण चक्रवर्ती मोदी सरकार का गुप्तचर था।
इससे पहले मई में वायनाड के कर्ज में डूबे 53 वर्षीय किसान दिनेश कुमार ने जहरीला पदार्थ खाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। दिनेश ने तीन बैंकों से 10 लाख रुपए का कर्ज लिया था और बैंक वसूली के लिए उस पर दबाव बना रहे थे। इससे आजिज आकर उसने आत्महत्या कर ली थी।
संसद में सीटों का आवंटन लोकसभा संचालन की प्रक्रिया और आचरण के नियम 4 के तहत सदन के अध्यक्ष करते हैं। नियम यह भी कहते हैं कि सीटों के आवंटन में अध्यक्ष अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। हर पंक्ति में पांच या उससे अधिक सदस्यों वाले पार्टी को सीट आवंटित करने का एक फॉर्मूला है।
जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस संगठन में उन्होंने पूरा जीवन लगाया, उसकी स्थिति देख कर पीड़ा होती है। उन्होंने कहा कि हार के कारण पार्टी के भीतर हैं, न कि बाहर। उन्होंने कहा है कि पार्टी में कई ऐसी बातें हुईं, जिससे वो सहमत नहीं थे और उन्होंने इससे पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया था।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राहुल ने सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया था। लेकिन, लोकसभा चुनाव में वे अपनी गुना सीट भी नहीं बचा पाए। उन्हें बीजेपी के केपी यादव ने 1,25,549 मतों से हराया था।
अभिषेक मनु सिंघवी ने आरफा पर आक्षेप करते हुए जवाब दिया है। सिंघवी ने जोर देकर कहा कि उनके जैसे प्रभावशाली लोगों के प्रत्यावर्ती और पुरातन (पुराने)आदर्शों का समर्थन करने की वजह से ही देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पिछड़ी बनी रहेगी।
"जिस देश में गाँधी विचारधारा का नेतृत्व करने वाले नेता को लोग अनसुना एवं अनदेखा कर दें, उस देश में जीने का कोई मतलब नहीं रह जाता है। मुझे देश की न्याय प्रणाली पर विश्वास है और इच्छा मृत्यु की अनुमति चाहिए।"
आरएसएस से जुड़ा मानहानि का यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से संबंधित है। राहुल गाँधी ने 2017 में गौरी लंकेश की हत्या को RSS की विचारधारा से जुड़ा और प्रभावित बताया था। इसी मामले में उन पर यह केस दर्ज हुआ था।
इस बार जिस दृढ़निश्चय के साथ राहुल गाँधी अपने इस्तीफे के फैसले पर अड़े हुए हैं, उससे भाजपा और तमाम गाँधी परिवारविरोधी शक्तियों में निराशा की लहर छाई हुई है।
"अगर वित्तीय संसाधनों पर किसी पार्टी विशेष का एकछत्र कब्ज़ा हो तो कोई चुनाव निष्पक्ष हो ही नहीं सकता। अब भारत में सभी सरकारी संगठन न्यूट्रल नहीं रहे हैं और हमारी लड़ाई सबके ख़िलाफ़ थी। RSS सभी संगठनों पर कब्ज़ा करने में सफल हो गया है।"