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Ravish Kumar

‘पूरा भारत मेरे बाप की मिल्कियत’ और ‘जब तक इस्लाम कबूल नहीं, शादी नहीं’ – वो जो रहे पूरे साल कुख्यात

2020 की मुश्किल सिर्फ महामारी की वजह से नहीं थी बल्कि कई धुरंधरों की वजह से भी थी। ये जमात जब-जब बल्लेबाजी करने उतरी, तब-तब...

S02E07: 2015 में मंडी के खिलाफ, ’20 में वही सही है बकैत? | Ravish u-turns on mandi, adhatiyas

अप्रैल 2015 में मंडी, आढ़तिया किसान के शोषक थे, अब पोषक हैं! जेनरेटर चुराने वाले किसानों पर चुप... 1500 टावर को क्षति पहुँचाने वालों पर चुप...

आढ़ती को हटा दें तो बहुत सी समस्या खत्म हो जाएगी: रवीश ने पाँच साल पहले ये ज्ञान दिया था, अब पलटदास काहे बन...

यही रवीश कुमार साल 2015 में इन किसानों की हालात पर चिंता जताते हुए बता चुके थे कि मंडियों में किसान आढ़ती के चंगुल में फँसा हुआ है, जहाँ उन्हें गुलाम बनाया जा रहा है।

S02E06: बकैत कुमार मुहल्ले का चुगलखोर लौंडा है | Ajeet Bharti mocks Ravish’s propaganda on farmers

फेक न्यूज़ पर माफ़ी कब माँगेगा रवीश? किसान आंदोलन पर चुगलखोरी और प्रोपेगंडा कब बंद होगा?

OpIndia ने 703 दिन पहले ही बता दिया था फर्जी: जयराम ने माँगी माफी, रवीश कुमार कब माँगेंगे

रवीश ने लिखा था- "डी-कंपनी का अभी तक दाऊद का गैंग ही होता था। भारत में एक और डी कंपनी आ गई है..."

‘…उन्हें भी माओवादी बता देंगे’ – ₹430 करोड़ की लूट को जायज बता रहा रवीश, जबकि पकड़ाया वामपंथी

रवीश ने अपने वीडियो में दावा किया कि आईफ़ोन निर्माता कम्पनी विस्ट्रोन में की गई तोड़फोड़ वहाँ काम कर रहे कर्मचारियों द्वारा सैलरी न मिलने के कारण की गई थी।

अप्रिय रवीश कुमार! एक ‘शांतिपूर्ण आंदोलन’ 53 लोगों की जान ले चुका है, अभी कितने बाकी हैं?

व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के कुलपति रवीश कुमार ने अपने नए प्राइम टाइम वीडियो में आरोप लगाया है कि किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बदनाम किया जा रहा है।

25 सितंबर को झुठलाई गई खबर के बाद भी रवीश ने लगातार अडानी को ले कर फैलाया फेक न्यूज

रवीश कुमार ने कथित किसान आन्दोलन के बीच एक बार फिर अम्बानी-अडानी का जिक्र लाकर बहस को नई दिशा दी है। उनके दावे व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के दावों से भिन्न नहीं हैं।

S02E05: किसान आंदोलन पर 14 दिन से बकैती | Ravish Kumar’s continuous propaganda on farmer protest

लगातार दो सप्ताह से बकैत रवीश कुमार ने वैसा ही प्रपंच फैलाना जारी रखा है जैसे वो शाहीन बाग के समय कर रहा था।

कानपुर लव जिहाद SIT रिपोर्ट: आखिर वामपंथियों को 14 साल की बच्चियों का समुदाय विशेष वालों द्वारा गैंगरेप क्यों नॉर्मल लगता है?

बात यह है कि हर मामले में खास मजहब का लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?

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