गुप्त सूत्रों ने बताया है कि अब से विमल गुटखा अपने विज्ञापनों में 'जुबाँ हरी हरी' कहेंगे। साथ ही, राजस्थानियों का 'केसरिया बालम' अब 'हरिया बालम' या 'करिया बालम' के नाम से पधारने को कहा जाएगा। नारंगी के फलों को पकने से पहले ही तोड़ लिया जाएगा ताकि वो बाहर से हरे और भीतर से सफेद ही दिखें और देश की सेकुलर फैब्रिक टाइट बनी रहे।
रणदीप सुरजेवाला ने आज कहा है कि दुनिया की कोई भी ताकत राहुल गाँधी से अध्यक्ष का पद नहीं छीन सकती है। इसके बाद यूनेस्को ने भी संकेत दिए हैं कि वो भी राहुल गाँधी को सदी का बेस्ट अध्यक्ष का खिताब देने पर विचार कर रहे हैं।
शौक़ बहराइची का एक लोकप्रिय शेर है - "बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था, हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा।" चुनाव आएँगे-जाएँगे, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इस शेर को हमेशा ही प्रासंगिक बनाए रखा है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि भारी मात्रा में लोगों की उपस्थिति में 8000 लोगों के 16,000 कान देखकर कुणाल कामरा की आँखें छलक पड़ीं और ध्रुव राठी के गले लग कर रो पड़े जिससे राठी की टी-शर्ट भींग गई। राठी जी को पंचर लगाने का काम मिला है।
सोशल मीडिया पर अचानक से जेसीबी की खुदाई ट्रेंड करता देख अरविन्द केजरीवाल के रोंगटे खड़े हो गए। जैसे ही उन्होंने सबसे हैंडसम व्यक्ति मनीष सिसोदिया से इस पूरे जेसीबी मामले की जानकारी माँगी, उन्हें पता चला कि मनीष सिसोदिया भी खुद निकटस्थ जेसीबी की खुदाई देखने निकल चुके हैं।
एग्जिट पोल के दिन से ही नरेंद्र मोदी की यात्रा और गुफा वाली तस्वीरों को छोड़कर इस संक्रामक मीडिया गिरोह की एक टुटपुँजिया टुकड़ी को गोभी के पत्तों में कीड़े होने की जाँच करते हुए देखा गया है।
तमाम EVM हैकिंग से लेकर डर के माहौल के बीच अन्य कई प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों के अरमानों का शीघ्रपतन देखने को मिला है। इस प्रकार बड़े ही दुःख के साथ यह सूचित करना पड़ रहा है कि देश ने एकसाथ आज लगभग 22 प्रधानमंत्री खो दिए हैं।
राहुल गाँधी के होते हुए भी कॉन्ग्रेस को सस्ते कॉमेडियंस आउटसोर्स करने पड़े ये बात चौंका देने वाली थी। गोदी मीडिया ने जब राहुल गाँधी से इस बारे में सवाल किया, तो उनका जवाब था, “देखिए भाई साहब, मैं फ्रेंक्ली कहता हूँ, आप लिख के ले लीजिए, मैं कॉमेडियंस के साथ पूरा न्याय करूँगा।
ऐसे नेताओं को ईवीएम का नट-बोल्ट खोलने के लिए पेचकस और पिलास दे देना चाहिए ताकि वे वोट देने के बाद ईवीएम को खोलें और अंदर झाँक कर देख सकें कि आख़िर उनका वोट गया कहाँ, किस पार्टी को गया? ये नेता वोट देने के बाद ईवीएम को खोलेंगे, झाँक कर देख लेंगे कि उनका वोट इच्छित पार्टी को गया है या नहीं और फिर उसे वापस पेचकस से कस सकते हैं।