इस बीमारी में ऐसा नहीं होता कि मरीज दिन या रात को सोए बल्कि सेकंडरी या एक्सिस हायपरसोम्निया का मरीज कई-कई दिनों तक सोता ही रहता है, जैसा कि पुरखाराम के मामले में दिखाई दिया।
"आज एग्रिकल्चर से एस्ट्रॉनॉमी तक, आपदा प्रबंधन से रक्षा तकनीक तक, वैक्सीन से वर्चुअल रियलिटी तक, बायोटेक्नोलॉजी से लेकर बैटरी टेक्नोलॉजीज तक, देश हर दिशा में आत्मनिर्भर और सशक्त बनना चाहता है।"