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Science and Technology

इंटरनेट एक्सप्लोरर Google Chrome डाउनलोड करने के लिए था बेस्ट: माइक्रोसॉफ्ट की बंद करने की घोषणा, बने Memes

गूगल का क्रोम ब्राउजर इंटरनेट सर्फिंग के बाजार का लगभग 65% हिस्सा कवर करता है। सफारी ब्राउजर एप्पल के कंप्यूटर्स और दूसरे डिवाइस में...

अंटार्कटिका में टूटा 170 KM लंबा, 25 KM चौड़ा दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड, क्या है खतरा, क्यों टूटा? जानिए

अंटार्कटिका महाद्वीप में दुनिया का का सबसे बड़ा हिमखंड टूटकर अलग हो गया है, करीब 170 किमी लंबे और 25 किमी चौड़ा

‘एलियंस ने 50 बार किया मेरा अपहरण, साबित करने के लिए हैं खरोंच के निशान’, ब्रिटिश महिला का हैरान करने वाला दावा

ब्रिटेन की एक महिला का दावा है कि एलियंस अब तक उसका 50 से अधिक बार अपहरण कर चुके हैं और अपने यूएफओ में भी ले जा चुके हैं

क्या है एप्पल का M1 प्रोसेसर, क्यों बदल जाएगा आपका लैपटॉप सदा के लिए पावर और परफॉर्मेंस दोनों में

M1 चिप में 16 बिलियन ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया गया है। एप्पल का कहना है कि उसने पहली बार एक चिप में इतने ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया है।

लॉकडाउन नहीं होता तो अब तक होती 26 लाख मौतें: 10 वैज्ञानिकों की कमिटी के अध्ययन में खुलासा

साथ ही इस रिसर्च पेपर में बताया गया है कि ठंडी के मौसम में ये वायरस कमजोर हो जाता है, अब तक किसी भी अध्ययन से ये साबित नहीं हो सका है।

इंग्लैंड के एक छोटे से गाँव से तय हुआ पूरी दुनिया का समय: GMT की शुरुआत से लेकर अब तक की कहानी

एक ऐसी इकाई जिससे दुनिया के समय का आकलन लागाया जाता है। इसे साल 1884 में ठीक आज ही मान्यता दी गई थी और 1972 तक यह 'अंतर्राष्ट्रीय सिविल टाइम' का मानक बन गया था।

‘वैज्ञानिकों ने पेशाब से बना लिए स्पेस ब्रिक्स’: यूरिया को यूरिन लिखने वाले NDTV को IISC प्रोफेसर ने लताड़ा

NDTV ने 'स्पेस ब्रिक्स' को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों को बदनाम करने के लिए और उनके प्रयासों पर मिट्टी डालने के लिए जानबूझ कर गलत सूचना शेयर की।

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: 400 Gb/s की इंटरनेट स्पीड, इस समुद्री केबल से बदलेगी अंडमान-निकोबार की तस्वीर

अंडमान-निकोबार में कनेक्टिविटी से वहाँ अनगिनत अवसर पैदा होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि 2300 KM पनडुब्बी केबल तय समय से पहले बिछा लिया गया।

12 प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों को बनाया बंधक: लैब में JNU के छात्रों की गुंडई, फोन व कागजात छीने

प्रोफेसर ने इस घटना को याद करते हुए कहा कि वो काफ़ी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस घटना ने उन्हें बुरी तरह डरा दिया है। वे सदमे में हैं।

वैज्ञानिकों ने सबूत के साथ साबित किया सरस्वती नदी का अस्तित्व: वैदिक ऋचाओं पर रिसर्च की मुहर

78,000 ईसापूर्व से लेकर 18,000 ईसापूर्व और 7000 ईसापूर्व से लेकर 2500 ईसापूर्व की समयावधि में सरस्वती नदी निरंतर बिना किसी रुकावट के बहा करती थी। इसके साथ ही ऋग्वेद की उन कई ऋचाओं पर भी मुहर लग गई है, जिनमें सरस्वती नदी का जिक्र है।

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