प्रोफेसर ने इस घटना को याद करते हुए कहा कि वो काफ़ी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस घटना ने उन्हें बुरी तरह डरा दिया है। वे सदमे में हैं।
78,000 ईसापूर्व से लेकर 18,000 ईसापूर्व और 7000 ईसापूर्व से लेकर 2500 ईसापूर्व की समयावधि में सरस्वती नदी निरंतर बिना किसी रुकावट के बहा करती थी। इसके साथ ही ऋग्वेद की उन कई ऋचाओं पर भी मुहर लग गई है, जिनमें सरस्वती नदी का जिक्र है।
पटना यूनिवर्सिटी में उनके लिए वो पागलपन था कि छात्र उन्हें छूने के लिए मारामारी करते थे। अमेरिका ने उन्हें 'जीनियसों का जीनियस' कहा था। जिसके निधन के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने शोक जताया, उनका पार्थिव शरीर 2 घंटे सड़क पर धूल फाँकता रहा। वशिष्ठ बाबू, काश आप भारत लौटते ही नहीं!
चंद्रयान-2 मिशन की 98% सफलता और केवल विक्रम लैंडर की लैंडिंग के अंतिम चरण की नाकामी को लेकर देश के कुछ कथित अति-बुद्धिजीवियों ने ISRO का मज़ाक बनाया था। लॉन्च से पहले पूजा, कथित तौर पर ज्योतिषीय रूप से शुभ घड़ी में लॉन्च करना आदि को टारगेट कर...
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारा दायित्व है कि विद्यार्थियों की शक्ति को 21वीं सदी के साइंटिफिक एनवायरनमेंट में सही माहौल में लेकर जाएँ। विज्ञान में फेलियर कुछ नहीं होता, सब कुछ प्रयत्न या प्रयोग होते हैं और फिर कामयाबी होती है। इसीलिए लम्बे मुनाफे का सोचना चाहिए।"
इसरो प्रमुख ने कहा, "आप सभी लोग चंद्रयान-2 मिशन के बारे में जानते हैं। तकनीकी पक्ष की बात करें तो यह सच है कि हम विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं करा पाए, लेकिन पूरा सिस्टम चाँद की सतह से 300 मीटर दूर तक पूरी तरह काम कर रहा था।"
"चंद्रमा की सतह पर विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई, यह स्पष्ट है। मगर लैंडर के बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। तस्वीरें शाम के अंधेरे में ली गईं हैं। बाकी तस्वीरें अक्टूबर में बेहतर प्रकाश की स्थिति में ली जाएँगी।”
परमाणु बम की तकनीक 'नकलचोरी' करने वाले कादिर खान को सर पर बिठाने वाले पाकिस्तान में असली वैज्ञानिकों की नाकद्री का अब्दुस सलाम से बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता। लेकिन उन्हें कभी भाव नहीं दिया गया, क्योंकि वे अहमदी थे, जिन्हें कट्टरपंथी 'सच्चा' नहीं मानते।