दिल्ली के बाद अब अरविन्द केजरीवाल की पैनी निगाहें पंजाब में लोकसभा चुनाव पर हैं और वहाँ के लिए प्रचार कर रहे है। इसी दौरान अरविंद केजरीवाल ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए बेहद मार्मिक बातें सामने रखी हैं।
वायरल हो रही इस पोस्ट में दावा किया गया है कि केजरीवाल वोट हासिल करने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। इसमें यह सन्देश दिया जा रहा है कि शीला दीक्षित ने केजरीवाल के बारे में ये कहा है कि ‘केजरीवाल वोट के लिए अपनी माँ तक को बेच सकते हैं’।
दिल्ली में एक सार्वजानिक मंच से बोलते हुए गुस्साए केजरीवाल ने कहा, "मैं बीजेपी वालों को भी चेतावनी देता हूँ, अपनी औकात में रहो। दिल्ली की जनता से पंगा मत लो वरना ये तुम्हारे घर में घुस कर इतनी जूते मारेंगे, इतने जूते मरेंगे, कि तुम्हारी शक्ल ही नहीं दिखेगी।"
कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का दावा करने वाली पार्टी के आज कैसे दिन आ गए हैं। जिसने सभी मर्यादा को ताक पर रख दिल्ली की जनता को ठगने का पूरा मॉड्यूल तैयार किया है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो चुकी हैं।
2014 से पहले के कई वीडियो का उपयोग करके, जब पीएम मोदी सत्ता में नहीं थे, कामरा जैसे 'नफरती चिंटू' ने देश में मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार और झूठ के प्रसार का ही काम किया है।
गौतम गंभीर ने लिखा है, "अगर वो ये साबित कर देते हैं कि उस पर्चे से मेरा कोई लेना-देना है, तो मैं जनता के बीच अपने आप को फाँसी लगा लूँगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो अरविंद केजरीवाल को राजनीति से संन्यास लेना होगा। क्या यह चुनौती स्वीकार है?"
कारण जो भी हो पर, लोकतंत्र में जनता अपने नेता से कितनी भी नाराज क्यों न हो, फिर भी इस तरह से शारीरिक हिंसा पर उतर आना घोर निंदनीय है। अगर कोई पार्टी वास्तव में इसे पब्लिसिटी या चंदे का साधन बना कर प्रयोग कर रही है तो ये भी लोकतान्त्रिक व्यस्था का मजाक बनाना ही है।
सूत्रों का तो ये भी कहना है कि जब भी केजरीवाल को कहीं पर थप्पड़ या घूँसा पड़ता है, तब-तब आम आदमी पार्टी के चंदों में व्यापक उछाल आता है। भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए महात्मा गाँधी ने अनशन का मार्ग चुना था और संत केजरीवाल ने मोदी के चंगुल से देश को छुड़ाने के लिए अगर अपनी कुटाई करवाने का मार्ग चुना है तो इसमें बुराई है क्या?
पार्टी कार्यकर्ताओं का कानून अपने हाथ में लेकर आक्रोशित युवक की पिटाई करना भी उतना ही निंदनीय है। ये घटना केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के सामने हुई इसलिए और भी निंदनीय है।
2015 के 20 बड़े वादे। 2019 में वास्तविकता की पड़ताल करने पर हमें मिली वादाख़िलाफ़ी की 20 दास्तान। क्या कहा, क्या किया और कैसे पलट गए केजरीवाल! PPRC की रिसर्च रिपोर्ट की प्रमुख बातें, अन्य मीडिया रिपोर्टों के सबूत के साथ। लोकपाल बिल से लेकर पानी, बिजली और शिक्षा तक, सब कुछ।