शिक़ायत में फ़िल्म हेलारों के निर्देशक अभिषेक शाह, निर्माता आशीष सी पटेल, नीरव सी पटेल, आयुष पटेल, मीट जानी के साथ-साथ संवाद लेखक सौम्या जोशी और संपादक प्रतीक गुप्ता के ख़िलाफ़ सरकार द्वारा कथित रूप से 'समुदाय का अपमान करने और भावनाओं को आहत करने' से प्रतिबंधित 'शब्द' का उपयोग करने के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने की माँग की गई है।
इस कानून की खासियत यह है कि टैप की हुई टेलीफोन बातचीत को अब एक वैध सबूत माना जाएगा। इससे शराब की तस्करी, फिरौती, जालसाजी जैसे संगठित अपराधों पर शिकंजा कसने की उम्मीद है।
गुजरात दंगों में कई ऐसे लोगों को फँसाया गया, जो बाद में निर्दोष साबित हुए। लेकिन तब तक उनकी ज़िंदगी, उनका परिवार और करियर- सब तबाह हो चुका था। शशिकांत को निजी खुन्नस में फॅंसाया गया और बाद में हर्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।
गुजरात एटीएस के उप महानिदेशक हिमांशु शुक्ल ने मीडिया को बताया कि पैसे खत्म हो गए तो रिश्तेदारों को फ़ोन कर पैसे के लिए सम्पर्क किया, लेकिन पुलिस के डर से किसी ने उनके खाते में पैसे नहीं डाले।
मोईनुद्दीन और अशफाक दोनों ही सूरत के रहने वाले थे और अपने साथ लाया हुआ पैसा खत्म हो जाने के बाद परिवार और दोस्तों से आर्थिक सहायता लेने की कोशिश कर रहे थे। गुजरात पुलिस के एटीएस ने गुजरात-राजस्थान बॉर्डर पर गिरफ्तार कर लिया और लखनऊ पुलिस ने दोनों को सीजेएम की अदालत में पेश किया।
गुजरात पुलिस और योगी की पुलिस को शक की नज़र से देखने वाले यह भी कह सकते हैं कि सबूत मैन्युफैक्चर्ड है। ऐसे लोगों के लिए राँची के काँके में बिरसा मुंडा के नाम पर एक अस्पताल है। वहाँ अच्छी व्यवस्था है।
उजबेकिस्तान में एक शहर है - अंदीजान। यहीं पर भारत में मुगल शासन की नींव रखने वाले बाबर का जन्म हुआ था। अब यहीं लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। और इसी शहर में भारत के पहले गृहमंत्री पटेल के नाम पर एक सड़क का नामकरण भी किया गया है।
अयूब मंसूरी ने बताया है कि वह बीवी को किस करने के दौरान काफ़ी उत्तेजित हो गया था और उत्तेजना के दौरान दोनों की जीभ एक-दूसरे से चिपक गई थी। पुलिस को आशंका है कि वो बरगलाने के लिए ऐसा बोल रहा है।
"हमें दुख इस बात का था कि बड़ों की आज्ञा के बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते। हम उब गये। हमने आत्महत्या करने का फैसला कर किया। पर आत्महत्या कैसे करें? जहर कौन दे? हमने सुना कि धतूरे के बीज खाने से मृत्यु हो जाती है....."
लड़के के पिता लीलाभाई ने बताया कि वो 4 वर्ष पूर्व नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने अपनी सारी जमा पूँजी बेटे को उच्च शिक्षा देने में खर्च कर दी। उन्हें अपने बच्चे से बड़ी उम्मीद थी कि वो बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेगा, लेकिन उसने 4 साल पहले संन्यास ले लिया और उन्हें अकेला छोड़ दिया।