बांद्रा ईस्ट इलाके में स्थित ये जमीन साल 1983 में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को मिली थी। जिसे बाद में व्यावसायिक भूमि में तब्दील कर दिया गया। साल 2017 के हिसाब से इसकी कीमत 262 करोड़ रुपए होती है।
दिल्ली के पॉश इलाके सुखदेव विहार स्थित इस मकान को 10 करोड़ रुपए में खरीदा गया था। जिसमें से 4.43 करोड़ वाड्रा की कंपनी ने दिए थे। ईडी ने आरोप लगाया कि इस मकान का बीकानेर जमीन घोटाले वाले अपराध को अंजाम देने में सीधा संबंध है।
भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह से शिकायत करते हुए कहा था कि फॉंसी घर की जमीन सांसद आजम खान के रिश्तेददारों और करीबियों के कब्जे में है। जॉंच में जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर कर उसे बेचे जाने की बात सामने आई है।
पुलिस उपायुक्त चेतन सिंह राठौर ने कहा, "हमने दोनों पक्षों से ज़मीन के मालिकाना हक़ से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने को कहा है। दस्तावेज़ बताते हैं कि वर्ष 1860 के दौरान ब्रिटिश शासन में इस सार्वजनिक संपत्ति के मालिक मैसूरु के वोडेयार शासक थे।"