प्रदर्शनकारी गैलरी में बनी काँच की दीवार से सटकर खड़े थे और इनकी पीठ सांसदों की तरफ थी। इनकी छाती पर 'सबकी जिंदगी के लिए' (For All Life) जैसे नारे लिखे थे।
भाई और पत्नी के निधन के बाद विश्वेश्वर के लिए उनका दुख भूल पाना मुश्किल था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वो मौत का दुख सहने के लिए पौधे लगाने लगे। अंतिम सांस लेने तक उन्होंने पर्यावरण को सुरक्षित करना अपना ज़िम्मा समझा