'द केरला स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड' को प्रोपेगेंडा करने वालों को जवाब देने के लिए फिल्म मेकर ने एक ऐसा मंच सजाया, जिस पर देश भर से आई पीड़िताओं ने अपनी दर्दभरी दास्ताँ सुनाई।
कव्वाली 'न तो कारवाँ की तलाश है, न तो हमसफर की तलाश है' का सबसे प्रसिद्ध और प्रामाणिक पहली फिल्मी रिकॉर्डिंग 1960 की हिंदी फिल्म 'बरसात की रात' से मिलती है।