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एक मुखिया जिसने पंचायत की शक्ल बदल दी, जिन्हें विधानसभा में होना चाहिए: मिलिए मंदाकिनी चौधरी से

सरकारी नौकरी छोड़कर शुरू-शुरू में जब उन्होंने अपनी शिक्षा का सदुपयोग नीचे तबके वाले लोगों के उत्थान हेतु करना चाहा तो उनका बहुत मजाक बना। लेकिन धीरे-धीरे वह आगे बढ़ीं और उनके साथ सैंकड़ों लोगों का कारवां जुड़ता गया।

बिहार के हरलाखी विधानसभा क्षेत्र से इस बार एक निर्दलीय उम्मीदवार का नाम मंदाकिनी चौधरी है। मंदाकिनी बिलकुल वैसी हैं, जैसे राजनीति में एक सशक्त नेत्री को होना चाहिए। उनका काम एक मुखिया के रूप में जमीन पर नजर आता है। उनकी बातें लक्ष्यहीन या हवा-हवाई किस्म की नहीं हैं। अपने विजन को चरितार्थ करने के लिए उन्हें क्या करना है और किन भूलों को सुधारना है, यह सब वह अच्छे से जानती हैं।

सरकारी नौकरी छोड़कर गाँव को कर्मभूमि के रूप में चुनने वाली मंदाकिनी ने लंबे समय से स्थानीय लोगों के बीच अपनी जगह बनाई हुई है। शुरू-शुरू में जब उन्होंने अपनी शिक्षा का सदुपयोग गाँव आकर अपने नीचे तबके वाले लोगों के उत्थान हेतु करना चाहा तो उनका बहुत मजाक बना, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य तय कर रखा था। धीरे-धीरे वह आगे बढ़ीं और उनके साथ सैंकड़ों लोगों का कारवां जुड़ता गया। आज हरलाखी विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद मंदाकिनी के काम की चर्चा हर ओर है।

मंदाकिनी चौधरी से बातचीत का पूरा वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें।

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अजीत झा
अजीत झा
संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

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