प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2025 को अपना 75वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपना पूरी जीवन राष्ट्र को समर्पित किया है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते देश ने कई बदलाव देखे हैं। पिछले 10 साल में उनकी सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया। इसके साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने से लेकर हाशिए पर पड़े SC-ST समुदायों को सशक्त बनाने का काम किया है। मध्यम वर्गीय के लोगों और महिलाओं को बराबर का हक देने के लिए मोदी सरकार ने विशेष योजनाएँ चलाई हैं।
देश की मजबूत आंतरिक सुरक्षा
किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा के दो कंपोनेंट होते हैं। External Security और Internal Security। एक्सटर्नल सिक्योरिटी का जिम्मा तो सेनाओं के पास होता है और उसे सेना अच्छे से संभाल भी लेती हैं। लेकिन कोई भी राष्ट्र कितना मजबूत होगा या कितना कमजोर होगा यह इसकी इंटरनल सिक्योरिटी पर निर्भर करता है। भारत तो अपने आप में इस बात का उदाहरण है कि जब-जब हमारे यहाँ आंतरिक सुरक्षा कमजोर हुई है तब-तब यह राष्ट्र टूटा है।
2014 से पहले- घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही मिलता था धमाका
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मोदी सरकार में बदली स्थिति, 11 साल में नहीं हुआ कोई जिहादी हमला@pandeypuraan से जानिए, कैसे PM Modi@75 ने बदली आंतरिक सुरक्षा की तस्वीर pic.twitter.com/nda0IAdBhZ
यदि बीते एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आंतरिक सुरक्षा की बात की जाए तो हमें यह देखने को मिलता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 10 वर्षों में strong internal security system तैयार किया है।
Strong system इसलिए, क्योंकि 2014 से पहले का भी एक समय था जब आए दिन देश के अलग-अलग स्थानों पर बम धमाके होते थे, जिसमें सैकड़ो नागरिक अपनी जान गवाते थे।दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सुबह दफ्तर के लिए निकलने वाला आदमी सोचता था कि मैं वापस जीवित पहुँचूँगा या नहीं।
साल 2005 में दीपावली के समय दिल्ली में हुए ब्लास्ट, 2006 में मुंबई लोकल ट्रेन में हुए ब्लास्ट, 2008 में जयपुर शहर में हुए ब्लास्ट या फिर 26/11 का हमला, ये सारी घटनाएँ कमजोर हो चुकी internal security का ही example थी।
लेकिन आज विगत 10 वर्षों में देश किसी भी बड़े आतंकवादी हमले का शिकार नहीं हुआ है। पहले की तरह आज सड़कों पर धमाके नहीं होते। इम्प्रूवमेंट सिर्फ आतंक के मोर्चे पर ही नहीं बल्कि वामपंथी आतंकियों से निपटने में हुई है।
जिन नक्सलियों ने सरकार और नागरिकों की नाक में दम कर रखा था उन नक्सलियों को भी eliminate किया जा रहा है। बीते 2 वर्षों में 500 से भी ज्यादा नक्सलियों को हमारे जवानों ने मार गिराया है और जल्द ही 31 मार्च 2026 एक भारत पूर्ण रूप से नक्सल मुक्त भी हो जाएगा।
चाहे नक्सली क्षेत्र हो या फिर कश्मीर का अशांत क्षेत्र हो सरकार के प्रयासों से इन सभी क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है।
Vibrant village program के तहत देशभर के सीमावर्ती इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाना या फिर पिछले 10 वर्षों में नॉर्थ ईस्ट में 14 लाख करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बात हो। सरकार भारत के हर vulnerable areas को विकास के मुख्य धारा से जोड़कर आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत का पुनरुद्धार
दिनकर ने कहा था कि रोटी के बाद इंसान की सबसे कीमती चीज उसकी संस्कृति होती है। इसलिए संस्कृति की रक्षा हर सभ्यता का दायित्व है।
विगत 10 वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जिस तरह से कल्चरल हेरिटेज को संरक्षित करने और उसको बढ़ावा देने में ध्यान दिया है, वह incredible है। खुद को माँ गंगा का बेटा कहने वाले प्रधानमंत्री ने नमामि गंगे के माध्यम से गंगा के नवीनीकरण का प्रयास किया है।
अपने मंदिरों के लिए विख्यात भारत भूमि में आज World class Kashi Vishwanath Corridor और उज्जैन कॉरिडोर के निर्माण के साथ-साथ सोमनाथ मंदिर का नवीनीकरण भी हो चुका है। इन सबसे इतर पाँच शताब्दियों की लड़ाई को खत्म करते हुए अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण भी किया गया।
वॉर मेमोरियल से लेकर नमामि गंगे तक, सोमनाथ से लेकर राम मंदिर तक
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मोदी सरकार में सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर जोर@pandeypuraan से जानिए, कैसे PM #Modi@75 के सेवाकाल में विरासत बचाने पर है जोर pic.twitter.com/WFLq8DNQKL
मंदिर और भूमि के अलावा हमारे पूर्वज भी हमारी संस्कृति और हमारे विरासत के प्रतीक होते हैं। पूर्वजों की विरासत को संरक्षित रखने के लिए भी मोदी सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं।
केदारनाथ धाम में जगतगुरु आदि शंकराचार्य की मूर्ति और गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति का स्थापित होना इन्हीं प्रयासों का परिणाम है। इसके अलावा जिन रणबांकुरो ने इस देश के लिए बलिदान दिया, उनकी स्मृति को जीवित रखने के लिए वर्षों से लंबित National War Memorial और National Police Memorial की भी स्थापना की गई।
संस्कृति के हर aspect को cover करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से सरकार काम कर रही है, उसे देखते हुए यदि इस दौर को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा।
SC और ST समुदाय के लिए सरकार की योजनाएँ
विकास का अर्थ सिर्फ यह नहीं होता की GDP के आँकड़े बदल जाए या चमकती मेट्रो और चमकते हाइवे दिखने लगें। असली विकास तब दिखता है, जब समाज के वंचित वर्गों तक सरकार की पहुँच हो।
विगत 10 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इसी approach के साथ काम करते हुए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के लिए अनेक प्रयास किए हैं ताकि उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाया जा सके।
आज प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल में लगभग 60% मंत्री SC/ST या OBC समुदाय से आते हैं। राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के अलावा आर्थिक रूप से इन्हें सशक्त करने के लिए भी कई योजनाएँ शुरू की गई हैं।
सिर्फ चमकती मेट्रो-हाइवे नहीं विकास की तस्वीर… वंचितों का उत्थान है असल मकसद
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स्टैंडअप योजना से लेकर गरीब कल्याण अन्न योजना तक, SC-ST उत्थान है मोदी सरकार का लक्ष्य @pandeypuraan से जानिए, PM Modi@75 में गरीबों के उत्थान पर कितना हुआ काम pic.twitter.com/XWk7RBqjEA
Stand Up योजना के तहत SC और ST को खुद का रोजगार शुरू करने के लिए अब तक 7,351 करोड़ से भी ज्यादा का लोन बैंक द्वारा दिया जा चुका है। इसके अलावा देश के 80 करोड़ लोग जिस गरीब कल्याण अन्य योजना के तहत राशन प्राप्त कर रहे हैं उसमें भी सबसे बड़ा तबका SCs और STs का ही है।
आयुष्मान भारत योजना, जिसके तहत हर साल ₹5,00,000 तक का हेल्थ कवरेज प्रदान किया जाता है, उसके अंतर्गत अब तक 34 करोड़ आयुष्मान कार्ड जो बने हैं, उसमें भी बड़ी संख्या SC और ST समुदाय की है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो चाहे स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय बनवाना हो, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर देना हो या फिर सौभाग्य योजना के तहत हर घर बिजली पहुँचाना हो। सरकार की सारी योजनाओं का सीधा फायदा समाज के वंचित वर्गो तक यानी SC और STs तक ही पहुँच रहा है।
मध्यम वर्ग को बेहतर सुविधाएँ
आम आदमी के साधारण जीवन को और आसान करना हो, चाहे 12 lakh तक की इनकम में टैक्स में छूट देना हो, घर खरीदना अफोर्डेबल बनाना हो, मेडिकल सेवाएँ या भारत को ग्लोबली डिजिटल करना हो कुछ 10 सालों में इसमें बदलाव साफ दिखाई देता है।
मिडल क्लास चाहे रूरल एरिया या अर्बन एरिया का, उनके जीवन में मोदी सरकार बड़े बदलाव लाई है। चाहे हाल ही में दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर से GST (photo sent inbox) को घटाना हो। ज्यादातर गाड़ियों को 18% वाले रेट में लाना हो या फिर बजट में इनकम टैक्स का स्लैब 12 लाख पहुँचाना।
इसके अलावा 2019 में Special Window for Affordable and Mid-Income Housing यानी SWAMIH फंड लॉन्च किया गया, जिसके माध्यम से रुके हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए ₹25,000 करोड़ की मदद दी गई।
PM आवास योजना के अंतर्गत 3 करोड़ से अधिक घर बनाए गए , जिससे रूरल और अर्बन दोनों एरिया में परिवारों को पक्की छत्त मिली है। इंटरनेट डेटा की कीमतें भी 97% तक घट गईं, जिससे ऑनलाइन शिक्षा, काम और सेवाएँ हर वर्ग तक पहुँचीं।
भारतनेट के जरिए 1.93 लाख ग्राम पंचायतें ऑप्टिक फाइबर से जुड़ चुकी हैं। Health facilities में आयुष्मान भारत के तहत 22.62 करोड़ हेल्थ कार्ड बनाए गए हैं, जिससे 40% भारतीयों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है।
यात्रा और कनेक्टिविटी के लिए Ude Desh ka Aam Naagrik यानी udan,योजना से 1.16 करोड़ लोग हवाई यात्रा afford कर पाए। वंदे भारत मिशन के तहत 2.17 लाख उड़ानों से लगभग 3 करोड़ लोगों को सुरक्षित घर लाया गया।
यानि मोदी सरकार में फोकस देश के उस मिडिल क्लास पर भी है, जिसकी कोई संगठित आवाज नहीं है, जो प्रदर्शनों के लिए सड़क पर तो नहीं उतरता लेकिन चाहे टैक्स में contribution हो या फिर देश में कंसम्पशन को बढ़ावा देना, वो अपना साइलेंट कॉन्ट्रिब्यूशन करता रहता है।
समाज में महिलाओं को बराबरी का सम्मान
“I measure the progress of a community by the degree of progress which have achieved”- ये डॉक्टर भीम राव अंबेडकर ने कहा था।
इसका अर्थ है- “किसी भी समाज की तरक्की ऐसे देखी जाति है की उस समाज की महिलाएँ शिक्षा, काम और अधिकार में कितनी आगे बढ़ी हैं।”
आज भारत में महिलाएँ रोज एक इतिहास रच रही हैं, जहाँ कभी बच्चे का जेंडर पता लगाकर भ्रूणहत्या के मामले सुनने को मिलते थे, वहीं आज की तारीख में NFHS-5 की report ये साफ बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में महिला स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर जमीनी स्तर पर सुधार हुआ है।
महिलाओं की paid maternity leave 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर देना। जन औषधि केंद्रों पर ₹1 में पेड मिल रहे हैं, जिससे महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी परेशानियों से राहत मिली है। 3.18 करोड़ बेटियों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने ले लिए सुकन्या समृद्धि खाते खोले गए हैं।
धुएँ वाले चूल्हों से होने वाली साँस की बीमारियों से महिलाओं को राहत मिली। सबसे बड़ी सौगात प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 9.6 करोड़ घरों को LPG कनेक्शन दिए गए हैं।
इसी तरह महिलाओं के स्वच्छ भारत मिशन से 11.72 करोड़ शौचालय बनाए गए हैं। इससे महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वास्थ्य तीनों में सुधार हुआ है। सौभाग्य योजना से 2.86 करोड़ बिजली कनेक्शन दिए गए हैं, जिससे केरोसिन के लैम्प इतिहास हो गए।
चाहे संसद में महिलाओं को 33% reservation देना हो या ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर एक्शन लेना, लखपति दीदी योजना या फिर सेल्फ हेल्प ग्रुप को लोकल से ग्लोबल करना महिलाओं को और उनकी समस्याओं को prioritize किया गया है। वो महिला भले ही किसी बड़े घर से हो या किसी सुदूर इलाके से या आदिवासी तबके से.. महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिला है।


