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‘वंदे मातरम’ पर PM का भाषण नहीं था तथ्यहीन, MK गाँधी ने किया था ‘राष्ट्र गीत’ का समर्थन: इरफान हबीब और द वायर के वेणु इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने में जुटे, पढ़ें सच्चाई

विवादित इतिहासकार एस इरफान हबीब ने दावा किया कि सोमवार (8 दिसंबर 2025) को लोकसभा में वंदे मातरम पर हुई चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में मोहनदास करमचंद गाँधी पर गलत बयान दिया गया। हालाँकि, ऑपइंडिया के फैक्टचेक में यह दावा गलत साबित हुआ।

विवादित इतिहासकार एस इरफान हबीब ने दावा किया कि सोमवार (8 दिसंबर 2025) को लोकसभा में वंदे मातरम पर हुई चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में मोहनदास करमचंद गाँधी पर गलत बयान दिया गया। इस बयान में पीएम मोदी ने कहा था कि गाँधी ने वंदे मातरम की प्रशंसा की थी और इसे राष्ट्रगान बताया था।

वंदे मातरम के इतिहास पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि 1905 में गाँधी ने गीत की प्रशंसा करते हुए एक लेख लिखा था और स्वीकार किया था कि यह पूरे बंगाल में इतना लोकप्रिय हो गया था कि यह एक राष्ट्रगान की तरह बन गया था, जिसमें अन्य देशों के राष्ट्रीय गीतों से अधिक भावनाएँ और मधुरता है। इस गीत में भारत को माता के रूप में देखा गया और उसकी भक्ति की गई।

लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा, “मैं महात्मा गांधी की वंदे मातरम के प्रति भावनाओं के बारे में बताना चाहता हूँ। 2 दिसंबर 1905 के ‘इंडियन ओपिनियन’ में महात्मा गांधी ने लिखा था कि बंकिम चंद्र द्वारा लिखा गया गीत वंदे मातरम पूरे बंगाल में बहुत प्रसिद्ध हो गया था। स्वदेशी आंदोलन के समय लाखों लोग इसे गाते थे। उन्होंने यह भी लिखा कि यह गीत इतना लोकप्रिय था कि यह हमारे राष्ट्रगान जैसा बन गया था। इसमें दूसरे देशों के राष्ट्रगीतों से भी अधिक भावना और मिठास है। यह गीत भारत को माँ की तरह देखता है और उसकी प्रार्थना करता है।”

हालाँकि, विवादित इतिहासकार एस इरफान हबीब ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान को खारिज कर दिया। हबीब का कहना है कि 1905 में महात्मा गाँधी दक्षिण अफ्रीका में थे और 1915 में भारत लौटे थे। इसलिए यह संभव नहीं कि उन्होंने उस समय वन्दे मातरम को राष्ट्रीय गान जैसा माना हो।

हबीब ने एक्स पर लिखा, “आज वन्दे मातरम् बहस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महात्मा गाँधी ने 1905 से इसे ‘राष्ट्रीय गान’ माना। लेकिन गाँधी उस समय दक्षिण अफ्रीका में थे, वे 1915 में भारत आए। क्या कोई संदर्भ है जो मुझे छूट गया लगता है?”

एस इरफान हबीब के साथ लेफ्ट प्रोपगैंडा वेबसाइट द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बयान को गलत बताने का दावा किया। हबीब के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए वेणु ने एक्स पर लिखा, “अगर हम मोदी के बयानों के संदर्भ ढूँढना शुरू कर दें, तो हम पागल हो जाएँगे!”

एस इरफान हबीब और एमके वेणु के दावों का फैक्टचेक

इतिहासकार हबीब के दावे की सत्यता जाँचने के लिए ऑपइंडिया ने फैक्ट-चेक किया और पाया कि उनका दावा पूरी तरह गलत है। हमारी जाँच के अनुसार, मोहनदास करमचंद गाँधी ने स्पष्ट रूप से वन्दे मातरम् गीत, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था का समर्थन किया और इसे ‘राष्ट्रीय गान’ के रूप में भी माना।

दरअसल, गाँधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, लेकिन इससे बहुत पहले दिसंबर 1905 में उनके विचार भारतीय पत्रिका ‘इंडियन ओपिनियन’ में प्रकाशित हुए। वहाँ स्पष्ट रूप से दिखता है कि उन्होंने इस गीत की सराहना की और समर्थन किया।

गाँधी ने अपनी लेखनी ‘The Heroic Song of Bengal’ में लिखा, “वंदे मातरम् गीत पूरे बंगाल में बहुत लोकप्रिय हो गया है। स्वदेशी आंदोलन के सिलसिले में बंगाल में विशाल सभाएँ आयोजित की गईं, जहाँ लाखों लोग एकत्रित हुए और बंकिम का गीत गाया। कहा जाता है कि यह गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि यह हमारा राष्ट्रगान बन गया है।” इंडियन ओपिनियन में प्रकाशित गाँधी की इस लेखनी की छवि भी नीचे प्रस्तुत की गई है।

महात्मा गाँधी के संग्रहित कार्यों के एक अंश का स्क्रीनशॉट (Image via https://www.gandhiheritageportal.org/)

उपरोक्त गाँधी की अपनी लेखनी से स्पष्ट होता है कि वे इस गीत की प्रशंसा करते थे और उन्हें इसके लोकप्रिय होने का भी पता था। स्वतंत्रता सेनानियों के बीच यह गीत इतना लोकप्रिय था कि वे इसे राष्ट्रीय गान की तरह गाते थे।

एमके वेणु के दावों का उनकी वेबसाइट पर छपे एक आर्टिकल से हुआ खंडन

दिलचस्प बात यह है कि 8 नवंबर 2025 को द वायर में प्रकाशित एक लेख “गाँधी का दृष्टिकोण: वन्दे मातरम् समावेशी है, आज की तरह विभाजनकारी नहीं” में भी गाँधी की उसी लेखनी का उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि गाँधी ने वन्दे मातरम् की प्रशंसा की और इसे राष्ट्रीय गान कहा।

लेख में लिखा गया है, “दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए, महात्मा गाँधी ने 2 दिसंबर 1905 को इंडियन ओपिनियन में ‘The Heroic Song of Bengal’ शीर्षक से एक लेख लिखा और वन्दे मातरम् को हमारा राष्ट्रीय गान बताया।”

फैक्ट-चेक के बाद यह साफ हो गया कि इतिहासकार एस इरफान हबीब और द वायर के संस्थापक संपादक एम के वेणु ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान और वन्दे मातरम् के बारे में गलत जानकारी फैलाई। हालाँकि, हबीब और वेणु का ऐसा व्यवहार कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि लेफ्ट-इकोसिस्टम हमेशा से राष्ट्रवादी और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति नकारात्मक रहा है।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अदिति ने अंग्रेजी में लिखी है, जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे)

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Aditi
Aditi
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