20 जुलाई 2026 का दिन दिल्ली के लिए सिर्फ एक और प्रदर्शन का दिन नहीं था, यह एक ऐसी लड़ाई थी जो एकतरफा पेश की गई। एक तरफ इंस्टाग्राम की रील्स और कुछ तथाकथित पत्रकारों के दावे थे, जो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ प्रदर्शन को पूरी तरह पुलिस के खिलाफ और प्रदर्शनकारियों को क्लीनचिट देने के प्रयास से गढ़े गए थे। दूसरी तरफ, प्रदर्शन में जो पत्थरबाजी, गाली-गलौज, तोड़फोड़, हिंसक नारेबाजी के पीछे की साजिश थी, उस पर बात करने को कोई तैयार ही नहीं है।
यह प्रदर्शन जितना सड़कों पर व्यापक था हुआ, उतना ही सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर भी लड़ा जा रहा था, जहाँ नैरेटिव गढ़े जा रहे थे और सच्चाई को दबाने की कोशिश हो रही थी। इसी दूसरे मोर्चे को समझने के लिए एक छोटा-सा प्रयोग ही काफी है।
20 जुलाई 2026 यानी ‘संसद मार्च’ की रात करीब तीन से चार घंटे तक सोशल मीडिया पर रील स्क्रॉल करने पर जब मेरे सामने सिर्फ एकरफा नैरेटिव का कंटेन्ट सामने आता रहा, तो मुझे भी हैरानी हुई। पुलिस की कार्रवाई दिखाई गई, छात्रों के चेहरे में छिपे ‘हिंसक भीड़’ को विक्टिम घोषित कर दिया गया और यहाँ तक कि मौके पर मची अफरा-तफरी का सारा ठीकरा सरकार पर फोड़ दिया गया। यह सिर्फ मेरी टाइमलाइन नहीं थी, मेरे दोस्तों के एल्गोरिदम का भी यही हाल था जहाँ हर कोई इस एकतरफा नैरेटिव को आगे शेयर करता जा रहा था।
लेकिन इसमें जो मिसिंग था, वो घायल पुलिसकर्मियों की तस्वीर, हिंसक भीड़ द्वारा तोड़ी गई पुलिस वैन और आम गाड़िया या मंदिर जैसे पवित्र स्थिल पर हुए पथराव, इनमें से कुछ भी उस एल्गोरिदम के कंटेन्ट में जगह नहीं बना पाया। यही वह पल था जब समझ आया कि देश के GenZ (जेन जी) को किस तरह एकतरफा कंटेन्ट परोसकर ब्रेनवॉश किया जा रहा था।
इसीलिए मेरी यह रिपोर्ट जरूरी हो जाती है, ताकि दोनों पहलू सामने आएँ और वह हकीकत भी सामने आए जो रील्स के एल्गोरिदम में जगह नहीं बना पाई।
पुलिस पर हमला नहीं होने का झूठा दावा, देखें भयानक तस्वीरें
सोशल मीडिया पर वैसे तो ऐसे कई तथाकथित पत्रकार और सोशल मीडिया अकाउंट्स थे, जो एकतरफा नैरेटिव चला रहे थे। लेकिन इन नैरेटिव को गढ़ने की PhD कर चुके लोग अब नए युवाओं को भी इस नैरेटिव का हिस्सा बनाने की साजिश में थे। इसी में पुराना नाम है, आल्ट न्यूज के ‘फैक्टचेकर’ मोहम्मद जुबैर का। जुबैर ने प्रदर्शन में पुलिस पर हिंसा होने से ही साफ इनकार कर डाला, यह कहते हुए कि इसके कोई सबूत नहीं हैं।
लेकिन बिना ज्यादा छानबीन किए जुबैर ने दिल्ली पुलिस की जानकारी को भी अनदेखा कर दिया, जिसमें शुरुआत में पहले 50 पुलिसकर्मी के घायल होने और बाद में सही आँकड़ा बताते हुए 118 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात कही गई। खुद दिल्ली के पुलिस कमिश्वर अनुराग कुमार इन घायल जवानों का हाल जानने अस्पताल पहुँचे थे।
🚨आज हुए उग्र प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त रैंक के अधिकारियों सहित दिल्ली पुलिस और केन्द्रीय पुलिस बलों के कुल 118 पुलिसकर्मियों से अधिक को चोटें आई, @CPDelhi श्री अनुराग कुमार ने अस्पताल जाकर घायल… pic.twitter.com/SGpiONjbd7
— Delhi Police (@DelhiPolice) July 20, 2026
इस जानकारी की पुष्टि मौके से सामने आए तस्वीरों और वीडियो से भी हो जाती है, जिन्हें देख तथाकथित पत्रकारों ने आँखों पर पट्टी बाँध ली और ‘मेटा’ के एल्गोरिदम ने इसे बेहतर कंटेन्ट का हिस्सा ही नहीं माना। इन वीडियो में किसी का सिर फटा हुआ दिख रहा है, किसी की आँख तो किसी की नाक फोड़ दी गई है, कईय़ों के सिर पर पट्टी बँधी नजर आई, तो किसी की हालत इतनी बुरी थी कि उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
ANI की तस्वीर में दिल्ली पुलिस का एक सब-इंस्पेकटर CATS एंबुलेंस के पास खड़ाई दिखाई दे रहा है और अपनी घायल आँख पर कपड़ा दबाए हुआ खून रोकने की कोशिश कर रहा है। न्यूज एजेंसी ने ही दो तस्वीरें और पोस्ट की, जिसमें नाक और सिर पर पट्टी बाँधे दो पुलिस कॉन्सटेबल अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।
Delhi Police force soldiers injured in stone pelting
— Lala (@FabulasGuy) July 20, 2026
They said, We were standing near barricades, stone was pelted by protesters
And shameless AAP leaders are lying that no stone was hurled. pic.twitter.com/h2W9uN8BxZ
IANS की एक और तस्वीर में सुरक्षाकर्मी और मेडिकल स्टाफ़ दिल्ली पुलिस के एक घायल अधिकारी को इलाज के लिए गाड़ी में ले जाते हुए दिख रहे हैं, जिससे झड़प के दौरान लगी चोटों की गंभीरता का पता चलता है।
Delhi: A police officer injured during the CJP protest has been admitted to RML Hospital. More details are awaited. pic.twitter.com/Nx4IMpwZkm
— IANS (@ians_india) July 20, 2026
ANI की एक और तस्वीर में दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर चलता हुआ दिख रहा है, जिसकी यूनिफॉर्म की शर्ट के सामने वाले हिस्से पर खून के साफ़ धब्बे लगे हैं। यह उन दावों को और गलत साबित करता है कि कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था।

एक वीडियो ऐसी भी सामने आई, जिसमें सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों की भीड़ एक पुलिसकर्मी को खदेड़ते हुए जमीन पर गिराकर बेरहमी से पीटते हुए दिखी, जिससे भीड़ की हिंसा का सीधा सबूत मिलता है। वीडियो में हिंसक भीड़ को पुलिसकर्मी पर कुचले देखा जा सकता है। भीड़ में जितना जिसको मौका मिल रहा है, वह उस अकेले पुलिसकर्मी को मार रहा है।
This update has been posted by one Rajab Hussain on Instagram. In this, it shows a Delhi police officer being almost lynched. @DelhiPolice for your kind attention.
— Nupur J Sharma (@UnSubtleDesi) July 20, 2026
Here’s the Instagram link https://t.co/Tj6QeedJB5 pic.twitter.com/LamGJ8KoYr
इतना ही नहीं हिंसक भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की, कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस वैन पर चढ़कर फोटो खिंचवाते और व्लॉग बनाते दिखे। सिर्फ पुलिस वैन ही नहीं, आम नागरिकों की गाड़ियों को भी निशाना बनाया गया।
True face of cockroaches
— Lala (@FabulasGuy) July 20, 2026
It was never for students. 💔 pic.twitter.com/y7b5rOtCTv
ये ऐसे कुछ चुनिंदा वीडियोज हैं जो लोगों ने रिकॉर्ड किए हैं। लेकिन मौके पर जो बर्बरता पुलिस के साथ की गई, उसके बारे में खुलकर कोई नहीं बात कर रहा है। चिंता की बात यह है कि खुद इन पीड़ित पुलिसकर्मी ने अपने ऊपर बीती को किसी मीडिया के सामने शेयर नहीं किया, न ही सोशल मीडिया पर आपबीती के वीडियो शेयर किए, जबकि दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कई पाकिस्तानी अकाउंट्स लगातार पोस्ट किए जा रहे थे।

दिल्ली पुलिस ने शुरुआती जाँच में ही खुलासा किया कि सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी अकाउंट्स से प्रदर्शन को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही थी। इनमें झूठा दावा किया जा रहा था कि सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जबकि 391 घायल और 250 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इन विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स की जाँच करेगी। वहीं पुलिस ने 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर मंचित हिंसा
CJP के लीडर कहे जाने वाले अभिजीत दिपके के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 20 जून 2026 से प्रदर्शन शुरू किया गया था, और शुरू से ही यह दावा किया गया कि यह काफी ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन है और केवल ‘छात्रों के हित’ के लिए है। लेकिन एक महीने में सामने आईं इस प्रदर्शन की तस्वीरों में न तो कुछ ‘छात्रों के हित’ की कोई बात हुई, और ‘शांतिपूर्ण’ वाला टैग भी 20 जुलाई को मिट्टी में मिल गया।
‘संसद चलो’ मार्च में प्रदर्शनकारी हाथ में ईंट लेते चले तो कोई दीवार फाँदते दिखा, कोई पीएम मोदी को गाली दे रहा था, कोई झुंड में ‘गोदी मीडिया हाय-हाय’ के नारे लगा रहा था। और इसी एजेंडे के साथ ‘नेपाल जैसे हालात‘ का नैरेटिव वायरल कर डराने की कोशिश की गई।

प्रदर्शन में शामिल हुए एक पत्रकारिता के छात्र ने मौके का मंजर बताया कि पत्थरबाजी सबसे पहले प्रदर्शनकारियों की तरफ से शुरू हुई और ‘असल छात्रों’ को भी पथराव करने के लिए उकसाया गया, हिंसक प्रदर्शनकारियों ने उनसे कहा- “हम हैं पीछे तुम पत्थर फेंको।” न्यूज पिंच की इस वीडियो में पत्रकार अभिनव पांडे भी बता रहे हैं कि पथराव प्रदर्शनकारियों की तरफ से हुआ और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।
Journalism student confirms that protesters started pelting stones first at Delhi Police after cops tried to stop them.
— The Letter S (@WhyTheLetter_S) July 20, 2026
#CJPProtest pic.twitter.com/cpIpI5WZe8
प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) स्थित हनुमान मंदिर पर भी पथराव किया। इस वीडियो में मुँह पर रुमाल बाँधे भीड़ का झुँड आगे बढ़ रहा है और बैरिकेट पर चढ़कर उत्पात मचाता रहा है।
Cockroach Janta Party protesters also did stone pelting at Prachin Hanuman Mandir in Connaught Place Yesterday.
— Jinesh Choraria (@Jinesh_Choraria) July 21, 2026
This is one of the oldest and most visited temples in Delhi. pic.twitter.com/a0KIU33gCf
केवल यही नहीं, सामने आए वीडियो में संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी हाथों में ईंट लिए चल रहे थे। चंड़ीगढ़ के एक फन्नी खान नाम के लड़का भी इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुँचा था, उसने वीडियो में हाथ में ईंट लेकर धमकी दे रहा था कि अगर उसे संसद में घुसने से रोका गया तो वह उसी ईंट से हमला करेगा।
👇Meet Fanni Khan from Chandigarh.
— Rupsy Saini (@ZiviiBloom) July 20, 2026
Before the march to Parliament began, he allegedly said that if @DelhiPolice tried to stop him and his group, they would pelt stones at police personnel.
If anyone has information that could help identify those involved in the stone-pelting,… pic.twitter.com/5SQR4rbfxe
वीडियो में उसकी आवाज लड़खड़ा रही थी, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह नशे में था। नशे के बात करें, तो ऐसे और भी वीडियोज सामने आए जिसमें कई प्रदर्शनकारी नशे में गुस्सा दिखाते और धमकी देते दिखे। ऑपइंडिया के पत्रकार आशीष नौटियाल ने भी खुद इसे अनुभव किया, वह 20 जुलाई की पूरी रात जंतर-मंतर पर थे, उन्होंने बताया कि मौके पर 100 में से 90 प्रतिशत लोगों ने नशा कर रखा था, और वहाँ शराब की बुरी गँध आ रही थी।
आधी रात के बाद जंतर-मंतर पर क्या हो रहा था?
— OpIndia.tv (@OpIndia_tv) July 21, 2026
संसद मार्च के बाद @ashu_nauty रात करीब 2 बजे जंतर-मंतर पहुँचे, ताकि अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों की वास्तविक स्थिति का जायज़ा ले सकें।
उन्होंने देखा कि, वहाँ का माहौल पूरी तरह अराजकता में बदल चुका था। समाचार चैनलों की महिला एंकरों के… pic.twitter.com/8EmwQBQkF5
और अगर बात ‘अहिंसक प्रदर्शनकारियों’ की करें, तो वे छात्रों के इस प्रदर्शन में ‘मोदी मुर्दाबाद’ और ‘केजरीवाल जिंदाबाद’, ‘उमर खालिद-शरजील इमाम जिंदाबाद’, ‘असम देश से अलग हो जाना चाहिए’ जैसी नारेबाजी करने में व्यस्त थे। जो ‘अहिंसा’ की कैटेगरी में हिंसा भड़काने का काम कहलाता है।
"मोदी मुरादाबाद
— Mamta (@Mamta010619) July 21, 2026
केजरीवाल ज़िंदाबाद
उमर खालिद की जय असम देश से अलग हो गया तो क्या हुआ" – युवा कॉकरोच की सोच देखिए pic.twitter.com/JPniL2wAVm
वहीं प्रदर्शन में मौजूद असली छात्र इस सुनियोजित हिंसा को समझ नहीं पा रहे थे। उनका सवाल था कि प्रदर्शन तो शिक्षा व्यवस्था ठीक करने को लेकर सरकार से जवाबदेही माँगना था, जो अब हिंसा में तब्दील हो चुका था। राजस्थान से आए एक युवा ने कहा, “हम NEET पेपर लीक पर अपनी आवाज उठाए थे, लेकिन यहाँ सब उल्टा है… चारों ओर विपक्षी दल के छात्र संगठन दिख रहे हैं… कोई BJP को गाली दे रहे है, कोई हिंदुओं को गाली दे रहा है… असली छात्र जो आ रहा है वह ठगा जा रहा है।”
🚨🔥 राजस्थान से आए असली NEET अभ्यर्थी ने जंतर-मंतर पर खोली पोल!
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 20, 2026
“ये आंदोलन छात्रों के लिए नहीं है… ये कुछ और है।”
CJP प्रदर्शन में शामिल होने आए एक सच्चे NEET स्टूडेंट ने साफ कहा – ये पूरा खेल राजनीतिक है, छात्रों की मदद का नहीं।
असली तैयारी करने वाले छात्रों की आवाज़ सुनिए,… pic.twitter.com/EfDlGMVE3Z
वायरल व्हाट्सऐप चैट्स से खुली पोल
और यह कोई अचानक भड़की हिंसा नहीं थी, यह एक रात पहले से रची गई पूरी पटकथा का नतीजा थी। 20 जुलाई से एक रात पहले ही व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर प्रदर्शन की बकायदा योजना बनाई जा चुकी थी और असली छात्रों को इसी योजना के जरिए सोशल मीडिया को हथियार बनाकर उकसाया गया। उन्हें कदम दर कदम बताया गया कि करना क्या, अगर पुलिस रोकने की कोशिश करे तो क्या करना है, अगर बैरिकेडिंग लगा दे तो क्या करना है, संसद का गेट बंद कर दे तो क्या करना है और अपने साथ क्या पहनना है से लेकर क्या चीजें लेकर आनी है, सबकुछ।

सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध अकाउंट्स तो लोगों को जंतर-मंतर आने का खर्चा तक देने को तैयार थे। और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन्हीं चैट्स में छात्रों को यह कहकर उकसाया गया कि ‘मरने-मारने को भी तैयार रहना’ यानी जिन छात्रों को NEET पेपर लीक जैसे वाजिब मुद्दे के नाम पर बुलाया गया था, उन्हें ही हिंसा के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था।

वायरल व्हाट्सऐप चैट्स में लिखा गया था, “भाई किसी की मौत होती है तो सरकार पर ज्यादा प्रेशर आएगा।” यही वह सोची समझी साजिश थी जिसके चलते प्रदर्शन के दौरान 7 मौतों की झूठी खबरें फैलाई गई थीं, हालाँकि दिल्ली पुलिस ने बाद में इस दावे का खंडन कर इस साजिश को नाकाम कर दिया था।
वहीं जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के वामपंथी छात्र संगठनों के व्हाट्सऐप ग्रुप्स में तो योजना बनाई गई कि अगर इंटरनेट जैम लगाया गया तो Briar और Bitchat जैसे ब्लूटुथ ऐप्स का इस्तेमाल किया जाएगा। छात्रों को बताया गया कि सुबह पुलिस यूनिवर्सिटी के गेट बंद कर सकती है, इसलिए रात दो-तीन बजे ही जंतर-मंतर पहुँचना होगा।

पत्रकारों पर हमले और गोदी मीडिया का शोर
प्रदर्शन के दौरान एक पैटर्न यह भी सामने आया कि प्रदर्शनकारी सिर्फ उन्हीं पत्रकारों से बात कर रहे थे जो एक तयशुदा नैरेटिव के साथ ‘पत्रकारिता’ करते हैं। जो भी पत्रकार प्रदर्शनकारी से उनकी मर्जी के अलावा सवाल पूछ रहा था, तो उन्हें वह या तो अपनी हिंसा का शिकार बना रहे थे या फिर ‘गोदी मीडिया’ की नारेजाबी कर प्रताड़ित किया जा रहा था।
एबीपी न्यूज के रिपोर्टर वरुण भसीन भी हिंसक भीड़ के हमले का निशाना बने। भसीन को प्रदर्शनकारियों के झुंड ने घेर लिया और ‘गोदी मीडिया हाय-हाय’ के नारे लगाए। भसीन ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि प्रदर्शन कवर करने के दौरान उन्हें भीड़ में ऐसे कई युवा दिखे जो लगातार मीडिया की गाड़ियों पर हमला कर रहे थे, कैमरे तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, और मीडिया पर पत्थर तक फेंके गए।
When 'godi media showed up, the people showed it the way out pic.twitter.com/11LnDluyl8
— Indians (@voicesindians) July 21, 2026
इन्हीं प्रदर्शनकारियों ने ऑपइंडिया के पत्रकार अनुराग मिश्रा को भी निशाना बनाया था, जब वह कवरेज करने जंतर-मंतर पहुँचे थे। प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और ‘गोदी मीडिया हाय-हाय’ के नारेबाजी कर गाली-गलौज तक की।
अब यहीं से समझ लीजिए कि यह प्रदर्शन महिला के लिए कितना सुरक्षित रह जाएगा, और इस पर सवाल भी उठे जब PEEKTV की रिपोर्टर प्रियांशी के साथ भी यही हुआ, जब उन्होंने प्रदर्शनकारियों से लीडरशिप और आगे की रणनीति के बारे में सवाल पूछा तो भीड़ भड़क गई और उन पर मुद्दे से भटकाने का आरोप लगाते हुए वही ‘गोदी मीडिया’ की नारेबाजी करने लगी।
#PeekOnGround: While several protesters told Peek TV that they were not aware of where to go during the CJP’s Sansad March, when Peek TV raised the question of mismanagement by the Cockroach Janta Party leadership, several protesters heckled the team, calling them ‘Godi media’. pic.twitter.com/FBZxi91okd
— Peek TV (@PeekTV_in) July 20, 2026
इन घटनाओं से यह भी साफ हो जाता है कि ऐसे माहौल में सिर्फ पुरुष ही नहीं महिला पत्रकारों के लिए प्रदर्शन की कवरेज करना कितना असुरक्षित हो चला था।
CJP के प्रदर्शन में AISF के झंडे, ‘जय भीम’ ने किया कब्जा
‘संसद चलो’ मार्च से एक दिन पहले ही ‘आंदोलनजीवी’ योगेंद्र यादव ने जंतर-मंतर पर CJP के मंच से ‘पंचशील‘ जारी किए थे। इनमें सबसे पहला था कि मार्च में सिर्फ तिरंगा झंडा लेकर आना है, लेकिन ग्राउंड पर इससे उलट देखा गया। ऑपइंडिया जब ग्राउंड पर पहुँचा तो प्रदर्शन में AISA, SFI और अन्य कम्युनिस्ट छात्र संगठनों के झंडे लहराए जा रहे थे।
इनमें भी सबसे ज्यादा जो झंडे फहराए जा रहे थे, वो चंद्रशेखर आजाद की ‘भीम आर्मी’ राजनीतिक दल के झंडे थे। ऑपइंडिया ने भी रिपोर्ट किया कि इस प्रदर्शन पर भीमा आर्मी के समर्थकों की भारी संख्या में भीड़ जुटी थी। वीडियोज भी सामने आए थे जिनमें चंद्रशेखर आजाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते दिखाई दे रहे थे।
यही नहीं प्रदर्शनकारियों में गैंगस्टर भी घुसे हुए थे। नॉर्थ ईस्ट दिल्ली का गैंगस्ट हाफी अफजल भी अपने साथ भारी संख्या में लोगों को लेकर प्रदर्शन में पहुँचा था और मौके पर ‘बीजेपी मुर्दाबाद’, ‘मोदी मुर्दाबाद’ और ‘जब-जब मोदी डरता है पुलिस को आगे करता है’ जैसे भड़काऊ नारे लगा रहा था।
निष्कर्ष
तो देखिए इस पूरे प्रदर्शन का निष्कर्ष क्या निकलकर आया है। 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम रील्स के जरिए जो एकतरफा तस्वीर गढ़ी गई, वह जमीनी हकीकत से मीलों दूर थी। इससे यह पता लगता है कि इस्टाग्राम कैसे युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है। असली छात्र जो NEET पेपर लीक के मुद्दों पर आवाज उठाने पहुँचे थे, वे इस भीड़ में कहीं गुम हो गए, जबकि राजनीतिक दलों, वामपंथी छात्र संगठनों और उपद्रवियों ने प्रदर्शन को एक बिल्कुल अलग दिशा दे दी।
वहीं पुलिस पर हमले, मंदिर पर पथराव, पत्रकारों से बदसलूकी और हिंसा फैलाने की सुनियोजित साजिश के सबूत सामने आने के बावजूद एक बड़ा तबका इन तथ्यों को जानबूझकर नजरअंदाज करता रहा। यही वजह है कि दोनों पहलुओं को खुलकर सामने रखना जरूरी हो जाता है, ताकि जनता खुद तय कर सके कि उस दिन जंतर-मंतर की सड़कों पर हकीकत क्या थी।
वहीं प्रदर्शन का असली नेतृत्व की बात करें, तो वह मौके से ही गायब रहा। न तो अभिजीत दिपके की लीडरशिप दिखी, न सौरव दास, न आशुतोष रांका और न ही CJP के वॉलंटियर्स नजर आए। वहीं प्रदर्शन के वक्त प्रवक्ता विजेता दहिया को मेट्रो स्टेशन पर बर्गर खाते पकड़ा गया।
नतीजा यही निकलकर सामने आया कि महीने भर से ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन के नाम पर सिर्फ एक ढोंग चल रहा था, जब मौका मिला तो ‘कॉकरोचों’ के नाम पर हिंसकर भीड़ ने अपना असली रूप दिखा दिया। अब इसी भीड़ में एक-एक आदमी की पहचान दिल्ली पुलिस FRI तकनीक से करेगी।
और अपडेट यह है कि CJP अब भी जंतर-मंतर पर डेरा जमाए बैठी है। सरकार की तरफ से आश्वासन दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर खाली करने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर CJP के भीतर दरार भी अब खुलकर सामने आने लगी है। अभिजीत दिपके के नेतृत्व को लेकर कुछ लोग पहले से ही नाराज थे और अब प्रदर्शन छोड़कर बर्गर खाने वाले विजेता दहिया को भी प्रवक्ता के पद से हटा दिया गया।
कुल मिलाकर निष्कर्ष यही निकलता है कि इस पूरे प्रदर्शन में सबसे ज्यादा नुकसान उन आम छात्रों का हुआ जो शुरू से ईमानदारी के साथ CJP को सपोर्ट कर रहे थे।


