स्पेन के स्वायत्त एनक्लेव ‘सेउटा’ में मोरक्को की ओर से हजारों अवैध प्रवासियों (घुसपैठियों) की अचानक घुसपैठ ने एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय और मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। महज 80,000 की आबादी वाले सेउटा में कुछ ही दिनों में 60,000 से अधिक घुसपैठिए सीमा पार कर दाखिल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्पेनिश सेना तैनात की गई है और अधिकतर घुसपैठियों को वापस मोरक्को भेज दिया गया है।
दरअसल, मोरक्को की ओर से स्पेनिश एनक्लेव सेउटा और मेलिला में हजारों प्रवासियों के जबरन घुसने की कोशिशों ने न केवल यूरोपीय संघ की सुरक्षा दीवारों को चुनौती दी है, बल्कि मैड्रिड और रबात के बीच के कूटनीतिक संबंधों में मौजूद दरारों को भी उजागर कर दिया है।
सेउटा पर संकट का दायरा कितना बड़ा है?
सेउटा की कुल आबादी महज 80,000 के आसपास है। ऐसे में दो-तीन दिनों के भीतर ही 60,000 प्रवासियों का आ जाना इस क्षेत्र के ढांचे और संसाधनों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। घुसपैठ की चरम सीमा के दौरान हर मिनट करीब 200 घुसपैठिए समुद्र के रास्ते तैरकर या ब्रेकवाटर (समुद्री बाँध) पार करके सेउटा की सीमा में दाखिल हो रहे थे।
स्पेन के गृह मंत्रालय के अनुसार, स्थिति पर काबू पाने के प्रयासों के तहत लगभग 25,000 प्रवासियों को वापस मोरक्को भेज दिया गया है। इससे पहले मई 2021 में भी ऐसा संकट आया था, लेकिन तब प्रवासियों की संख्या 12,000 थी, जबकि इस बार का संकट उससे कई गुना बड़ा है।
Grande-Marlaska: “#Ceuta ha sufrido un ataque que supone una seria violación de la integridad territorial de #España. Hemos respondido con firmeza, determinación y con el despliegue de un potente dispositivo, con el refuerzo de @policia, @guardiacivil y @EjercitoTierra”. pic.twitter.com/5GqySYJHzo
— Ministerio del Interior (@interiorgob) August 1, 2026
इस अचानक बढ़ी घुसपैठ को लेकर मोरक्को के सुरक्षा बलों की भूमिका संदेह के घेरे में है। प्रवासन मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि मोरक्को की पुलिस और सहायक बल सीमाओं पर केवल मूकदर्शक बने रहे। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इस घुसपैठियों को बाकायदा सेउटा की सीमा तक मोरक्को प्रशासन छोड़ रही है, जिसमें कुछ लोग जेलों से छोड़े गए कैदी भी हो सकते हैं।
Miles de marroquíes llegaron en camiones y autobuses a la frontera de Ceuta.
— David Santos (@davidsantosvlog) July 31, 2026
No es una crisis migratoria, es una marcha verde orquestada por Mohamed VI. pic.twitter.com/s0jICYRyHe
बहरहाल, एएफपी न्यूज एजेंसी की मानें तो स्पेन के सेउटा में 60,000 से अधिक मोरक्कन लोगों ने घुसपैठ की थी, जिनमें से शनिवार रात तक अधिकतर लोगों को वापस मोरक्को भेज दिया गया है।
After up to 60,000 migrants streamed into Spain's north African enclave of Ceuta from Morocco, most by Saturday have now left, according to officials.
— AFP News Agency (@AFP) August 1, 2026
But right-wing politicians said this shows a weakness in EU border management.
Full story: https://t.co/ufzkUxsvcz pic.twitter.com/gdbC7ZUUgP
यह घटना केवल एक सामान्य प्रवासन समस्या नहीं है, बल्कि इसे स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की सरकार पर राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बनाने के एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या मोरक्को अपनी सीमाओं की ढीली निगरानी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है और क्या सांचेज प्रशासन अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की कीमत चुका रहा है।
सेउटा और मेलिला की स्थिति जानना जरूरी, कैसे मोरक्कन कर रहे हैं घुसपैठ
दरअसल, सीमा सुरक्षा में इस अचानक आई विफलता को समझने के लिए सेउटा और मेलिला की स्थिति को जानना आवश्यक है। ये दोनों शहर उत्तरी अफ्रीका के तट पर स्थित स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र हैं, जो सीधे तौर पर मोरक्को से जमीनी सीमा साझा करते हैं। यूरोपीय संघ की मुख्यभूमि पर पहुँचने का यह सबसे सुगम रास्ता होने के कारण, हजारों अफ्रीकी प्रवासी यहाँ शरण लेने की कोशिश करते हैं।
Miles de marroqupies violan la frontera sur de España en la ciudada autómona de Ceuta, un enclave español en el norte de Marruecos frente al estrecho de Gibraltar. España ha cedido por completo y su policía no pudo contener el paso de emigrantes pic.twitter.com/yJNQa6Mqbe
— Klaveec (@klaveec) July 30, 2026
मई 2021 में भी हुआ था ऐसा: आपको ये जानना भी जरूरी है कि मई 2021 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब कुछ ही दिनों के भीतर 12000 लोग सिउटा में घुस आए थे। इस बारे में सिउटा और मेलिला के अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद हड़कंप मच गया था, जिसके बाद स्पेन सरकार ने कड़ा रुख अपनाया था। तब भी दोनों देशों में काफी तनातनी हुई थी, यानी स्पेन और मोरक्को के बीच।
मोरक्को की भूमिका पर खड़े हो रहे सवाल
इस अचानक बढ़ी घुसपैठ को लेकर मोरक्को के सुरक्षा बलों की भूमिका संदेह के घेरे में है। प्रवासन मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि मोरक्को की पुलिस और सहायक बल सीमाओं पर केवल मूकदर्शक बने रहे। मोरक्को की तरफ से तटीय क्षेत्रों में पुलिस का कड़ा पहरा होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों को स्पेनिश सीमा की ओर जाने दिया गया। बिना मोरक्को प्रशासन की ढील के इतनी भारी तादाद में लोगों का सीमा पार करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
अचानक क्यों बढ़ गई घुसपैठ?
विशेषज्ञों के अनुसार इस अभूतपूर्व संकट के कानूनी और राजनीतिक कारण भी हैं। जिसमें स्पेनिश सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला अहम साबित हो रहा है।
स्पेनिश सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 8 जुलाई को स्पेन के उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसके तहत समुद्र के रास्ते आने वाले किसी भी प्रवासी को बिना प्रशासनिक निष्कासन प्रक्रिया (Administrative Expulsion Procedure) शुरू किए तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता। इस फैसले ने प्रवासियों को कानूनी राहत मिलने की उम्मीद जगाई।
स्पेन सरकार द्वारा अवैध रूप से रह रहे लोगों को नियमित (रेगुलराइज) करने के कदमों और भविष्य में अप्रवासन नीति पर और सख्त सरकार आने की आशंकाओं ने भी प्रवासियों को जल्द से जल्द सीमा पार करने के लिए उकसाया।
सांचेत पर सत्ता छोड़ने का दबाव? आखिर कौन सा खेल खेल रहा है मोरक्को?
ऐतिहासिक रूप से मोरक्को अपनी सीमा पुलिस के जरिए इस भीड़ को नियंत्रित रखता है, लेकिन समय-समय पर मोरक्को की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अचानक ढील दे दी जाती है। विश्लेषकों का मानना है कि मोरक्को जब भी स्पेन से किसी नीतिगत मुद्दे पर सहमत नहीं होता, तो वह सीमा नियंत्रण को ढीला कर प्रवासियों की भीड़ को स्पेनिश क्षेत्र में जाने देता है, कई सुरक्षा विशेषज्ञ इसे ‘हाइब्रिड वारफेयर’ या ‘Migration Weaponization’ की रणनीति के रूप में देखते हैं।
कई कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का सबसे बड़ा कारण मोरक्को की राजनीतिक मंशा है। साल 1956 में आजादी मिलने के बाद से ही मोरक्को स्पेनिश एन्क्लेव सेउटा और मेलिला (Melilla) पर अपना संप्रभुता का दावा ठोकता रहा है, जिसे स्पेन सिरे से खारिज करता आया है। विश्लेषकों का आरोप है कि मोरक्को प्रवासन का इस्तेमाल स्पेन पर दबाव बनाने और इन शहरों के भविष्य पर बातचीत करने के लिए एक ‘कूटनीतिक हथियार’ के रूप में कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज हैं। सांचेज पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोहरा दबाव है। विपक्षी दल पीपी (पीपुल्स पार्टी) और वॉक्स उन पर सीमा सुरक्षा में विफलता और कमजोर विदेश नीति का आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि मोरक्को के सामने सांचेज सरकार का नरम रुख ही इस तरह के संकटों को न्योता देता है।
दूसरी ओर सांचेज प्रशासन ने इस संकट को राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करार दिया है। स्पेनिश सरकार ने सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है और प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके बावजूद मैड्रिड के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि यह संकट अनायास नहीं आया है, बल्कि इसे सांचेज को एक निश्चित कूटनीतिक रास्ते पर लाने के लिए रचा गया है।
क्या अमेरिका को ‘न’ कहना बना मुसीबत?
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सांचेज अमेरिका की विदेश नीति से अलग राह चुनने की सजा भुगत रहे हैं। पश्चिमी सहारा के मुद्दे पर वाशिंगटन और रबात के बीच बनी सहमति के विपरीत सांचेज सरकार ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से जुड़े मामलों में एक स्वतंत्र रुख अपनाया है। जब अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इस क्षेत्र में अपने रणनीतिक हितों को साधने के लिए दबाव बनाया, तब सांचेज ने बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की वकालत की।
इसके अलावा बीते सालों में स्पेन द्वारा अमेरिका की कुछ रणनीतिक नीतियों से असहमति जताने के बाद यह कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि मोरक्को को वाशिंगटन का मौन समर्थन प्राप्त हो सकता है, जिससे वह स्पेन पर दबाव बनाने का दुस्साहस कर रहा है। वो कौन सी वजहे हैं जिन्हें इनसे जुड़ा माना जा सकता है?
हमास के खिलाफ इजरायल का विरोध: स्पेन ने अपने बंदरगाहों के इस्तेमाल से इजरायल को रोक दिया है। स्पेन का कहना है कि वो किसी भी लड़ाई में इजरायल का साथ नहीं देगा। यही नहीं, स्पेन ने फिलिस्तीन देश को भी मान्यता दे दी है। ऐसे में इजरायल का विरोध एक अहम पहलू है, जिसकी वजह से अमेरिका भी उसके खिलाफ खड़ा हो गया है।
3 mesi fa, il sito israeliano Ynet ha pubblicato un editoriale del giornalista marocchino Amine Ayoub che diceva che Israele dovrebbe aiutare il Marocco a “riprendersi” Ceuta e Melilla… La proposta: PREMIAMO il Marocco per gli Accordi di Abramo e PUNIAMO la Spagna per la… https://t.co/6HVyB8jf5q pic.twitter.com/QzHMnfRlAN
— Rula Jebreal (@rulajebreal) July 31, 2026
अमेरिकी फाइटर जेट्स को कहा न: इजरायल को मना करने के साथ ही स्पेन ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका को भी झटका दिया है। नेटो का सदस्य होने के बावजूद स्पेन ने अमेरिकी फाइटर जेट्स को अपने बेस का इस्तेमाल करने से मना कर दिया है। स्पेन का कहना है कि हॉर्मुज की जंग उसकी खुद की नहीं है, इसलिए वो इस युद्ध में अमेरिका की मदद नहीं करेगा, क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर हमले से पहले उसके साथ कोई सलाह मशविरा नहीं किया था।
हालाँकि अमेरिका ने यूरोप के साथ एकजुटता प्रदर्शित की है, लेकिन स्पेन सरकार पर सवाल भी उठाए हैं कि ये उसकी विफलता की वजह से हुआ है।
The United States stands with the people of Spain, and all Europeans, against this egregious violation of their sovereignty and human rights.
— Department of State (@StateDept) July 31, 2026
This unacceptable incident is the direct result of the Spanish Government's deliberate efforts to enable and facilitate mass illegal…
ऐतिहासिक रूप से भी आमने-सामने रहे हैं स्पेन-मोरक्को
पश्चिमी सहारा विवाद (मोरक्को से अलग हुआ हिस्सा) इस पूरे कूटनीतिक संघर्ष की सबसे अहम कड़ी है। मोरक्को इस क्षेत्र पर अपने पूर्ण अधिकार का दावा करता है, जबकि स्पेन ऐतिहासिक रूप से वहाँ के निवासियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता रहा है। अमेरिका द्वारा पश्चिमी सहारा पर मोरक्को के दावे को मान्यता दिए जाने के बाद मोरक्को चाहता था कि स्पेन और पूरा यूरोपीय संघ भी उसी नक्शेकदम पर चले। जब स्पेन ने तुरंत इस माँग के आगे घुटने नहीं टेके, तो सीमा पर प्रवासियों का संकट गहराने लगा।
सांचेज सरकार को यह भली-भांति एहसास है कि प्रवासियों का यह मुद्दा यूरोपीय संघ के भीतर भी स्पेन की स्थिति को असहज करता है, क्योंकि प्रवासन यूरोपीय राजनीति का सबसे संवेदनशील और विभाजनकारी विषय बन चुका है।
स्पेनिश गृह मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, मोरक्को सीमा पर अचानक हजारों युवाओं और नाबालिगों का जमा होना बिना मोरक्को के सुरक्षा बलों की मौन सहमति या ढील के संभव नहीं है। प्रवासियों की इस भीड़ का इस्तेमाल स्पेन की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और आंतरिक सुरक्षा पर तात्कालिक बोझ डालने के लिए किया गया है।
स्पेन ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि वह इसे केवल स्पेन का संकट न मानकर पूरे यूरोप की बाहरी सीमा पर हुआ अतिक्रमण माने। ब्रसेल्स (यूरोपीय संघ का मुख्यालय) ने स्पेन को अपनी सीमा सुरक्षा के लिए पूर्ण सहयोग और अतिरिक्त बजटीय सहायता देने का वादा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत बदलने में समय लग रहा है।
इस गंभीर स्थिति पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा, “स्पेन अपनी सीमाओं की अखंडता और अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा। सेउटा और मेलिला केवल स्पेन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे यूरोप की बाहरी सीमाएँ हैं। हम इस मानवीय स्थिति का राजनीतिक इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएँगे।”
El Gobierno garantizará la seguridad de los vecinos y vecinas de Ceuta, intensificando la presencia de las Fuerzas y Cuerpos de Seguridad en las calles de la ciudad.
— Pedro Sánchez (@sanchezcastejon) July 31, 2026
Además, vamos a desplegar una barrera física de contención en el mar para facilitar la repatriación en frontera,… pic.twitter.com/Mj2LrcoBV9
इसके साथ ही सांचेत ने उन आलोचकों को भी जवाब दिया, जिसमें स्पेन की तरफ से घुसपैठियों को छूट मिलने की बात कही जाती रही है। सांचेत ने अपने ट्वीट में आँकड़े देते हुए बताया कि 2021 से 2026 के बीच यूरोप में इटली के रास्ते 4,78,600 घुसपैठियों ने घुसपैठ की। बाल्कान इलाकों से 3,40,600 घुसपैठ हुई। ग्रीस से 2,59,800 घुसपैठ तो स्पेन से 2,34,760 लोगों ने घुसपैठ क। वहीं पूरी सीमाओं से 48,000 लोग यूरोप में आए। उन्होंने यूरोप से अपील की कि ये समय बँटने का नहीं है, बल्कि एकजुट होकर मुकाबला करने का है।
La solidaridad y la empatía son opcionales.
— Pedro Sánchez (@sanchezcastejon) July 31, 2026
El respeto a los tratados europeos y a los datos, no.
👇🏼
Número de entradas irregulares entre 2021 y 2026 según Frontex:
Por Italia: 478.600
Por los Balcanes occidentales: 340.600
Por Grecia: 259.800
Por España: 234.760
Por la…
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईयू कमीशन की प्रेसिडेंट उर्जुला वो डेर लेयेन ने भी कई बड़े कदम उठाने की घोषणा की। उन्होंने 2 कमीशन बनाते हुए इस स्थिति से निपटने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सिउटा के हालात को अनएक्सेप्टेबल करार दिया।
The images coming from Ceuta are unacceptable.
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) July 31, 2026
We cannot allow anyone to come to our Union without abiding by our rules.
Dangerous crossings must stop immediately. Smuggling networks must be dismantled. And returns must be swift, as our rules allow.
I tasked two Commissioners…
यूरोपीय संघ के कूटनीतिक मामलों के प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यूरोपीय आयोग के वरिष्ठ अधिकारी ने बयान जारी करते हुए कहा, “यूरोपीय संघ स्पेन के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है। स्पेन की सीमाएँ यूरोप की सीमाएँ हैं और हम प्रवासन के मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश की निंदा करते हैं। मोरक्को को एक जिम्मेदार पड़ोसी की तरह अपनी सीमाओं का प्रबंधन करना होगा और यूरोपीय संघ के साथ हुए सुरक्षा समझौतों का सम्मान करना होगा।”
फिलहाल सेउटा की स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्पेनिश विशेषज्ञों का कहना है कि मोरक्को के इस क्षेत्रीय दावे और सीमा पर ढिलाई के रवैये का मुकाबला करने के लिए स्पेन को इसे केवल अपना नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ का मुद्दा बनाना होगा। यूरोपीय संघ के स्तर पर कड़े जवाबी कदम उठाकर ही मोरक्को पर दबाव बनाया जा सकता है और सीमा पर जारी इस मानवीय और सुरक्षा संकट को रोका जा सकता है। अगर सांचेज इस संकट को कूटनीतिक बुद्धिमत्ता से हल नहीं कर पाते हैं, तो इसका असर न केवल स्पेन की आंतरिक राजनीति और उनकी सरकार के भविष्य पर पड़ेगा, बल्कि यह यूरोपीय संघ के उत्तरी अफ्रीका के साथ संबंधों की भावी दिशा भी तय करेगा।


