‘आपकी फ्लाइट का इंजन हवा में ही बंद हो सकता है।’… इस तरह की बातें सुनना कितना भयावह लग लग सकता है? लेकिन सोचिए भारत की जनता को यह डर राजनीति के नाम पर बेचा जा रहा है और ऐसा कर रहे हैं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल। इतना ही नहीं, वो लोगों से यहाँ तक अपील कर रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियाँ ना खरीदें। ऐसा होने पर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का क्या होगा, इसका आप अनुमान लगा लीजिए।
केजरीवाल ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) सुबह X पर एक पोस्ट में लिखा, “सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF में एथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उड़ानों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।”
Sources indicate that Modi govt plans to mix ethanol in Aviation Turbine Fuel (ATF). Experts say that this cud seriously compromise the safety of flights
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 6, 2026
बस कुछ ही देर में केजरीवाल ने अपने इस प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाते हुए X पर एक आर्टिकल शेयर करते हुए लिखा, “यह आर्टिकल पढ़ें। आपकी फ्लाइट का इंजन हवा में ही बंद हो सकता है। क्या आप मिलावटी एविएशन फ्यूल से चलने वाले एयरक्राफ्ट में उड़ने का रिस्क लेंगे? एक पढ़ी-लिखी और काबिल सरकार का समय आ गया है भारत ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की इजाजत दी।”
Read this article. The engine of ur flight just might stop in the air. Will u risk flying in an aircraft running on adulterated aviation fuel?
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 6, 2026
Time to have an educated and competent govt
India allows ethanol blending in aviation fuel – The Economic Times https://t.co/hKnOhpuXBo
हालाँकि, अगर अरविंद केजरीवाल ने शेयर करने से पहले अगर 23 अप्रैल 2026 का यह आर्टिकल खुद पढ़ लिया होता तो वह यह सब लिखने का जोखिम ना उठाते। खैर, हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि क्या सचमुच विमान के टैंक में एथेनॉल मिलाकर यात्रियों की जान जोखिम में डालने की तैयारी हो रही है? जवाब जानने के लिए हमें राजनीति के शोर से थोड़ा बाहर निकलकर एविएशन फ्यूल को समझना होगा।
क्या है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल?
भारत में जिस बदलाव की बात हो रही है, उसका संबंध सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (Sustainable Aviation Fuel – SAF) से है। SAF कोई ऐसा ‘मिलावटी तेल’ नहीं है जिसे बिना जाँचे विमान में डाल दिया जाए। यह aviation-grade fuel है, जिसे निर्धारित तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इस्तेमाल किया जाता है और इसे ATF के साथ ब्लेंडिंग के लिए विकसित किया गया है।
अमेरिकी ऊर्जा विभाग की एक रिपोर्ट बताती है कि SAF से हवाई जहाजों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है। SAF को सामान्य विमान ईंधन के साथ अलग-अलग मात्रा में मिलाया जा सकता है। इसे आम तौर पर 10% से 50% तक मिलाने की सीमा होती है। यह सीमा इस बात पर निर्भर करती है कि SAF किस चीज से बनाया गया है और इसे बनाने का तरीका क्या है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अनुसार, अब तक 46 अलग-अलग हवाई अड्डों से 3 लाख 60 हजार से ज्यादा व्यावसायिक उड़ानों में SAF का इस्तेमाल किया जा चुका है। इनमें ज्यादातर हवाई अड्डे अमेरिका और यूरोप में हैं।
केजरीवाल तो केवल एथेनॉल का रोना रो रहे हैं लेकिन यह रिपोर्ट बताती है कि SAF को पेट्रोलियम के बजाय दूसरे नवीकरणीय स्रोतों से बनाया जा सकता है। इसके लिए नगरों से निकलने वाला ठोस कचरा, जिसमें खाने और बगीचे का कचरा शामिल है, लकड़ी से मिलने वाला जैविक पदार्थ, पशु वसा, चिकनाई, तेल और ऐसे ही दूसरे स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है। SAF का उत्पादन अभी शुरुआती दौर में है।
कैसे होगा एथेनॉल का इस्तेमाल?
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या एथेनॉल को सीधे हवाई जहाज के ईंधन टैंक में मिलाया जा सकता है? इसका सीधा जवाब है- नहीं। एथेनॉल में पानी को सोखने की प्रवृत्ति होती है, जिससे अत्यधिक ऊँचाई और कम तापमान पर विमान के ईंधन सिस्टम में ‘फेज सेपरेशन’ (ईंधन और पानी का अलग होना) या माइक्रोबियल ग्रोथ का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, कच्चे एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पारंपरिक जेट ईंधन से लगभग 34% तक कम होती है।
इसीलिए, एथेनॉल को अल्कोहल-टू-जेट (Alcohol-to-Jet या AtJ) तकनीक के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से परिष्कृत (Refine) किया जाता है :-
डीहाइड्रेशन: एथेनॉल से पानी के कणों को पूरी तरह निकाल दिया जाता है।
ओलिगोमेराइजेशन: इसके कार्बन मॉलिक्यूल्स को जोड़कर लंबी हाइड्रोकार्बन चेन बनाई जाती है।
हाइड्रोजनेशन: अंत में हाइड्रोजन जोड़कर एक ऐसा ‘सिंथेटिक केरोसिन’ तैयार होता है जो रासायनिक संरचना में हुबहू पारंपरिक एटीएफ जैसा होता है।
इस प्रक्रिया के बाद तैयार ईंधन को मौजूदा विमान इंजनों या हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे में बिना किसी बदलाव के 50% तक सुरक्षित रूप से मिश्रित (Blend) किया जा सकता है।
भारत ने SAF पर क्या कहा था?
दुनिया भर में हो रहे बदलावों को देखते हुए ही भारत ने भी अप्रैल 2026 में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विमान ईंधन में एथेनॉल और सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन के मिश्रण को कानूनी मंजूरी दे दी थी। यह जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों के बीच विमानन उद्योग में हो रहे वैश्विक बदलाव का ही एक हिस्सा था।
PIB द्वारा 23 अप्रैल 2026 को बताया गया था कि एविएशन टरबाइन फ्यूल (विपणन का विनियमन) आदेश 2001 में संशोधन कर SAF के साथ मिश्रित ATF को एटीएफ नियंत्रण आदेश के दायरे में लाया गया है।
केजरीवाल जो डर आज फैला रहें हैं उस पर तब ही PIB ने साफ कर दिया था कि SAF खास तौर से प्रसंस्कृत विमानन-ग्रेड हाइड्रोकार्बनों से बना होता है जो रासायनिक रूप से ATF के समान होते हैं और विमान इंजनों के साथ पूरी तरह अनुकूल होते हैं। SAF विमानन ईंधन की मूल स्वरूप, सुरक्षा या कार्य में कोई बदलाव नहीं करता है।
विमानन उपयोग के लिए SAF को शामिल करने से पहले, ICAO द्वारा मान्यता प्राप्त, ASTM इंटरनेशनल मानकों के अनुसार विमान इंजनों को कठोर परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके बाद SAF को विमानन में उपयोग के लिए स्वीकार किया जाता है।
ICAO CORSIA यानी अंतरराष्ट्रीय विमानन के लिए कार्बन उत्सर्जन की भरपाई और कमी की योजना लागू कर रहा है। CORSIA का अनिवार्य चरण 2027 से शुरू होगा। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को एक तय आधार स्तर से अधिक हुए उत्सर्जन की भरपाई करनी होगी। SAF के इस्तेमाल से इस भरपाई की जरूरत को कम किया जा सकता है।
इसी वैश्विक जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले ATF में SAF मिलाने के लिए शुरुआती लक्ष्य तय किए हैं। 2027 में 1%, 2028 में 2% और 2030 में 5% SAF मिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत में उड़ाई जा चुकी है SAF वाली फ्लाइट
यह कोई आसमानी ख्वाब नहीं है। भारत की पहली व्यावसायिक यात्री उड़ान देश में तैयार किए गए सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी SAF के मिश्रण से 2023 में ही सफलतापूर्वक उड़ाई जा चुकी है। 19 मई 2023 की TOI की रिपोर्ट बताती है कि एयरएशिया इंडिया की फ्लाइट i5-767 ने पुणे से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। इस विमान में देश में तैयार SAF और सामान्य विमान ईंधन का मिश्रण इस्तेमाल किया गया था।
दुनियाभर में उठाए जा रहे इस तरह के कदम
दुनिया के दूसरे देश भी इसी दिशा में कदम उठा रहे हैं। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने SAF मिलाने की अनिवार्य व्यवस्था शुरू की है। यूरोपीय संघ में 2025 में SAF मिलाने का लक्ष्य 2%, 2030 में 6% और 2050 तक 70% तक पहुँचने का लक्ष्य है। ब्रिटेन में यह लक्ष्य 2025 में 2%, 2030 में 10% और 2040 में 22% है।
अमेरिका SAF के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दे रहा है। जापान ने भी 2030 तक 10% SAF इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा है। सिंगापुर में 2026 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 1% SAF का इस्तेमाल जरूरी होगा और 2030 तक इस लक्ष्य को बढ़ाकर 3 से 5% किया जाएगा।
कुछ वर्ष आप पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियाँ ना खरीदें: केजरीवाल बेच रहे एक और डर
केजरीवाल ने केवल SAF को लेकर ही छूट नहीं बोला बल्कि लोगों ने नई गाड़ियाँ ना खरीदने की अपील कर कर दी। उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा, “मोदी सरकार का क्या प्लान है? पता चल रहा है कि पेट्रोल में 50% से अधिक की मिलावट करेंगे। अभी बस माहौल शांत होने का इंतजार कर रहे हैं। पहले आपकी E0 और E10 गाड़ियों में जबरदस्ती E20 पेट्रोल डालकर कबाड़ा किया।”
उन्होंने आगे लिखा, “आज अगर आप E20 नई गाड़ी खरीदते हैं तो सरकार कुछ दिन बाद उसमे जबरदस्ती E50 पेट्रोल डालकर उसका कबाड़ा कर देगी। सरकार जल्द ही डीजल में भी मिलावट करने वाली है। इसलिए अभी कुछ वर्ष आप पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियाँ खरीदने से बचें।”
मोदी सरकार का क्या प्लान है? पता चल रहा है कि पेट्रोल में 50% से ज़्यादा की मिलावट करेंगे। अभी बस माहौल शांत होने का इंतज़ार कर रहे हैं। पहले आपकी E0 और E10 गाड़ियों में ज़बरदस्ती E20 पेट्रोल डालकर कबाड़ा किया। आज अगर आप E20 नई गाड़ी खरीदते हैं तो सरकार कुछ दिन बाद उसमे ज़बरदस्ती… https://t.co/UsYfMxVn4I
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 6, 2026
केजरीवाल के इस दावे पर बीजेपी की IT सेल के मुखिया अमित मालवीया ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा, “फेक न्यूज़ फैलाना और बेवजह डर पैदा करना अरविंद केजरीवाल की पुरानी आदत है। अब नया झूठ यह फैलाया जा रहा है कि सरकार चुपके से पेट्रोल में 50% से अधिक एथेनॉल मिला देगी और लोगों की गाड़ियाँ कबाड़ हो जाएँगी।”
BJP नेता ने आगे लिखा, “भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 से आगे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि कभी ऐसा प्रस्ताव आता भी है, तो वह व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और वाहन निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद ही होगा।”
फेक न्यूज़ फैलाना और बेवजह डर पैदा करना अरविंद केजरीवाल की पुरानी आदत है।
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 6, 2026
अब नया झूठ यह फैलाया जा रहा है कि सरकार चुपके से पेट्रोल में 50% से अधिक एथेनॉल मिला देगी और लोगों की गाड़ियाँ कबाड़ हो जाएँगी।
तथ्य क्या हैं?
• भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 से आगे पेट्रोल में… https://t.co/1LRtfgCJPH
कितना खतरनाक हो सकती है केजरीवाल की यह राजनीति
केजरीवाल की यह अपील कितनी खतरनाक हो सकती है, यह देखना भी जरूरी है। सवालों के नाम पर जो सनसनी फैलानी की कोशिश अरविंद केजरीवाल कर रहे हैं उससे बड़ा आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। केजरीवाल ने जो 50% से ज्यादा एथनॉल वाली बात कही है उसके पीछे कोई तर्क नहीं है बस अपना मनगढ़ंत दावे हैं।
केजरीवाल राजनीति के नाम पर एक बेहद खतरनाक फॉर्मूला इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले आशंका पैदा करो, फिर आशंका को संभावना बताओ और आखिर में संभावना को लगभग तय सरकारी योजना की तरह जनता के सामने रख दो। और इसका नुकसान सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहता।
सोचिए, कोई मध्यमवर्गीय परिवार महीनों की बचत के बाद कार खरीदने की योजना बना रहा है। कोई व्यक्ति रोजी-रोटी के लिए बाइक खरीदना चाहता है। कोई छोटा कारोबारी नई गाड़ी से अपना काम बढ़ाना चाहता है। ऐसे में एक बड़ा राजनीतिक चेहरा सार्वजनिक रूप से कहता है कि अभी गाड़ी मत खरीदिए, आगे पेट्रोल ही बदलने वाला है। स्वाभाविक है कि आम आदमी के मन में डर पैदा होगा।
E20 को लेकर वास्तविक बहस हो सकती है। पुराने वाहनों पर प्रभाव, माइलेज, रखरखाव, ईंधन की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं को मिलने वाले विकल्प जैसे सवाल बिल्कुल जायज हैं। सरकार से जवाब माँगना भी जायज है। लेकिन इन सवालों को उठाने और यह कह देने में जमीन-आसमान का अंतर है कि 50% से ज्यादा एथनॉल आने वाला है, इसलिए नई गाड़ी मत खरीदो।
अगर करोड़ों लोगों के मन में यह धारणा बैठा दी जाए कि आने वाले वर्षों में पेट्रोल गाड़ियाँ ही भरोसे लायक नहीं रहेंगी, तो इसका सीधा झटका भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को लग सकता है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री केवल कार बनाने वाली कंपनियों का नाम नहीं है।
इसके पीछे हजारों कंपनियों की सप्लाई चेन, ऑटो पार्ट्स बनाने वाली यूनिट, डीलरशिप, सर्विस सेंटर, बीमा, फाइनेंस और लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़े हैं। एक कार की बिक्री कम होती है तो असर सिर्फ कार कंपनी के शोरूम तक नहीं रुकता।
और यह असर उस समय और गंभीर हो सकता है जब भारत का ऑटो सेक्टर एक बड़े तकनीकी बदलाव से गुजर रहा है और पेट्रोल-डीजल, हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों के बीच बाजार अपना भविष्य तय कर रहा है। ऐसे वक्त में जब नेताओं को जनता को और भरोसा देने की जरूरत है केजरीवाल जैसे नेता केवल वोट बैंक के नाम पर फर्जी सनसनी फैला रहे हैं।


