Homeदेश-समाज3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजी गईं दिशा रवि, पुलिस ने कोर्ट को...

3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजी गईं दिशा रवि, पुलिस ने कोर्ट को बताया- जवाब देने में करती हैं आनाकानी

पुलिस कस्टडी की अवधि खत्म होने पर पुलिस ने दिशा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। वहीं कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। पुलिस ने कोर्ट के सामने कहा कि वह शांतनु और निकिता के सामने दिशा से पूछताछ करना चाहती है।

टूलकिट (ToolKit) मामले में हिरासत में ली गई क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि (Disha Ravi) को आज (फरवरी 19, 2021) तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कस्टडी की अवधि खत्म होने पर पुलिस ने दिशा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। वहीं कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। पुलिस ने कोर्ट के सामने कहा कि वह शांतनु और निकिता के सामने दिशा से पूछताछ करना चाहती है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से आज दिशा की तीन दिन की हिरासत माँगते हुए कोर्ट को बताया कि दिशा रवि सवालों के जवाब देने में आना कानी करती हैं। उन्होंने मामले में अन्य आरोपित शांतनु को भी नोटिस दिया। वह 22 फरवरी को जाँच में शामिल होगा। ऐसे में दिशा का उनके साथ आमना-सामना करवाया जाएगा क्योंकि पूछताछ में दिशा ने निकिता और शांतनु पर सारा आरोप मढ़ा है।

इधर, दिशा की ओर से कोर्ट में सिद्धार्थ अग्रवाल ने मामले में पैरवी की। उन्होंने केस डायरी पेश करने की माँग की। अदालत को बताया गया कि दिशा रवि ने जमानत की अर्जी दी है, जो 20 फरवरी को सुनवाई के लिए आएगी।

गौरतलब है कि दिशा रवि पर किसान आंदोलन से जुड़े टूलकिट को संपादित करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के साइबर सेल टीम ने 13 फरवरी को इस मामले में बेंगलुरु के सोलादेवनहल्ली इलाके से दिशा को गिरफ्तार किया था। वह बीबीए से ग्रेजुएट हैं और फ्राइडेज़ फॉर फ्यूचर इंडिया’ नामक संगठन की संस्थापक सदस्य भी हैं।

पुलिस का कहना है कि फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया व उसके सदस्यों द्वारा देशविरोधी हरकतें करने में टूलकिट का इस्तेमाल कोई नया मामला नहीं है। दिशा, निकिता व शांतनु तीनों फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया से कई सालों से जुड़े हुए हैं। दिल्ली पुलिस अब इस अभियान से जुड़े लोगों की आय के स्रोतों का भी पता लगा रही है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -